बजट 2026: क्या है सीक्रेट 'ब्लू शीट' और कैसे बनता है देश का बजट?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। हलवा सेरेमनी के बाद अधिकारी लॉक हो चुके हैं। जानें क्या है 'ब्लू शीट' का रहस्य और बजट बनने की पूरी प्रक्रिया।

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में 'आम बजट' केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश की दिशा और दशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण खाका होता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को संसद में अपना 9वां बजट पेश करने जा रही हैं। इस बजट को लेकर तैयारियां अपने अंतिम और सबसे गोपनीय चरण में पहुंच चुकी हैं। हाल ही में वित्त मंत्रालय में 'हलवा सेरेमनी' का आयोजन किया गया, जिसके बाद बजट से जुड़े लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में 'लॉक-इन' हो गए हैं। ये लोग अब सीधे बजट पेश होने के बाद ही बाहरी दुनिया के संपर्क में आएंगे। इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे ज्यादा चर्चा 'ब्लू शीट' की हो रही है, जिसे बजट की आत्मा कहा जाता है।

क्या होती है सीक्रेट 'ब्लू शीट'?

बजट की तैयारी में 'ब्लू शीट' का महत्व सबसे अधिक होता है। यह एक अत्यंत गोपनीय दस्तावेज है जिसमें बजट के सभी महत्वपूर्ण आंकड़े और गणनाएं होती हैं। इसे 'बजट एट ए ग्लेंस' का आधार माना जाता है और इस नीले रंग की शीट में सरकार की कमाई और खर्च का पूरा कच्चा चिट्ठा होता है। इसकी गोपनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त मंत्री भी इस शीट को नॉर्थ ब्लॉक से बाहर नहीं ले जा सकतीं। यह दस्तावेज हमेशा संयुक्त सचिव (बजट) की व्यक्तिगत देखरेख में रहता है। ब्लू शीट में दी गई जानकारी इतनी संवेदनशील होती है कि अगर यह लीक हो जाए, तो शेयर बाजार से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक में भूचाल आ सकता है।

1950 की वो घटना जब लीक हुआ था बजट

बजट की गोपनीयता को लेकर आज जो कड़े नियम हम देखते हैं, उनके पीछे एक ऐतिहासिक घटना है। साल 1950 तक बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन के अंदर स्थित प्रेस में होती थी और लेकिन उस साल बजट के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से लीक हो गए थे, जिसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन मथाई को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इस घटना के बाद सरकार ने बजट की छपाई की जगह बदल दी। पहले इसे मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में शिफ्ट किया गया और फिर 1980 से इसे नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही छापा जाने लगा, जहां आज एक अत्याधुनिक प्रिंटिंग प्रेस मौजूद है।

बजट बनाने की 5 महीनों की लंबी प्रक्रिया

बजट तैयार करना कोई एक-दो दिन का काम नहीं है। इसकी प्रक्रिया लगभग 5 महीने पहले यानी सितंबर-अक्टूबर में ही शुरू हो जाती है और सबसे पहले वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों का विभाग सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक सर्कुलर जारी करता है। इस सर्कुलर के जरिए उनसे अगले वित्त वर्ष के लिए उनके अनुमानित खर्च और राजस्व की जानकारी मांगी जाती है। इसके बाद कई दौर की बैठकें होती हैं, जिनमें यह तय। किया जाता है कि किस विभाग को कितनी धनराशि आवंटित की जाएगी।

हलवा सेरेमनी और 'लॉक-इन' का महत्व

बजट की छपाई शुरू होने से ठीक पहले 'हलवा सेरेमनी' आयोजित की जाती है। यह एक पारंपरिक रस्म है जो बजट की गोपनीयता की शुरुआत का प्रतीक है। इस रस्म के बाद, बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी एक तरह से 'नजरबंद' हो जाते हैं। नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में उनके रहने, खाने और सोने की पूरी व्यवस्था होती है। वहां मोबाइल जैमर्स लगाए जाते हैं और किसी को भी फोन या इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती और केवल एक लैंडलाइन फोन होता है जिस पर आने वाली कॉल्स की कड़ी निगरानी की जाती है।

बजट के विभिन्न चरण और अंतिम रूप

बजट तैयार करने के अंतिम चरणों में वित्त मंत्री विभिन्न हितधारकों जैसे उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों, किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों के साथ चर्चा करती हैं। उनकी मांगों और सुझावों पर विचार करने के बाद बजट भाषण तैयार किया जाता है। बजट पेश करने वाले दिन सुबह, वित्त मंत्री राष्ट्रपति से अनुमति लेती हैं। और फिर कैबिनेट की बैठक में बजट के प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है। इसके बाद ही सुबह 11 बजे संसद में बजट भाषण पढ़ा जाता है।

[DISCLAIMER_START] यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और बजट प्रक्रिया की सामान्य जानकारी प्रदान करता है।

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