नेपाल सरकार ने देश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के संबंध में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी बड़े तत्काल खतरे की आशंका नहीं दिखाई दे रही है, लेकिन एहतियात के तौर पर पूरी तरह सतर्क रहना अनिवार्य है। प्रशासन ने घोषणा की है कि वे पूरी तरह से अलर्ट मोड में हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
त्रिशूली में फिर से शुरू हुआ बचाव कार्य
इस संकट की घड़ी के बीच, नेपाल सरकार ने जानकारी दी है कि त्रिशूली क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन यानी बचाव कार्य को फिर से शुरू कर दिया गया है। नेपाल सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जल स्तर में अब तक 2 फीट की वृद्धि दर्ज की गई है। सेना और बचाव दल पूरी तरह से अलर्ट हैं और नदी के बहाव पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से नुवाकोट जिले के तटीय इलाकों में फिर से बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है, जिसके कारण स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते हुए देखे जा रहे हैं।
सरकारी प्रवक्ता का बयान और शवों की पहचान की चुनौती
नेपाल सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने राहत और बचाव कार्य में लगे सभी कर्मियों और नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे सुरक्षा का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कुल 489 शव बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि, शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बरामद किए गए शवों में से अब तक केवल 100 शवों की ही पहचान हो पाई है, जबकि 393 शवों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। इसके अलावा, कई लोग अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश के लिए अभियान जारी है।
भारतीय नागरिकों की स्थिति
इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। हालांकि, चिंता का विषय यह है कि 290 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। सरकार और बचाव एजेंसियां इन लापता भारतीयों का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
चीन में ग्लेशियर टूटने से उत्पन्न स्थिति
चीन में ग्लेशियर टूटने के कारण पानी के ओवरफ्लो होने की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने कहा कि तत्काल किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है और नेपाल सरकार ने विवरण देते हुए बताया कि चीन में छोचेन खोला और पुरेपू त्सांग्पो नदी के संगम के पास स्थित एक बड़े तालाब से ग्लेशियर टूटे हैं। इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर पानी के साथ गाद बहकर आई है और ओवरफ्लो की स्थिति बनी है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह एक सामान्य प्रक्रिया के तहत हुआ है, फिर भी एहतियात के तौर पर सतर्कता बरतना बहुत जरूरी है।
नई झील से बना हुआ है खतरा
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ के बाद भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। पहाड़ों से आए बर्फ, विशाल चट्टानों और मलबे के कारण एक नई प्राकृतिक झील बन गई है, जिसने विशेषज्ञों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इस झील में लगातार पानी जमा हो रहा है और इसके ओवरफ्लो होने की खबरें भी सामने आई हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि मलबे से बना यह प्राकृतिक बांध टूटता है, तो निचले इलाकों में एक बार फिर अचानक और भीषण बाढ़ आ सकती है। इसी कारण प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को निरंतर सावधान रहने की सलाह दी है।
