बजट सत्र से पहले घमासान: सरकार ने ठुकराई G-RAM-G और SIR पर चर्चा की मांग

बजट सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। सरकार ने विपक्ष की G-RAM-G कानून और SIR पर चर्चा की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे सदन में हंगामे के आसार बढ़ गए हैं।

संसद के बजट सत्र के आगाज से ठीक पहले देश की राजनीति में गरमाहट बढ़ गई है। मंगलवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्षी दलों के बीच कई मुद्दों पर असहमति देखने को मिली। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें 39 राजनीतिक दलों के 51 नेताओं ने शिरकत की। बैठक का मुख्य उद्देश्य सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्ष का सहयोग प्राप्त करना था, लेकिन विपक्ष के कड़े तेवरों ने संकेत दे दिए हैं कि आगामी सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है।

G-RAM-G और SIR पर तकरार

विपक्ष ने बैठक के दौरान विशेष रूप से G-RAM-G कानून और SIR (Sovereign Investment Reform) पर विस्तृत चर्चा की मांग रखी और हालांकि, सरकार ने इस मांग को स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोटूक शब्दों में कहा कि इन दोनों विषयों पर संसद में पहले ही विस्तार से चर्चा हो चुकी है और उन्होंने तर्क दिया कि एक बार जब कोई कानून लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत देश के सामने आ जाता है, तो उसे लागू करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। रिजिजू ने कहा कि हम गियर रिवर्स करके पीछे नहीं जा सकते और न ही बार-बार एक ही मुद्दे पर सदन का समय बर्बाद कर सकते हैं।

विपक्ष ने उठाए कई ज्वलंत मुद्दे

बैठक में कांग्रेस नेता जयराम रमेश और सीपीएम के जॉन ब्रिटास ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने इस बात पर आपत्ति जताई कि बजट सत्र के लिए सरकारी कामकाज की आधिकारिक सूची अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अलावा, नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने यूजीसी की नई गाइडलाइंस का मुद्दा उठाते हुए इसे दलित और पिछड़ा वर्ग विरोधी बताया। विपक्ष ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह लाए। गए G-RAM-G कानून पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और इसे गरीब विरोधी करार दिया।

अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर घेराव

विपक्षी दलों ने केवल घरेलू मुद्दों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। बैठक में भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, बदलती विदेश नीति, देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा की मांग की गई। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि बजट सत्र का प्राथमिक उद्देश्य देश की आर्थिक रूपरेखा तय करना है, इसलिए अन्य मुद्दों को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उठाया जा सकता है।

किरेन रिजिजू की विपक्ष से अपील

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह साल का पहला सत्र है और जनता ने हमें उनकी आवाज बनने के लिए चुना है। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार बजट सत्र के दौरान हर चर्चा बजट पर ही केंद्रित रहनी चाहिए और उन्होंने विपक्षी सांसदों से आग्रह किया कि वे अपनी बात रखें, लेकिन सदन की कार्यवाही में बाधा न डालें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर विपक्ष हंगामा करके सदन से भागता है, तो इससे देश का नुकसान होता है।

बजट सत्र का पूरा शेड्यूल

संसद का बजट सत्र कल से शुरू हो रहा है। कार्यक्रम के अनुसार, कल राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा, जिसके बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी। गुरुवार को सरकार आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश करेगी, जो देश की आर्थिक सेहत का लेखा-जोखा होगा। इसके बाद, 1 फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा आम बजट पेश किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस सत्र में अधिकतम विधायी कार्य पूरे किए जाएं, जबकि विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

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