जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच के लिए गठित हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) की संरचना में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। अदालत ने उन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कमेटी के सदस्यों या उसके स्वरूप को बदलने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि केवल धारणाओं या अनुमानों के आधार पर किसी उच्च स्तरीय समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न केवल जल्दबाजी है, बल्कि यह जांच की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा उत्पन्न कर सकता है।
जांच के मुख्य बिंदु और प्राथमिकताएं
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी को जांच को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कमेटी को सबसे पहले उन गंभीर आरोपों की जांच करनी चाहिए जो प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े हैं। इसके साथ ही, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने और उनके साथ की गई कथित बदसलूकी के मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि कमेटी उस हिंसा की गहराई से जांच करे जो प्रदर्शन के दौरान हुई थी और इसमें दोनों पक्षों की ओर से संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करना भी शामिल है। कोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हिंसा के लिए जिम्मेदार तत्वों की पहचान हो सके और कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने साफ किया कि HPEC का काम निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कोर्ट की मदद करना है और यह किसी एक पक्ष के हित के लिए नहीं है।
गवाहों की सुरक्षा और गोपनीयता के निर्देश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। कोर्ट ने HPEC से कहा है कि जो संवेदनशील या कमजोर गवाह अपनी बात रखने के लिए सामने आते हैं, उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान की जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी पहचान को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाए। गवाहों द्वारा दिए गए बयानों और सबूतों को भी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
अदालत ने साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया है। इस पोर्टल के माध्यम से गवाह और अन्य संबंधित व्यक्ति अपने दस्तावेज और डिजिटल सबूत सुरक्षित रूप से जमा कर सकेंगे। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ही जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों की जांच के लिए इस हाई पावर्ड कमेटी के गठन की घोषणा की थी।
एमिकस क्यूरी की नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था
न्यायालय की सहायता और कमेटी के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों को एमिकस क्यूरी (Amici Curiae) नियुक्त किया है। इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एओआर सी. सोलोमन शामिल हैं। ये दोनों विशेषज्ञ कोर्ट की सहायता करेंगे और HPEC के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए विभिन्न पक्षों के बीच एक स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।
इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने HPEC को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द एक मेंबर सेक्रेटरी (Member Secretary) की नियुक्ति करे। यह नियुक्ति कमेटी को प्रशासनिक कार्यों और अन्य जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने में मदद करेगी और कोर्ट ने कमेटी से अपनी पहली प्रगति रिपोर्ट जल्द से जल्द दाखिल करने की अपेक्षा की है।
14 साल की प्रदर्शनकारी को सुरक्षा का आदेश
सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका के माध्यम से 14 साल की एक प्रदर्शनकारी लड़की की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। कोर्ट को सूचित किया गया कि उक्त लड़की और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह लड़की और उसके परिवार के लिए खतरे की स्थिति का तत्काल आकलन करे और उन्हें आवश्यक सुरक्षा प्रदान करे।
पुलिस को उन लोगों के खिलाफ भी त्वरित जांच करने का आदेश दिया गया है जो कथित तौर पर धमकी देने और परेशान करने में शामिल हैं। दिल्ली पुलिस को इस पूरे मामले में की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में पेश करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
