Chaitra Navratri 2026: सिर्फ मंदिर में अखंड ज्योत ही नहीं, नवरात्रि में इन जगहों पर भी दिया जलाना होता है शुभ

चैत्र नवरात्रि 2026 के दौरान मंदिरों में अखंड ज्योत के साथ घर के विभिन्न हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार, तुलसी और रसोई जैसे स्थानों पर दीप प्रज्वलन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त नौ दिनों तक शक्ति की उपासना करते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 का उत्सव देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो माता दुर्गा के 'ब्रह्मचारिणी' स्वरूप को समर्पित है और इस अवसर पर श्रद्धालु मंदिरों और घरों में कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योत प्रज्वलित कर रहे हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में केवल पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि घर के कुछ अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। विद्वानों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इन स्थानों पर दीप प्रज्वलन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे शक्ति की उपासना का एक अभिन्न अंग माना जाता है।

नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का केंद्र है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाला यह पर्व नौ दिनों तक चलता है। इसमें अखंड ज्योत का विशेष महत्व है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय और देवी की निरंतर उपस्थिति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक की लौ को ज्ञान और पवित्रता का सूचक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान भक्त अपने घरों को शुद्ध करते हैं और विभिन्न अनुष्ठानों के माध्यम से देवी का आह्वान करते हैं। इस दौरान दीप प्रज्वलन के नियमों का पालन करना सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है।

मुख्य द्वार पर दीप प्रज्वलन और उसका महत्व

हिंदू धर्म में घर के मुख्य प्रवेश द्वार को अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे 'शुभता का द्वार' कहा जाता है, जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा और दैवीय शक्तियाँ घर में प्रवेश करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों तक शाम के समय सूर्यास्त के बाद मुख्य द्वार के दाईं ओर घी या तेल का दीपक जलाना चाहिए। जानकारों के अनुसार, ऐसा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाना माता रानी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है, जिससे घर में शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है।

तुलसी के समीप दीपक और आध्यात्मिक लाभ

तुलसी के पौधे को हिंदू परिवारों में साक्षात देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। नवरात्रि के दौरान तुलसी पूजन का महत्व और भी बढ़ जाता है। परंपरा के अनुसार, रोजाना शाम को तुलसी के पौधे के पास एक घी का दीपक जलाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों के अनुसार, तुलसी के पास दीपक जलाने से घर के वास्तु दोषों का शमन होता है। यह अभ्यास न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य भी बढ़ाता है। नवरात्रि में तुलसी की सेवा को देवी दुर्गा की आराधना के समान ही फलदायी माना गया है।

रसोई घर में माता अन्नपूर्णा का सम्मान

रसोई घर को घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि यहाँ भोजन तैयार होता है, जो जीवन का आधार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रसोई में माता अन्नपूर्णा का वास होता है। नवरात्रि के दौरान रात के समय रसोई में एक दीपक जलाकर रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। विद्वानों के अनुसार, यह अभ्यास घर में अन्न और धन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। रसोई की स्वच्छता और वहाँ दीप प्रज्वलन को गृहलक्ष्मी के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है, जिससे परिवार में संपन्नता बनी रहती है।

धन स्थान और तिजोरी में प्रकाश की परंपरा

नवरात्रि के पावन अवसर पर घर की अलमारी या तिजोरी, जहाँ धन और कीमती आभूषण रखे जाते हैं, वहाँ दीपक जलाना एक पुरानी परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार, धन के स्थान पर प्रकाश करने से माता लक्ष्मी और देवी दुर्गा की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। यह अनुष्ठान आर्थिक स्थिरता और समृद्धि की कामना के साथ किया जाता है। शाम के समय तिजोरी के पास दीपक रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जो परिवार की आर्थिक उन्नति में सहायक माना जाता है।

घर के आंगन में दीप प्रज्वलन और वास्तु प्रभाव

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का आंगन या मध्य भाग जिसे 'ब्रह्मस्थान' कहा जाता है, ऊर्जा का मुख्य केंद्र होता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक आंगन में दीपक जलाना घर की आंतरिक शांति के लिए आवश्यक माना गया है। जानकारों के अनुसार, आंगन के बीचों-बीच दीपक जलाने से पूरे घर में सकारात्मक तरंगें फैलती हैं, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और घर का वातावरण सुखद बना रहता है। यह परंपरा घर के सभी कोनों को दैवीय प्रकाश से आलोकित करने के उद्देश्य से निभाई जाती है।