Union Budget 2026 / निर्मला सीतारमण कर सकती हैं टैक्सपेयर्स के लिए 10 बड़े ऐलान, जानें क्या-क्या मिलेगा फायदा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दे सकती हैं। महंगाई से निपटने के लिए टैक्स स्लैब में बदलाव, होम लोन पर छूट, ज्वाइंट टैक्सेशन और पुरानी रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन जैसे 10 बड़े ऐलानों की उम्मीद है। इससे करोड़ों लोगों को वित्तीय लाभ मिल सकता है।

यूनियन बजट 2026 पेश होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, और देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की उम्मीदें एक बार फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। पिछले कुछ सालों में सरकार ने नई टैक्स रीजीम को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन वर्तमान आर्थिक। परिदृश्य, बढ़ती महंगाई और बदलती जरूरतों को देखते हुए इस बार बजट में कुछ बड़े और दूरगामी फैसले लिए जा सकते हैं। विभिन्न एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों की मांगों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्त मंत्री अपने आगामी बजट भाषण में 10 बड़े मुद्दों पर राहत का ऐलान कर सकती हैं, जिससे आम जनता और विभिन्न क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। इन संभावित ऐलानों का उद्देश्य न केवल टैक्सपेयर्स की जेब में अधिक पैसा छोड़ना है, बल्कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को भी गति प्रदान करना है।

टैक्स स्लैब में बदलाव की संभावना

पिछले बजट में सरकार ने नई टैक्स रीजीम के टैक्स स्लैब में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे, जिसके परिणामस्वरूप 12 लाख रुपये तक की आय को प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री कर दिया गया था। हालांकि, इस बदलाव का लाभ उन टैक्सपेयर्स को नहीं मिला जिन्होंने पुरानी टैक्स रीजीम को चुना था। इस बार, ऐसी प्रबल उम्मीद है कि सरकार पुरानी रीजीम के टैक्स स्लैब में भी थोड़ा बदलाव कर सकती है। यह कदम पुरानी रीजीम चुनने वाले टैक्सपेयर्स को भी कुछ वित्तीय राहत प्रदान करेगा, जिससे दोनों रीजीम के बीच संतुलन स्थापित हो सकेगा और सभी वर्ग के टैक्सपेयर्स को लाभ मिल पाएगा और यह बदलाव महंगाई के इस दौर में आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।

टीडीएस रेट्स की संख्या में कटौती

वर्तमान में, देश में अलग-अलग वित्तीय ट्रांजेक्शन के लिए टीडीएस (TDS – Tax Deducted at Source) के कई अलग-अलग रेट्स लागू हैं। यह जटिल प्रणाली अक्सर टैक्सपेयर्स और व्यवसायों के लिए काफी। कन्फ्यूजन पैदा करती है और अनुपालन को मुश्किल बनाती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस प्रक्रिया को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए वित्त मंत्री टीडीएस रेट्स की संख्या को काफी हद तक घटाकर केवल 2 या 3 प्रमुख श्रेणियों तक सीमित कर सकती हैं। यह कदम टैक्स अनुपालन को आसान बनाएगा और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देगा।

होम लोन पर ज्यादा डिडक्शन

रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाने की मांग कर रहा है। अभी आयकर अधिनियम की धारा 24बी के तहत होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। इस बार के बजट में सरकार इस छूट की सीमा को बढ़ाकर 4 लाख रुपये तक कर सकती है। यह कदम घर खरीदारों को एक बड़ी वित्तीय राहत प्रदान करेगा, जिससे आवास क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अधिक लोग अपने सपनों का घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। है कि पति और पत्नी के लिए ‘ज्वाइंट टैक्सेशन’ की सुविधा शुरू की जाए। अमेरिका और यूरोप जैसे कई विकसित देशों में यह सिस्टम पहले से ही सफलतापूर्वक लागू है। यदि भारत में भी यह प्रणाली लागू होती है, तो कामकाजी पति-पत्नी की कुल टैक्स देनदारी में काफी कमी आ सकती है, क्योंकि वे अपनी आय को एक साथ घोषित कर सकेंगे और संभावित रूप से कम टैक्स स्लैब में आ सकेंगे। यह परिवारों के लिए एक बड़ा वित्तीय लाभ होगा।

एलटीसीजी लिमिट में बढ़ोतरी

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) की टैक्स-फ्री लिमिट में बढ़ोतरी की जा सकती है। वर्तमान में, एक वित्तीय वर्ष में इक्विटी और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स से होने वाले 1 और 25 लाख रुपये तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इस बार के बजट में इस लिमिट को बढ़ाकर 1 और 5 लाख रुपये किए जाने की संभावना है। यह कदम निवेशकों को शेयर बाजार में अधिक निवेश करने। के लिए प्रोत्साहित करेगा और पूंजी बाजार को मजबूती प्रदान करेगा।

नई रीजीम में इंश्योरेंस पर छूट

अभी तक, टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर मिलने वाला टैक्स डिडक्शन केवल पुरानी टैक्स रीजीम में ही उपलब्ध है। नई टैक्स रीजीम को और अधिक आकर्षक बनाने और लोगों को इसके प्रति प्रोत्साहित करने के लिए, इस बजट में सरकार नई रीजीम में भी इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट का ऐलान कर सकती है। यह कदम न केवल नई रीजीम को लोकप्रिय बनाएगा, बल्कि लोगों को। बीमा पॉलिसियां खरीदने और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी प्रेरित करेगा।

एफोर्डेबल हाउसिंग की नई परिभाषा

भारत के मेट्रो शहरों में घरों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे ‘किफायती आवास’ की मौजूदा परिभाषा अप्रासंगिक हो गई है। वर्तमान में, 45 लाख रुपये तक के घर को ही ‘किफायती’ माना जाता है, जिससे बड़े शहरों में कई मध्यम वर्ग के लोग इस श्रेणी से बाहर हो जाते हैं। सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर सकती है, जिससे अधिक लोग एफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम का लाभ उठा सकेंगे। यह कदम शहरी आवास की समस्या को हल करने में मदद। करेगा और मध्यम आय वर्ग के लिए घर खरीदना आसान बनाएगा।

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर सस्ता लोन

पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) को बढ़ावा देने के लिए सरकार इस बजट में महत्वपूर्ण उपाय कर सकती है। उम्मीद है कि सरकार ईवी लोन पर ब्याज दरों में कमी लाने के लिए प्रोत्साहन या सब्सिडी का ऐलान कर सकती है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना अधिक किफायती हो जाएगा, जिससे लोगों की दिलचस्पी पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने में बढ़ेगी। यह देश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होगा।

डेट फंड्स के टैक्स नियमों में बदलाव

पिछले बजट में डेट फंड्स से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस मानकर टैक्स के नियम सख्त कर दिए गए थे, जिससे इन फंड्स में निवेशकों की रुचि में कमी आई थी। इस बार सरकार इन नियमों में कुछ ढील देकर निवेशकों को वापस डेट फंड्स की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर सकती है। यह कदम डेट मार्केट को पुनर्जीवित करेगा और निवेशकों को विभिन्न निवेश विकल्पों में संतुलन बनाने में मदद करेगा।

पुरानी रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन

नई टैक्स रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़कर 75,000 रुपये हो चुका है, जबकि पुरानी टैक्स रीजीम में यह अभी भी 50,000 रुपये पर स्थिर है। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार पुरानी रीजीम में भी स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। यह कदम पुरानी रीजीम चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण। वित्तीय राहत प्रदान करेगा, जिससे उनकी डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होगी।