राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार ने हाल ही में देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर बेहद गंभीर और तीखे सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों की कार्यप्रणाली, उनकी वित्तीय पृष्ठभूमि और उनके पीछे छिपे एजेंडों पर खुलकर बात की। इंद्रेश कुमार ने सीधे तौर पर यह सवाल खड़ा किया कि आखिर इन आंदोलनों और प्रदर्शनों के लिए पैसा कहां से आ रहा है और उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों में शामिल होने वाले देश के युवाओं को कुछ निहित स्वार्थ वाले और अराजक तत्व लगातार गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
इंद्रेश कुमार ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इस बात की गहरी आशंका जताई कि कहीं इन प्रदर्शनों के जरिए भारत में भी बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की गहरी साजिश तो नहीं रची जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि बांग्लादेश में किस प्रकार की अराजकता, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, सूफी परंपरा को मानने वालों की निर्मम हत्याएं और आम लोगों का बड़े पैमाने पर विस्थापन देखने को मिला था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह इस समय का सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर सवाल है कि देश के युवाओं और दूसरे प्रदर्शनकारियों को इन तमाम गतिविधियों को संचालित करने के लिए आर्थिक मदद कहां से मिल रही है। उन्होंने विदेशी फंडिंग की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन आंदोलनों के पीछे बाहरी ताकतें सक्रिय हो सकती हैं जो देश की शांति व्यवस्था को बाधित करना चाहती हैं।
अपने संबोधन में आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने यह भी दावा किया कि आम जनता अब इन तथाकथित आंदोलनों की हकीकत को भली-भांति समझ चुकी है। दुनिया और देश के सामने यह बात धीरे-धीरे पूरी तरह साफ होती जा रही है कि इन प्रदर्शनों के पीछे जनता का वास्तविक समर्थन नहीं है, बल्कि कुछ गिने-चुने लोगों का एजेंडा काम कर रहा है। इसी वजह से अब इन प्रदर्शनों में भाग लेने वाली भीड़ लगातार घटती जा रही है और उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ये प्रदर्शन किसी एक गंभीर मुद्दे पर लगातार टिकने के बजाय पुराने मुद्दों को छोड़कर लगातार नए-नए मुद्दों को पकड़ने की फिराक में रहते हैं, जिससे इनकी नीयत साफ तौर पर संदिग्ध नजर आती है।
प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर भी इंद्रेश कुमार ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दल और राजनीतिक संगठन तिरंगे का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ और लोगों के बीच विभाजन पैदा करने के एक हथियार के रूप में करना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर घर तिरंगा अभियान देश के करोड़ों परिवारों तक पहले ही पहुंच चुका है और नागरिकों के दिलों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और भी अधिक बढ़ गया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जो दल देश भर में अपनी बड़ी-बड़ी घोषणाओं को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ रहे हैं और केंद्र में सरकार चला रहे दलों या उनके गठबंधन द्वारा पहले से किए जा रहे कामों को ही केवल दोहरा रहे हैं, वे अब नया क्या करने जा रहे हैं और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह सब जनता को भ्रमित करने के लिए केवल एक दिखावा मात्र है।
इंद्रेश कुमार ने विस्तार से बताते हुए कहा कि 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर चलाए गए हर घर तिरंगा अभियान ने देश के करोड़ों घरों में तिरंगे के प्रति गौरव और सम्मान की भावना को और अधिक प्रगाढ़ किया है। राष्ट्रीय ध्वज हमेशा से देशवासियों को आपस में जोड़ने का एक महान प्रतीक रहा है, लेकिन कुछ लोग अपने राजनीतिक फायदों के लिए इसका गलत इस्तेमाल कर समाज में दरार और विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ दावा किया कि ऐसी संकीर्ण और विभाजनकारी सोच रखने वाले लोगों को अपने इन प्रयासों में कभी भी कोई सफलता हासिल नहीं होगी क्योंकि भारत की जनता भली-भांति जागरूक है।
अल्बानिया और फ्रांस जैसे विदेशी देशों के हिंसक प्रदर्शनों से भारत की तुलना करने वाले विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए इंद्रेश कुमार ने भारत के गौरवशाली इतिहास और लोकतांत्रिक मूल्यों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अल्बानिया के हिंसक प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए संजय राउत जैसे नेताओं द्वारा भारत को जो सीख दी जा रही है, उसकी देश को कोई आवश्यकता नहीं है। भारत हमेशा से लोकतंत्र के पथ पर पूरी निष्ठा के साथ चलता आया है, आज भी उसी मार्ग का अनुसरण कर रहा है और भविष्य में भी इसी लोकतांत्रिक परंपरा पर चलता रहेगा। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत एक ऐसा महान देश है जो समाज के सभी धर्मों और समुदायों का समान रूप से आदर और सम्मान करता है और पूरी दुनिया आज इस सत्य को स्वीकार करती है।
भारत की वैचारिक और दार्शनिक जड़ों का जिक्र करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि दुनिया के दूसरे देश युद्ध और हिंसा का रास्ता चुन सकते हैं, लेकिन भारत हमेशा से भगवान गौतम बुद्ध, संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव और जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर स्वामी के महान और शांतिपूर्ण रास्तों पर चलने वाला देश रहा है और यह राष्ट्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों का हमेशा से पालन करने वाला देश रहा है। यही मुख्य कारण है कि भारत हमेशा से उच्च नैतिक मूल्यों पर आधारित एक मजबूत राष्ट्र रहा है और आज भी पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल बनकर खड़ा है।
देश की वैश्विक स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत को किसी भी अन्य देश से सबक या सीख लेने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसके विपरीत आज पूरी दुनिया भारत से सीख ले रही है। भारत दुनिया भर में युद्धों को रोकने, शांति स्थापित करने और अराजकता पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रभावी रूप से काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया भर से मिल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मानों का विशेष रूप से उल्लेख किया और बताया कि पिछले 10 से 11 वर्षों की अवधि में दुनिया के 38 से अधिक देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने-अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा है। उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर ये प्रतिष्ठित सम्मान आज के नए और सशक्त भारत को ही क्यों दिए गए हैं, किसी अन्य देश को क्यों नहीं दिए गए।
देश के युवाओं की भूमिका और उनकी दिशा पर चर्चा करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत के युवा अपनी अंतरात्मा से हमेशा सही रास्ते पर थे, आज भी पूरी तरह सही रास्ते पर हैं और आने वाले कल में भी सही मार्ग पर ही चलेंगे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि देश के कुछ युवाओं को कुछ असामाजिक और अराजक तत्वों ने पूरी तरह गुमराह कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी फंडिंग के भारी लालच और दबाव के कारण ही ये युवा मुख्यधारा से भटककर गलत रास्ते पर निकल पड़े हैं और उन्होंने ऐसे सभी युवाओं से एक गंभीर और भावुक अपील की कि वे इस गलत और भटकाव भरे रास्ते को तुरंत छोड़ दें और वापस सही दिशा व देशहित के मार्ग पर लौट आएं।
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP को देश के कई प्रमुख विपक्षी दलों का अच्छा-खासा और खुला समर्थन मिल रहा है। हाल ही में इस बात की भी चर्चा रही है कि CJP के नेता अभिजीत दिपके ने शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी और पार्टी को मिले समर्थन के लिए उनका सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया था। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इंद्रेश कुमार द्वारा उठाए गए ये सवाल और विदेशी फंडिंग के आरोप देश की राजनीति में एक बार फिर से गर्माहट पैदा कर चुके हैं।
