प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर एक बार फिर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए देश के लोगों से यह अंदाजा लगाने को कहा है कि हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद यानी एमएलसी चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने कुल कितनी सीटें जीती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पार्टी पर कसा गया यह तंज ऐसे समय में सामने आया है जब देश की राजनीति में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और बैलेट पेपर को लेकर बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने अपनी इस सोशल मीडिया पोस्ट के साथ एक स्माइली इमोजी भी लगाया है जो उनके इस व्यंग्यात्मक लहजे को और अधिक स्पष्ट करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह टिप्पणी चार बड़े राज्यों में कुल अट्ठाइस एमएलसी सीटों के लिए आए या आ रहे नतीजों के संदर्भ में आई है। प्रधानमंत्री के इस तंज को कांग्रेस पार्टी की उस निरंतर मांग के संदर्भ में भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें कांग्रेस पार्टी और उसके नेता लगातार यह वकालत कर रहे हैं कि देश में होने वाले सभी चुनावों में फिर से बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी लगातार एनडीए सरकार और देश के चुनाव आयोग से चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार कड़े सवाल पूछती रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों ने देश में वोट चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर कई बार देशव्यापी स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के आह्वान पर विपक्षी दलों का गठबंधन यानी इंडिया गठबंधन एक नवंबर सन दो हजार छब्बीस को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में वोट बचाओ देश बचाओ नाम से एक बहुत बड़ी मेगा रैली आयोजित करने जा रहा है। इस राजनीतिक माहौल के बीच विधान परिषद चुनावों के इन ताजा और शुरुआती नतीजों ने विपक्ष को एक बार फिर से रक्षात्मक यानी बैकफुट पर धकेल दिया है। चुनाव आयोग और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इन चुनावों के परिणामों पर टिकी हुई थीं क्योंकि इन चुनावों की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की अपनी दलीलें थीं।
अब तक के एमएलसी चुनावी नतीजों की अगर बात की जाए तो अट्ठाइस एमएलसी सीटों के लिए वोटों की गिनती चल रही है और इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीखा बयान सामने आया है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए कुल पंद्रह सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस पार्टी किसी भी सीट पर आगे नहीं चल पा रही है। इसके अलावा बिहार राज्य के संदर्भ में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है जहां चार मौजूदा एमएलसी अपने चुनाव हार चुके हैं। इन हारने वाले नेताओं में पांच बार के भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी नवल किशोर यादव का नाम भी शामिल है जो अपनी सीट बचाने में कामयाब नहीं हो पाए। इसके साथ ही प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शानदार जीत दर्ज करते हुए विधान परिषद में अपना खाता खोल लिया है और अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई है।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य की बात की जाए तो वहां समाजवादी पार्टी काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी का खाता शून्य पर ही अटका हुआ है और उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने कुल पांच सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि प्रतिष्ठित वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र समाजवादी पार्टी के पाले में चला गया है। वहीं दूसरी ओर कर्नाटक राज्य की बात करें तो वहां भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर यानी जेडीएस गठबंधन ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सभी चार सीटों पर कब्जा कर लिया है। इस परिणाम के चलते कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी को एक सीट गंवानी पड़ी है जो उसके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और इसके साथ ही महाराष्ट्र राज्य में पांच सीटों के लिए वोटों की गिनती का काम अभी भी लगातार जारी है और वहां के परिणामों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
इन तमाम चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद देश में बैलेट पेपर और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर एक बार फिर से बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। चुनाव परिणामों में कांग्रेस पार्टी की भारी हार का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने और प्रवक्ताओं ने यह कड़े सवाल उठाए हैं कि जब ये चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर से कराए गए थे, तब भी कांग्रेस पार्टी चुनाव जीतने में क्यों असफल रही और भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष हर बार हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ता है लेकिन बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी उनकी यही दुर्गति होती है। वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक बार फिर से बैलेट पेपर के जरिए ही चुनाव कराने की अपनी जरूरत और मांग पर जोर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि कांग्रेस पार्टी इन सभी चुनावी नतीजों की गहन समीक्षा करेगी और उसके आधार पर अपनी भविष्य की राजनीतिक रणनीति को तैयार करेगी। देश में चल रही इस बैलेट बनाम ईवीएम की बहस ने आने वाले दिनों के राजनीतिक समीकरणों को भी गरमा दिया है और विपक्ष की रणनीतियों पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।
