केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के लिए एक नया उत्पाद शुल्क (Excise Duty) ढांचा प्रभावी कर दिया है। इस नीतिगत बदलाव के परिणामस्वरूप देश भर में धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से वृद्धि हो गई है। यह कदम पिछले सात वर्षों में सिगरेट पर की गई सबसे बड़ी कर वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के इस निर्णय का प्राथमिक उद्देश्य भारत की तंबाकू कर व्यवस्था को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप बनाना है।
कर संरचना में व्यापक बदलाव
नई व्यवस्था के तहत, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले कर के ढांचे को पूरी तरह से पुनर्गठित किया गया है। पहले इन उत्पादों पर 28% जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) लगाया जाता था। अब इसे बदलकर अधिकतम 40% जीएसटी, सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और संबंधित उपकर में परिवर्तित कर दिया गया है। सरकार ने क्षतिपूर्ति उपकर को हटाकर इस नई कर प्रणाली को लागू किया है, जिससे कर गणना की प्रक्रिया में बदलाव आया है।
सिगरेट की लंबाई के आधार पर मूल्य वृद्धि
सिगरेट की कीमतों में वृद्धि को इसकी लंबाई और प्रकार के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। 05 प्रति स्टिक का अतिरिक्त भार आएगा। 10 प्रति स्टिक की बढ़ोतरी की गई है। 60 से ₹4 प्रति स्टिक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। 50 प्रति स्टिक तक का कर लगाया जा सकता है।
पान मसाला और गुटखा के लिए नए नियम
पान मसाला, खैनी, जर्दा और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए अब एमआरपी (MRP) आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है। अब जीएसटी की गणना निर्माण लागत के बजाय पैकेट पर अंकित खुदरा मूल्य के आधार पर की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 'स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर' (HNSC) को उत्पादन क्षमता के आधार पर लगाया जाएगा। इस बदलाव के बाद गुटखा पर कुल कर का बोझ 91% तक पहुंच सकता है, जबकि पान मसाला पर यह 88% और चबाने वाले तंबाकू पर 82% रहने का अनुमान है।
विनिर्माण और निगरानी के सख्त मानक
सरकार ने तंबाकू उत्पाद निर्माताओं के लिए कड़े अनुपालन नियम भी निर्धारित किए हैं। नए नियमों के तहत, सभी निर्माताओं को ताजा पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। विनिर्माण इकाइयों में सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे और उनकी फुटेज को कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखना होगा। मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता की विस्तृत जानकारी उत्पाद शुल्क अधिकारियों को देना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई मशीन 15 दिन या उससे अधिक समय तक बंद रहती है, तो निर्माता शुल्क में छूट का दावा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया का पालन करना होगा।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और बाजार प्रभाव
विश्लेषकों के अनुसार, इस कर वृद्धि का मुख्य उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और तंबाकू के सेवन को हतोत्साहित करना है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि सिगरेट पर कुल कर का बोझ खुदरा मूल्य का कम से कम 75% होना चाहिए। क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कर वृद्धि के कारण अगले वित्त वर्ष में घरेलू सिगरेट उद्योग की बिक्री मात्रा (Volume) में 6% से 8% तक की गिरावट आने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि करों में अत्यधिक वृद्धि से अवैध तस्करी और गैर-कर भुगतान वाली सिगरेटों के बाजार में वृद्धि का जोखिम बना रहता है। सरकार का वर्तमान ध्यान स्वास्थ्य सुरक्षा और कर अनुपालन को मजबूत करने पर केंद्रित है।
