दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर विरोध प्रदर्शन की गूंज सुनाई दे रही है। इस बार बड़ी संख्या में गैर-आरक्षित वर्गों के प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। अगड़ी जातियों से आने वाले इन प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए इक्विटी नियमों का कड़ा विरोध किया है। यह पूरा प्रदर्शन ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन’ के बैनर तले आयोजित किया गया है। इस विरोध-प्रदर्शन में राजस्थान की ‘जनरल सेना’ और ‘चाणक्य सेना’ के साथ-साथ ‘करणी सेना’ के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य जाति-आधारित आरक्षण प्रणाली में सुधार लाना और यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देना है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और धार्मिक नारों की गूंज
प्रदर्शन की अनुमति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के बीच यह विशाल आयोजन संपन्न हुआ। जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और इस दौरान कई धार्मिक नारे भी लगाए गए। भीड़ की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे। जंतर-मंतर के चारों ओर मजबूत बैरिकेड्स लगाए गए थे ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके। मौके पर दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और आईटीबीपी के जवानों की भी तैनाती की गई थी। सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज बुलंद की।
एससी/एसटी एक्ट और श्वेत पत्र की मांग
प्रदर्शन के दौरान एससी/एसटी एक्ट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कई प्रदर्शनकारियों ने इस कानून का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उनका तर्क है कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और सरकार को इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग यह भी की है कि वर्तमान में मिल रहे आरक्षण को लेकर एक विस्तृत ‘श्वेत पत्र’ जारी किया जाए। उनका मानना है कि आरक्षण के लाभों और इसके प्रभाव को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि देश के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कोटा के अंदर कोटा और क्रीमी लेयर पर सवाल
आरक्षण सुधार की मांग कर रहे लोगों ने ‘कोटा के अंदर कोटा’ के प्रावधान पर भी सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने यह संकेत दिया है कि वे इसमें ‘क्रीमी लेयर’ को लागू नहीं करेंगे। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर क्रीमी लेयर को लागू करने से क्यों बचा जा रहा है? प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार कुछ ऐसे दलित नेताओं के दबाव में झुक रही है जो केवल अपने विशिष्ट जाति समूह के हितों की बात करते हैं। उन्होंने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था में निष्पक्षता लाने के लिए क्रीमी लेयर के सिद्धांतों का पालन किया जाना अनिवार्य होना चाहिए।
फंडिंग के आरोपों पर स्पष्टीकरण और भीड़ का दावा
सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन को लेकर चल रही विभिन्न चर्चाओं के बीच ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल से एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया गया। पोस्ट में कहा गया कि इस आंदोलन को किसी भी राजनीतिक दल या विदेशी एजेंसी से कोई फंडिंग प्राप्त नहीं होती है और उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ को पैसे देकर बुलाया गया है। आयोजकों का दावा है कि हजारों की संख्या में लोग अपनी स्वेच्छा से यहां पहुंचे हैं ताकि सिस्टम में निष्पक्षता लाई जा सके और देश के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके और उनके अनुसार, इस भीड़ ने उस नैरेटिव को गलत साबित कर दिया है कि ऐसे मुद्दों पर लोग एकजुट नहीं होते हैं।
