सीजेपी नेता अभिजीत दिपके को एसईएम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत, भरना पड़ा पचास हजार का मुचलका

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके को एसईएम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। उन्हें पचास हजार रुपये के श्योरिटी बॉन्ड और पीस बॉन्ड पर रिहा किया गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं और समर्थकों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है और पार्टी के नेता अभिजीत दिपके को एसईएम कोर्ट (SEM Court) से सशर्त जमानत मिल गई है। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और लोगों में एक बार फिर से भारी उत्साह और ऊर्जा का माहौल नजर आ रहा है और अभिजीत दिपके की कानूनी लड़ाई में यह एक बड़ा पड़ाव माना जा रहा है, जिससे उनकी रिհाई का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।

कैसे मिली अभिजीत दिपके को जमानत और क्या हैं शर्तें

मिली हुई पुख्ता जानकारी के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके को एक पीस बॉन्ड (शांति बनाए रखने का मुचलका) के आधार पर जमानत दी गई है, जिसकी तमाम कंडीशंस और शर्तें अदालत यानी कोर्ट द्वारा तय की गई हैं। अदालत के निर्देशानुसार उन्हें पचास हजार रुपये के श्योरिटी बॉन्ड पर यह जमानत प्रदान की गई है। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान आया सामने

इस पूरे घटनाक्रम और कानूनी कार्यवाही के बीच दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान भी सामने आ चुका है और दिल्ली पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ अदालत द्वारा जमानत दे दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एक पीस बॉन्ड यानी शांति बनाए रखने के मुचलके पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें कानूनी रूप से रिहा कर दिया जाएगा और पुलिस और अदालत की इन औपचारिकता के बाद दिपके की स्वतंत्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

किन धाराओं के तहत की गई थी गिरफ्तारी

यहाँ यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर किन परिस्थितियों और धाराओं के तहत अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके और उनके साथ नेहा बोरा को प्रिवेंटिव सेक्शन्स (एहतियाती धाराओं) के तहत हिरासत में लिया था। इसके बाद कानूनी औपचारिकताएं (लौगल फॉर्मेलिटी) पूरी करने के बाद नेहा बोरा को छियासठ यानी 65 डीपी एक्ट के तहत छोड़ दिया गया था। लेकिन अभिजीत दिपके को शांति भंग के एक मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस (BNSS) की धारा 126 और धारा 170 के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके पश्चात आज अभिजीत दिपके को एसईएम कोर्ट (SEM Court) में आधिकारिक रूप से पेश किया गया, जहाँ सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी।

कानूनी प्रावधान: बीएनएसएस की धारा 126 और 170

अभिजीत दिपके की जिन धाराओं में गिरफ्तारी हुई थी, वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की बेहद चर्चित धारा 126 और धारा 170 थीं। इन कानूनी प्रावधानों के तहत, धारा 126 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के द्वारा शांति बनाए रखने के लिए किसी व्यक्ति से मुचलका या बॉन्ड भरवाया जाता है। वहीं दूसरी ओर, धारा 170 के तहत पुलिस के पास यह विशेष अधिकार होता है कि वह शांति भंग होने की आशंका या किसी संभावित अपराध को रोकने के लिए एहतियातन तौर पर किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी कर सकती है। इन्हीं कानूनी प्रावधानों के तहत दिपके पर कार्रवाई की गई थी।

ममता बनर्जी ने किया था अभिजीत दिपके का खुला समर्थन

इस पूरे मामले में एक और बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया था जब यह खबर सार्वजनिक हुई थी कि दिल्ली में तिरंगा मार्च का ऐलान करने वाले सीजेपी के लीडर अभिजीत दिपके को जब दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, तब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके पूर्ण समर्थन में उतर आईं। ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को जमकर खरी-खरी सुनाई थीं और तीखी आलोचना की थी। ममता ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अभिजीत दिपके और उनके सभी साथी बिल्कुल भी ना घबराएं, क्योंकि अभी दीदी हर कदम पर उनके साथ हैं।

सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी का पोस्ट

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी और हिरासत के इस पूरे मामले को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने इस गंभीर मामले को लेकर अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर एक पोस्ट भी साझा किया था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर इस खबर को और अधिक चर्चा में ला दिया था और ममता बनर्जी के इस मुखर समर्थन के बाद से ही कॉकरोच जनता पार्टी के इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया था, और अब एसईएम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है।