बजट 2026: चांदी की कीमतों और औद्योगिक मांग पर नीतिगत बदलावों का संभावित प्रभाव

केंद्रीय बजट 2026 से पहले चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उद्योग विशेषज्ञ आयात शुल्क में बदलाव और सौर ऊर्जा एवं इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों के लिए नए प्रोत्साहनों की उम्मीद कर रहे हैं, जो चांदी की औद्योगिक और निवेश मांग को नई दिशा दे सकते हैं।

बजट 2026 और चांदी बाजार की वर्तमान स्थिति

भारत के आगामी केंद्रीय बजट 2026 की तैयारियों के बीच, कमोडिटी बाजार और औद्योगिक क्षेत्रों की नजरें चांदी पर टिकी हुई हैं। चांदी एक ऐसी धातु है जो न केवल निवेश के लिए सुरक्षित मानी जाती है, बल्कि आधुनिक उद्योगों में भी इसकी अनिवार्य भूमिका है। वर्तमान में चांदी की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे नीतिगत संकेतों का महत्व और बढ़ गया है। विश्लेषकों के अनुसार, बजट 2026 के दौरान आयात शुल्क और औद्योगिक प्रोत्साहनों में किए जाने वाले बदलाव इस कीमती धातु की मांग और आपूर्ति के समीकरण को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव और ऐतिहासिक रुझान

वर्ष 2026 की शुरुआत चांदी के बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। 20 लाख के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थीं। 91 लाख के स्तर पर आ गईं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थिरता के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति का दबाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग जैसे कारक जिम्मेदार हैं। बजट से पहले इस तरह की हलचल यह संकेत देती है कि उद्योग जगत सरकार से स्पष्ट राजकोषीय दिशा-निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहा है।

आयात शुल्क में संशोधन और घरेलू बाजार पर प्रभाव

भारत अपनी चांदी की कुल आवश्यकता का लगभग 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है। 5% सीमा शुल्क और 3% जीएसटी प्रभावी है। बजट 2026 में आयात शुल्क में किसी भी प्रकार का संशोधन सीधे तौर पर घरेलू कीमतों को प्रभावित करेगा। रत्न और आभूषण क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सरकार से आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाने की मांग की है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि सरकार शुल्क में कटौती करती है, तो इससे भौतिक चांदी की मांग में वृद्धि हो सकती है, जिससे यह आभूषण निर्माताओं और खुदरा निवेशकों के लिए अधिक सुलभ हो जाएगी। इसके विपरीत, शुल्क में वृद्धि से लागत बढ़ सकती है, जो मांग को सीमित कर सकती है।

हरित ऊर्जा और औद्योगिक मांग का भविष्य

चांदी की औद्योगिक मांग का एक बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से आता है। सौर पैनलों के निर्माण में चांदी की उच्च विद्युत चालकता का उपयोग किया जाता है। बजट 2026 में सौर बुनियादी ढांचे के लिए संभावित प्रोत्साहन और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के विस्तार से चांदी की औद्योगिक खपत में 15-20% की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की 'नेट जीरो' उत्सर्जन की प्रतिबद्धता चांदी जैसी धातुओं की मांग को दीर्घकालिक समर्थन प्रदान कर सकती है, क्योंकि यह हरित तकनीक का एक अनिवार्य घटक है।

इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चांदी की भूमिका

इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग चांदी के लिए एक उभरता हुआ बाजार है। पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी प्रबंधन प्रणाली और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी का व्यापक उपयोग होता है। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक चिराग मुनि के अनुसार, वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक्स और विद्युत अनुप्रयोग कुल औद्योगिक चांदी की मांग का लगभग 68% हिस्सा हैं। बजट 2026 में ईवी विनिर्माण और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के लिए दिए जाने वाले किसी भी बजटीय आवंटन से चांदी की मांग को और गति मिल सकती है। हालांकि, उच्च कीमतों के कारण निर्माता अब कम लागत वाले विकल्पों की भी तलाश कर रहे हैं, जो भविष्य की मांग के लिए एक चुनौती हो सकती है।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और निष्कर्ष

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