संसद बजट सत्र आज से: राष्ट्रपति का भाषण और बजट की तैयारी, विपक्ष के तेवर कड़े

संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ सत्र की शुरुआत होगी। 1 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा, लेकिन विपक्ष और सरकार के बीच नए कानूनों को लेकर तकरार बढ़ने के आसार हैं।

संसद का बजट सत्र आज यानी बुधवार से शुरू होने जा रहा है। यह सत्र भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ होगी। राष्ट्रपति का यह अभिभाषण सरकार की भविष्य की योजनाओं और पिछले वर्ष की उपलब्धियों का एक खाका पेश करेगा।

बजट सत्र का पूरा शेड्यूल और मुख्य तारीखें

सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा और 2 अप्रैल तक चलने की संभावना है। बीच के तीन हफ्तों के अवकाश के दौरान विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर संसदीय स्थायी समितियां विचार करेंगी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी है कि यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण की शुरुआत आज से हो रही है, जो 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान मुख्य रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर प्रारंभिक चर्चा होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गुरुवार को संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) रखेंगी, जो देश की आर्थिक सेहत का लेखा-जोखा होगा। इसके बाद, रविवार 1 फरवरी को बहुप्रतीक्षित केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।

सर्वदलीय बैठक में गरमाया माहौल

सत्र शुरू होने से ठीक पहले मंगलवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में काफी गहमागहमी देखने को मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 39 दलों के 51 नेताओं ने शिरकत की। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग मांगा, लेकिन विपक्ष ने कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग रख दी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विशेष रूप से VB-G RAM G एक्ट और SIR (विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया पर दोबारा चर्चा की मांग की, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया।

हम गियर रिवर्स नहीं कर सकते - सरकार का कड़ा रुख

विपक्ष की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि VB-G RAM G जैसे कानून संसद के शीतकालीन सत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पारित किए जा चुके हैं और अब उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। रिजिजू ने दो टूक शब्दों में कहा, "एक बार जब कोई कानून देश के सामने आ जाता है, तो हमें उसका पालन करना होता है और हम गियर को रिवर्स करके अतीत में नहीं जा सकते। " उन्होंने सुझाव दिया कि विपक्ष इन मुद्दों को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उठा सकता है।

विपक्ष की नाराजगी और मुख्य मुद्दे

विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने सरकार के अड़ियल रवैये पर नाराजगी जताई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और नसीर हुसैन ने सरकार पर 'अहंकारी' होने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि SIR प्रक्रिया और MGNREGA की जगह लाए गए नए कानूनों का जमीन पर काफी विरोध हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद सरकार इस पर चर्चा से भाग रही है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ, वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति और वैश्विक तनाव के बीच भारत की विदेश नीति जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।

कुल मिलाकर, यह बजट सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। एक तरफ सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे और बजट के जरिए विकास का रोडमैप पेश करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ एकजुट विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए कमर कस चुका है।

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