एअर इंडिया की हब-एंड-स्पोक प्रणाली में हुई एक गंभीर इमिग्रेशन चूक के बाद गृह मंत्रालय पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस सुरक्षा चूक की गंभीरता को देखते हुए आज शाम 7 बजे एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा एअर इंडिया द्वारा नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा प्रोटोकॉल में हुई कमी पर विस्तृत चर्चा करना है। विशेष रूप से, इस बात पर गौर किया जाएगा कि कैसे डी कैटेगरी के बोर्डिंग पास धारक अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश करने में सफल रहे और निगरानी तंत्र उन्हें रोकने में विफल क्यों रहा।
बैठक का नेतृत्व और मुख्य बिंदु
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता खुद गृह सचिव गोविंद मोहन करेंगे। बैठक में ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त, एअर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। यह बैठक केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा 12 सितंबर को एअर इंडिया को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद आयोजित की जा रही है। बैठक के दौरान भविष्य के सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और इस चूक के लिए जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 3 इटालियन नागरिकों से जुड़ा है जो सुरक्षा और इमिग्रेशन के कड़े नियमों को धता बताकर विदेश निकल गए। ये तीनों यात्री 4 सितंबर को अमृतसर से दिल्ली आए थे। जानकारी के मुताबिक, तीनों यात्री रात करीब 12 बजकर 50 मिनट पर अमृतसर से एअर इंडिया की फ्लाइट AI-1115 से दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद, महज कुछ ही समय में यानी 1 बजकर 45 मिनट पर वे लुफ्थांसा की फ्लाइट में सवार होकर म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीनों यात्रियों की दिल्ली एयरपोर्ट पर कोई इमिग्रेशन जांच नहीं हुई।
हब-एंड-स्पोक सिस्टम की कार्यप्रणाली
हब-एंड-स्पोक सिस्टम एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत यात्रियों को पहले छोटे एयरपोर्ट (स्पोक) से एक बड़े हब एयरपोर्ट तक लाया जाता है। भारत में अमृतसर, बनारस और अहमदाबाद जैसे एयरपोर्ट पर यात्रियों को यह विशेष सुविधा दी गई है। इस सिस्टम के तहत, विदेश जाने वाले यात्रियों को स्पोक एयरपोर्ट (जैसे अमृतसर) पर ही अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है और फिर वे हब एयरपोर्ट (जैसे दिल्ली) से अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरते हैं और अमृतसर उन चुनिंदा एयरपोर्ट में शामिल है जहां यह मॉडल लागू है, लेकिन इसी सिस्टम की आड़ में सुरक्षा में बड़ी सेंध लग गई।
एअर इंडिया से कहां हुई चूक?
मंत्रालय द्वारा की गई शुरुआती जांच में एअर इंडिया की कई स्तरों पर चूक सामने आई है। तय नियमों के अनुसार, यात्रियों को केवल 'D' (घरेलू) और 'I' (अंतरराष्ट्रीय) कैटेगरी के बोर्डिंग पास जारी किए जाने चाहिए थे। अमृतसर में इन यात्रियों को एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट के लिए 'D' बोर्डिंग पास दिए गए थे, लेकिन साथ ही उन्हें आगे की लुफ्थांसा फ्लाइट के लिए भी बोर्डिंग पास जारी कर दिए गए, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। दिल्ली पहुंचने पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग-अलग रखा जाना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नियम यह है कि केवल 'I' कैटेगरी के बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को ही 'इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर डेस्क' तक पहुंचना चाहिए, लेकिन 'D' कैटेगरी के बोर्डिंग पास होने के बावजूद ये यात्री वहां तक पहुंच गए और विमान में सवार हो गए।
निगरानी तंत्र की विफलता
हब-एंड-स्पोक मॉडल वाले एयरपोर्ट पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे एक नोडल अफसर की तैनाती का नियम है। इस अफसर का काम यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी यात्री जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किए बिना अंतरराष्ट्रीय रवानगी वाले इलाके में न जा सके और इसके अलावा, चौबीसों घंटे निगरानी करने वाली एक विशेष टीम की भी आवश्यकता होती है। इस मामले में यह स्पष्ट हुआ है कि निगरानी का पूरा सिस्टम नाकाम रहा। न तो नोडल अधिकारी और न ही निगरानी टीम इन यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक पाई। आज की बैठक में इन सभी तकनीकी और मानवीय विफलताओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
