देश के तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में छह उपचुनावों के लिए आज मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो गई है और मतदाता सुबह 7 बजे से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में लगकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनावी संग्राम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके, टीवीके और सीपीआई समेत कई प्रमुख राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत के साथ आमने-सामने हैं। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर सबकी विशेष नजर है, क्योंकि यहां का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। इसके अलावा तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों, पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट और असम की नागांव लोकसभा सीट पर भी आज वोट डाले जा रहे हैं।
सीटें खाली होने का मुख्य कारण
ये उपचुनाव उन परिस्थितियों में हो रहे हैं जब एक से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करने वाले विधायकों या सांसदों ने अपनी एक पसंदीदा सीट अपने पास रखी और दूसरी सीट से इस्तीफा दे दिया। इन चुनावों के परिणाम न केवल खाली सीटों को भरेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जनता का झुकाव किस ओर है। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर का मतदान महज दो सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के 15 साल के शासन के बाद बीजेपी के लिए एक बड़े चुनावी परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है। इन उपचुनावों से यह संकेत मिलने की भी उम्मीद है कि बिखरे हुए विपक्ष में कौन सी पार्टी बीजेपी के सामने मुख्य चुनौती बनकर उभरेगी।
नंदीग्राम और रेजीनगर का सियासी समीकरण
इन उपचुनावों के जरिए मई में सत्ता संभालने के बाद बीजेपी सरकार के प्रति मतदाताओं की शुरुआती प्रतिक्रिया का आकलन किया जाएगा और राजनीतिक दल और विश्लेषक इन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं के रुझान को समझने की भी कोशिश कर रहे हैं। नंदीग्राम सीट का राजनीतिक महत्व होने के साथ-साथ एक भावनात्मक पहलू भी है। बीजेपी ने यहां से हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। हसीरानी रथ स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते थे और विधानसभा चुनाव में जीत के कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई थी और विपक्ष ने भी यहां मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेकर कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया है और वहीं, रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी तृणमूल गुट ने मोहम्मद एतेशमुल हक को मैदान में उतारा है, जबकि सीपीआई भी इस दौड़ में मजबूती से शामिल है।
असम और तमिलनाडु में चुनावी बिसात
रेजीनगर सीट पर बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई-एम और टीएमसी के दो गुटों के अलावा आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) भी मैदान में है। AJUP ने गुलाम नबी आजाद को टिकट दिया है, जो पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के बेटे हैं। हुमायूं कबीर ने नौदा सीट अपने पास रखने के लिए रेजीनगर सीट छोड़ दी थी। असम की बात करें तो वहां की मुस्लिम बहुल नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव काफी रोमांचक हो गया है। सत्तारूढ़ बीजेपी यहां अपनी जीत के जरिए अपना दायरा बढ़ाना चाहती है, जबकि कांग्रेस अपनी इस पारंपरिक सीट को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। एआईयूडीएफ भी अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश में है, जिसकी सदस्य संख्या अप्रैल के चुनाव में 16 से घटकर केवल 2 रह गई थी। नागांव में कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 9 निर्दलीय हैं। मुख्य मुकाबला कांग्रेस की सिबामोनी बोरा, बीजेपी के देवाशीष शर्मा और एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल के बीच माना जा रहा है। टीएमसी के अब्दुल सलाम ने चुनाव आयोग के एक फैसले के विरोध में अपना नाम वापस ले लिया था।
तमिलनाडु का शक्ति प्रदर्शन
तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम सीटों पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय, एमके स्टालिन, उदयनिधि स्टालिन और एडप्पादी के पलानीस्वामी ने जमकर प्रचार किया है। आमतौर पर उपचुनावों में इतनी बड़ी रैलियां नहीं देखी जातीं, लेकिन इस बार नेताओं की सक्रियता ने इसके महत्व को बढ़ा दिया है। तमिलनाडु विधानसभा में वर्तमान में टीवीके के पास 107 विधायक हैं, डीएमके के पास 59, अन्नाद्रमुक के पास 41, कांग्रेस के पास 5, पीएमके के पास 4, जबकि भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल के पास 2-2 विधायक हैं। सदन में प्रभावी सदस्यों की संख्या 227 है। आज शाम 6 बजे तक मतदान चलेगा और सभी की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी। इन सभी छह सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
