कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन द्वारा आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अब कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक बड़ा ऐलान करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी कांग्रेस की इस आगामी रैली का पूर्ण समर्थन करेगी। अभिजीत दिपके के इस समर्थन के ऐलान के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
राहुल गांधी के आरोप और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी बीते लंबे समय से लगातार वोट चोरी का गंभीर आरोप लगा रहे हैं और देश के चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोल रहे हैं। राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में अब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी विपक्ष के इस सुर में सुर मिलाते हुए विपक्ष की इस रैली को अपना समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिससे विपक्षी दलों का यह अभियान और अधिक व्यापक नजर आने लगा है।
अभिजीत दिपके का एक्स पर बयान और कारण
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात देश के सामने रखी है और उन्होंने अपने पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा आज के समय में बेहद जरूरी हो गया है। उनका यह मानना है कि SIR के जरिए ज्ञानेश कुमार ने देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए जो जरूरी भरोसा जनता और राजनीतिक दलों के मन में होना चाहिए था, उसे पूरी तरह से खो दिया है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता को दोबारा बहाल करने के लिए उनका पद से हटना अनिवार्य हो गया है।
मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा
अपने आधिकारिक बयान को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि चुनाव आयोग की यह मुख्य जिम्मेदारी बनती है कि वह देश के हर योग्य नागरिक के वोट देने के अधिकार की पूरी रक्षा करे, न कि इस अधिकार का इस्तेमाल करने में किसी भी प्रकार की रुकावटें पैदा करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी देश के उन सभी संगठनों और दलों का पुरजोर समर्थन करेगी, जो हमारे देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की कड़ी शर्तों के साथ रैली की इजाजत
एक तरफ जहां राजनीतिक समर्थन जुटाने की कवायद चल रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन ने इस आयोजन को लेकर अपनी कड़ी शर्तें तय कर दी हैं। दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली इस विपक्ष की रैली को इजाजत तो दे दी है, मगर इसके साथ कई बेहद सख़्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं। पुलिस द्वारा ऐसी कई शर्तें लगाई गई हैं जिनका पालन आयोजकों और समर्थकों को हर हाल में करना होगा। इनमें प्रमुख रूप से यह तय किया गया है कि रामलीला मैदान के बाहर किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा नहीं होने दी जाएगी।
रैली के लिए पुलिस द्वारा तय किए गए नियम
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी की गई अन्य शर्तों के अनुसार, यह रैली शाम पांच बजे तक हर हाल में खत्म करनी होगी। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि रात के समय में कोई भी व्यक्ति रामलीला मैदान में नहीं रुकेगा। सुरक्षा और निगरानी के पुख्ता इंतजाम के तहत पूरे मैदान में एचडी सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आयोजन स्थल पर पांच स्क्रीन का एक बड़ा कंट्रोल रूम भी बनाया जाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि मंच से किसी भी प्रकार की भड़काऊ बात नहीं कही जाएगी।
विपक्ष की रणनीति और मॉक पार्लियामेंट
रैली को सफल बनाने और अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए विपक्ष ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत देश भर के विपक्ष के सभी सांसदों को आगामी 30 अक्टूबर को दोपहर एक बजे से पहले हर हाल में दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। रणनीति के अगले चरण में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सरकारी आवास पर एक विशेष मॉक पार्लियामेंट यानी प्रतीकात्मक संसद लगाई जाएगी और इसी मॉक पार्लियामेंट के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पब्लिक इंपीचमेंट यानी जनता की अदालत में महाभियोग चलाया जाएगा, जो इस आंदोलन का एक अहम हिस्सा बनने जा रहा है।
