CJP का आंदोलन खत्म: सरकार ने मानी 5 पॉइंट चार्टर और लिखित गारंटी की शर्तें

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट पेपर लीक के खिलाफ अपना 37 दिनों से चल रहा आंदोलन वापस ले लिया है। केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बैठक में सरकार ने एफआईआर वापस लेने, मुआवजा देने और परीक्षा सुधारों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे अपने विरोध प्रदर्शन को आधिकारिक तौर पर वापस लेने का निर्णय लिया है। यह फैसला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ CJP प्रतिनिधिमंडल की लंबी बातचीत के बाद लिया गया है। सरकार और पार्टी के बीच मांगों पर सहमति बनने के बाद इस आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया गया। इस समझौते के तहत सरकार ने प्रदर्शनकारियों को लिखित गारंटी दी है कि उनकी शर्तों को तय समय सीमा के भीतर लागू किया जाएगा। यह आंदोलन पिछले 37 दिनों से देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ था।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस और समझौते का विवरण

एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी यह ऐलान करती है कि हम अच्छी नीयत के साथ इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय इस समझ के साथ लिया गया है कि सरकार द्वारा मानी गई शर्तों को निर्धारित समय के अंदर पूरा किया जाएगा। दास ने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे अब जंतर-मंतर से हट जाएं और शांतिपूर्वक अपने घरों को लौट जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति या किसी अन्य मुद्दे के बारे में समर्थकों को समय पर सूचित किया जाएगा, लेकिन वर्तमान में प्राथमिकता शांतिपूर्ण तरीके से धरना समाप्त करने की है।

CJP का 5 पॉइंट चार्टर और प्रमुख मांगें

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के सामने 5 पॉइंट एग्जाम रिफॉर्म चार्टर पेश किया था। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि सरकार इस चार्टर पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार हो गई है। समझौते के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, केंद्र सरकार और एनडीए शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। इसके अलावा, सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह उन हजारों छात्रों और कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है जो इस आंदोलन का हिस्सा थे।

मुआवजे और एफआईआर पर सरकार का रुख

आंदोलन की एक प्रमुख मांग उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की थी जिन्होंने नीट पेपर लीक कांड के बाद आत्महत्या कर ली थी। CJP ने प्रत्येक पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी। इस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार को इन परिवारों के प्रति पूरी हमदर्दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम और कानून के हिसाब से इन परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और नड्डा ने यह भी पुष्टि की कि सरकार प्रदर्शनकारियों को एफआईआर वापस लेने की प्रतियों की कॉपी साझा करेगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने दोहराया कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ बदले की भावना से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और आंदोलन का मोड़

इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। प्रधान ने जंतर-मंतर और देश भर के हालातों को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। CJP की यह पहली और प्रमुख मांग थी। प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा था कि जब तक बाकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने विशेष रूप से 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कार्रवाई और 1 करोड़ रुपये के मुआवजे पर जोर दिया था। हालांकि, सरकार के साथ तीन दौर की गहन चर्चा के बाद पार्टी ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई।

विदेशी फंडिंग और सोशल मीडिया के आरोपों पर सफाई

आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान के लगभग 400 सोशल मीडिया हैंडल छात्रों को भड़काने का काम कर रहे थे और विदेशी फंडिंग की भी आशंका जताई गई थी। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने कहा कि खुद विदेश मंत्रालय ने इस बात को स्वीकार किया है कि कोई विदेशी फंडिंग नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने अपना काम किया, लेकिन विदेशी प्रभाव के दावों में कोई सच्चाई नहीं पाई गई है।

परीक्षा सुधारों पर भविष्य की योजना

जेपी नड्डा ने बताया कि CJP प्रतिनिधिमंडल एक लिखित ड्राफ्ट लेकर आया था जिसमें आंदोलन से जुड़े चार मुख्य बिंदु थे। इसके साथ ही सरकार ने उनके 5 पॉइंट चार्टर पर भी चर्चा की। नड्डा ने आश्वासन दिया कि सरकार शिक्षा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए दिए गए सुझावों पर गहराई से विचार करेगी। सरकार और CJP के बीच हुई यह सहमति आने वाले समय में देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का संकेत दे सकती है।