ब्राजील में राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला चुनावी मुकाबला अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। शुक्रवार से देश के प्रमुख दावेदार लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो टीवी और रेडियो पर मुफ्त विज्ञापनों के माध्यम से मतदाताओं को लुभाने की कोशिश शुरू करेंगे। हालांकि वर्तमान दौर में सोशल मीडिया का प्रभाव काफी बढ़ गया है, लेकिन ब्राजील की राजनीतिक परिस्थितियों में टीवी और रेडियो आज भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बनाए हुए हैं। इन माध्यमों के जरिए उम्मीदवार देश के उन सुदूर इलाकों तक पहुंचने में सफल होते हैं जहां इंटरनेट की पहुंच सीमित हो सकती है और चुनावी मुद्दे आम लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन जाते हैं।
उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला और राजनीतिक पृष्ठभूमि
वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा चौथी बार देश की कमान संभालने के इरादे से चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती फ्लावियो बोल्सोनारो के रूप में है, जो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के सबसे बड़े पुत्र हैं। विभिन्न चुनावी सर्वेक्षणों के परिणामों पर नजर डालें तो दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला बेहद करीबी है और वे लगभग बराबरी पर खड़े नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले दिनों में प्रचार को और अधिक आक्रामक बना सकती है।
राजनीतिक सलाहकार और ब्राजील के पूर्व मंत्री थॉमस ट्राउमन का कहना है कि इस बार का चुनाव प्रचार काफी तीखा हो सकता है। उनके अनुसार, 2022 का राष्ट्रपति चुनाव पहले ही ब्राजील के इतिहास के सबसे कटु चुनावों में से एक था और इस बार का प्रचार उससे भी ज्यादा आक्रामक होने की संभावना है। गौरतलब है कि 2022 में लूला ने जायर बोल्सोनारो को बहुत ही कम अंतर से पराजित किया था। वर्तमान में जायर बोल्सोनारो तख्तापलट की कोशिश के मामले में 27 साल की जेल की सजा काट रहे हैं, जिसका असर भी इस चुनाव पर देखा जा रहा है।
प्रचार के नियम और समय का आवंटन
ब्राजील की चुनाव प्रणाली में राजनीतिक दलों को टीवी और रेडियो पर विज्ञापन देने के लिए किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना पड़ता है। विज्ञापन के लिए समय का आवंटन पार्टियों के गठबंधन के आकार और निचले सदन में उनके प्रतिनिधित्व की संख्या के आधार पर किया जाता है। साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रूनो पोम्पेउ का मानना है कि यह व्यवस्था अमीर और गरीब पार्टियों के बीच प्रचार के संसाधनों के अंतर को कम करने में मदद करती है, जिससे सभी को अपनी बात रखने का मौका मिलता है।
चुनाव के पहले चरण का मतदान 4 अक्टूबर को निर्धारित किया गया है। इससे पहले टीवी और रेडियो चैनलों को प्रतिदिन लगभग 14 मिनट का समय करीब 1000 अलग-अलग 30 सेकंड के विज्ञापनों के लिए आवंटित करना होगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए रोजाना 12 मिनट 30 सेकंड का एक विशेष समय निर्धारित किया गया है। इस समय में से लूला और उनके सहयोगी दलों को 5 मिनट 31 सेकंड का समय मिला है, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो की पार्टी को 4 मिनट 20 सेकंड का समय दिया गया है। शेष समय को दो अन्य राजनीतिक दलों के बीच विभाजित किया जाएगा। फ्लावियो को लूला की तुलना में कम समय मिलना यह दर्शाता है कि वह बड़े राजनीतिक दलों को अपने साथ जोड़ने में लूला जितने सफल नहीं रहे हैं, जबकि 2018 में उनके पिता जायर बोल्सोनारो इस मामले में काफी आगे थे।
दूसरे चरण की संभावना और सोशल मीडिया का प्रभाव
यदि चुनाव पहले चरण में निर्णायक नहीं रहता है और दूसरे चरण की आवश्यकता पड़ती है, तो 25 अक्टूबर को होने वाले मुकाबले में दोनों अंतिम उम्मीदवारों को टीवी और रेडियो पर प्रचार के लिए बिल्कुल बराबर समय दिया जाएगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण अब टीवी और रेडियो के विज्ञापनों की शैली में भी बदलाव आ रहा है। अब विज्ञापन पहले की तुलना में अधिक सहज और कम बनावटी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, प्रचार बजट का एक हिस्सा अब टीवी और रेडियो के बजाय सोशल मीडिया के लिए विशेष सामग्री तैयार करने में खर्च किया जा रहा है, जो आधुनिक चुनाव प्रचार की बदलती तस्वीर को पेश करता है।
