भारत का आम बजट 2026 आज रविवार 1 फरवरी को संसद के पटल पर रखा जा रहा है। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस वर्ष अपना लगातार 9वां बजट पेश कर इतिहास रचने जा रही हैं। इस महत्वपूर्ण विधायी प्रक्रिया के बीच भारतीय संसदीय इतिहास के उन रिकॉर्ड्स पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जो बजट भाषणों की अवधि और उनकी शब्द सीमा से जुड़े हैं। जहाँ एक ओर वर्तमान वित्त मंत्री के नाम सबसे लंबे भाषण का रिकॉर्ड है, वहीं देश के इतिहास में एक ऐसा भी समय था जब मात्र 800 शब्दों में पूरा बजट विवरण प्रस्तुत कर दिया गया था।
हिरूभाई मुल्जीभाई पटेल का 800 शब्दों का रिकॉर्ड
M. Patel) के नाम दर्ज है और वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान उन्होंने अंतरिम बजट पेश किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, यह भाषण केवल 800 शब्दों का था। उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और अंतरिम प्रकृति के कारण इस बजट को अत्यंत संक्षिप्त रखा गया था। इसके विपरीत, सबसे लंबे बजट भाषण का रिकॉर्ड वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास है। उन्होंने 1 फरवरी 2020 को 2 घंटे 40 मिनट तक भाषण दिया था, जो शब्द और समय दोनों के लिहाज से एक कीर्तिमान है।
सर्वाधिक बार बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री
आजाद भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का गौरव पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को प्राप्त है और उन्होंने कुल 10 बार बजट पेश किया, जिसमें 1959-1964 के बीच छह और 1967-1969 के बीच चार बजट शामिल थे। उनके बाद पी. चिदंबरम ने 9 बार और प्रणब मुखर्जी ने 8 बार बजट पेश किया है। निर्मला सीतारमण आज अपना 9वां बजट पेश कर पी. चिदंबरम की बराबरी कर लेंगी। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि वह लगातार बजट पेश करने के मामले में कई दिग्गजों को पीछे छोड़ चुकी हैं।
बजट 2026 का आधिकारिक कार्यक्रम और समय
आज बजट पेश करने की प्रक्रिया सुबह 8:30 बजे से शुरू हो चुकी है, जब वित्त मंत्री मंत्रालय पहुंचीं। आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार, बजट को अंतिम रूप देने के बाद वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और बजट की औपचारिक प्रति सौंपी। इसके पश्चात सुबह 10:15 बजे संसद भवन में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई, जहाँ बजट प्रस्तावों को औपचारिक मंजूरी दी गई। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सुबह 11:00 बजे वित्त मंत्री अपना बजट भाषण शुरू करेंगी। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार है जब रविवार के दिन आम बजट पेश किया जा रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार, बजट भाषणों की लंबाई समय के साथ बदलती रही है। शुरुआती दशकों में बजट मुख्य रूप से राजस्व और व्यय का लेखा-जोखा होता था, जिससे भाषण संक्षिप्त रहते थे। हालांकि, 1990 के दशक के आर्थिक सुधारों के बाद बजट में व्यापक नीतिगत घोषणाएं और विभिन्न क्षेत्रों के लिए विस्तृत योजनाओं का समावेश होने लगा, जिससे भाषणों की अवधि बढ़ती गई। 1977 का पटेल का 800 शब्दों का भाषण और 2020 का सीतारमण का 160 मिनट का भाषण भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और बजटीय जटिलताओं के विस्तार को दर्शाता है।
आज का बजट कई मायनों में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा निर्धारित करेगा और किसान, मध्यम वर्ग और कॉर्पोरेट जगत की निगाहें उन घोषणाओं पर टिकी हैं जो राजकोषीय घाटे और विकास दर के बीच संतुलन स्थापित करेंगी। रविवार को बजट पेश करने का निर्णय भी प्रशासनिक दक्षता और बाजार की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है।
