निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर तीखा हमला: बताया जिन्ना का दूसरा जन्म

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से की है। उन्होंने कांग्रेस पर सोरोस के एजेंडे पर चलने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

झारखंड की राजनीति में इस समय भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। दुबे ने राहुल गांधी की तुलना पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना से करते हुए उन्हें जिन्ना से भी बदतर नेता करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के रूप में जिन्ना का दूसरा जन्म हुआ है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब झारखंड में छात्र पिछले 19 दिनों से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

राहुल गांधी और जिन्ना की तुलना पर विवाद

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन के संदर्भ में राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जहां भी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई प्रदर्शन या विरोध होता है, वहां राहुल गांधी की मौजूदगी देखी जाती है और दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक खास एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि जिन्ना की दूसरी पैदाइश राहुल गांधी जी के रूप में हो गई है। दुबे का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।

सीबीआई जांच की मांग और भ्रष्टाचार के आरोप

निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार और कांग्रेस से सवाल किया कि वे भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच से क्यों डर रहे हैं। उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी धर्मेंद्र, झारखंड सरकार के एक बहुत बड़े अधिकारी के घर से पकड़ा गया था और दुबे ने दावा किया कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम भी सामने आएगा। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में छात्रों के हितों की रक्षा करना चाहते हैं, तो उन्हें हेमंत सोरेन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए। दुबे ने यह भी कहा कि कांग्रेस का रुख ऐसा लग रहा है जैसे वे सोरोस के एजेंडे पर काम कर रहे हों।

19वें दिन भी जारी है छात्रों का संघर्ष

झारखंड में नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन बुधवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया है। ये छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने, धांधली की स्वतंत्र जांच कराने और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली में सुधार किया जाए और छात्र इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की एक समिति बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं। 19 दिनों से जारी यह आंदोलन अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

विधानसभा मार्च और पुलिस की कार्रवाई

सोमवार को आंदोलनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर कूच करने की कोशिश की थी। इस दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोलों के साथ-साथ वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में उनके कई साथी घायल हुए हैं। दूसरी ओर, रांची पुलिस ने जानकारी दी कि इस झड़प के दौरान उनके 14 जवान भी घायल हुए हैं। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति और अधिक गरमा गई है।

भाजपा का झारखंड बंद और राजनीतिक असर

पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने मंगलवार को पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया था। इस बंद का असर झारखंड के कई जिलों में देखने को मिला, जहां सड़कें जाम रहीं और बाजार पूरी तरह बंद रहे। शैक्षणिक संस्थानों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा और भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर आरोप लगाया कि वह लाठी-डंडे के दम पर छात्रों की आवाज को दबाना चाहती है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है और इसे भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बता रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आश्वासन और पलटवार

बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों को भरोसा दिलाया है कि 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भी पलटवार किया है। सोरेन ने आरोप लगाया कि भाजपा छात्रों के इस आंदोलन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कर रही है और इसे एक राजनीतिक मंच बना दिया है। अब यह आंदोलन केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गया है।