CJP का लहरा दो तिरंगा अभियान: दिल्ली पुलिस ने नहीं दी इजाजत, सेंट्रल पार्क बंद

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'लहरा दो तिरंगा' अभियान को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। हाईकोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन पुलिस ने कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू कर सेंट्रल पार्क को आम जनता के लिए बंद कर दिया है।

देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति न मिलने के बाद अब सारा ध्यान कनॉट प्लेस के हृदय स्थल यानी सेंट्रल पार्क पर केंद्रित हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान चलाने की घोषणा की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम के लिए इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है और पुलिस का तर्क है कि कनॉट प्लेस कोई निर्धारित विरोध स्थल नहीं है और वहां इस तरह के बड़े जमावड़े से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इस बीच, मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया जहां से प्रदर्शन को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पार्क की बंदी

CJP के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं और राष्ट्रीय राजधानी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को पहले ही तैनात कर दिया गया है। सुरक्षा कारणों और संभावित तिरंगा मार्च को ध्यान में रखते हुए, कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 अक्टूबर और 17 अक्टूबर को आम जनता के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रणनीतिक स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया जाएगा और कई जगहों पर बैरिकेडिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों और यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करना है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और सुनवाई

गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और इसके संस्थापक अभिजीत दिपके को शुक्रवार को सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन करने से रोकने से इनकार कर दिया। यह सुनवाई कनॉट प्लेस के एक दुकानदार द्वारा दायर याचिका पर हो रही थी और याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि त्योहारी सीजन के दौरान अगर विरोध-प्रदर्शन की वजह से एक और वीकेंड पर दुकानें बंद रहीं, तो व्यापारियों और विक्रेताओं को भारी आर्थिक नुकसान होगा और वे सड़क पर आ जाएंगे। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि CJP की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं और याचिकाकर्ता की चिंताओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

विरोध का मुख्य कारण: सौरव और आशुतोष की गिरफ्तारी

इस पूरे विवाद की जड़ में CJP के दो सदस्यों, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी है। अभिजीत दिपके ने बुधवार को लोगों से आह्वान किया था कि वे शुक्रवार को तिरंगे के साथ सेंट्रल पार्क में जुटें। दिपके का आरोप है कि सौरव और आशुतोष को केवल तिरंगा फहराने की वजह से जेल में डाल दिया गया है। बता दें कि सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति मुचलके का उल्लंघन करने और जंतर-मंतर में जबरन घुसने के आरोप में बुधवार को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में दिल्ली के तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इसी घटनाक्रम के बाद दिपके ने सेंट्रल पार्क में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया था।

धारा 163 लागू और पुलिस की अपील

दिल्ली पुलिस ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कनॉट प्लेस और उसके आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे इस प्रदर्शन में शामिल न हों। पुलिस का कहना है कि शांति बनाए रखना और सरकारी व निजी संपत्तियों की सुरक्षा करना उनकी प्राथमिकता है। हाईकोर्ट में जब याचिकाकर्ता के वकील ने CJP को रोकने के लिए विशिष्ट निर्देश जारी करने का अनुरोध किया, तो बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा, “जिद न करें। ” कोर्ट ने पुलिस के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया है जिसमें कहा गया है कि स्थिति को व्यवस्थित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।