मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया। सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1300 अंकों तक लुढ़क गया, जिसके कारण निवेशकों की 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति स्वाहा हो गई। यह गिरावट इतनी अचानक और तेज थी कि बाजार के शुरुआती घंटों की पूरी बढ़त मिनटों में खत्म हो गई। पिछले साल तक जो शेयर बाजार देश की इकोनॉमी और तरक्की का प्रतिबिंब था, वह मौजूदा साल में रसातल की ओर जाता दिख रहा है। खास बात यह है कि सेंसेक्स अपने लाइफटाइम हाई से 12,000 से ज्यादा पॉइंट नीचे आ चुका है।
330 मिनट में 9 लाख करोड़ का नुकसान
बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि निवेशकों को महज 330 मिनट के भीतर 9 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेडिंग के दौरान हर मिनट निवेशकों ने औसतन 2727 करोड़ रुपये गंवाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, इंडिया विक्स में उछाल, डॉलर के मुकाबले रुपये का 96 के करीब पहुंचना और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली इस तबाही के मुख्य कारण रहे हैं।
बाजार के सूचकांकों का हाल
सुबह के शुरुआती 45 मिनट के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान में दिखाई दिए थे। सुबह 10 बजे के बाद बाजार में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। सेंसेक्स ने दिन का उच्चतम स्तर 75,369 दशमलव 63 अंकों पर छुआ था, जबकि निफ्टी 23,592 दशमलव 85 अंकों के पीक पर पहुंची थी। इसके बाद बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हुआ जो आम निवेशकों के लिए काफी खतरनाक रहा। दोपहर 2 बजकर 50 मिनट पर सेंसेक्स 1289 दशमलव 16 अंकों की गिरावट के साथ 74,080 दशमलव 47 अंकों पर आ गया। पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन के मुकाबले इसमें 701 दशमलव 29 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर सेंसेक्स 617 दशमलव 25 अंकों की गिरावट के साथ 74,168 दशमलव 30 अंकों पर कारोबार कर रहा था।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी भारी गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा। दिन के पीक से इसमें 417 दशमलव 85 अंकों का अंतर देखा गया और निफ्टी 23,175 अंकों तक गिर गई। पिछले हफ्ते के मुकाबले निफ्टी 223 दशमलव 1 अंकों की गिरावट के साथ दिखी। दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर निफ्टी 219 अंकों की गिरावट के साथ 23,176 दशमलव 75 अंकों पर कारोबार कर रही थी।
गिरावट के प्रमुख कारण
1. बॉन्ड यील्ड में तेजी
बेंचमार्क 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के अहम स्तर को पार कर गई है। बॉन्ड यील्ड में यह तेजी तब आई है जब ट्रेडर्स को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखेगा। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई के दबाव के फिर से बढ़ने का डर पैदा कर दिया है और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाता है, जिससे इक्विटी मार्केट में गिरावट आती है।
2. फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें
फेडरल रिजर्व बुधवार को अपनी बैठक के नतीजों की घोषणा करने वाला है। रॉयटर्स के सर्वे के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल बैंक इस हफ्ते अपनी ब्याज दरें बढ़ा सकता है और मार्च के अंत तक एक और बढ़ोतरी संभव है। यह तब हो रहा है जब कीमतें पहले से ही 2 प्रतिशत के सालाना लक्ष्य से ऊपर चल रही हैं। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, एनर्जी और खाने-पीने की चीजों को छोड़कर महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 0 दशमलव 3 प्रतिशत बढ़ गई है।
3. ईरान और अमेरिका के बीच टकराव
यमन में ईरान समर्थित हूथी बलों ने सऊदी अरब के मिलिट्री एयरबेस पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के एक कार्गो जहाज पर हमला हुआ है। ईरान ने पड़ोसी देशों के साथ शिपिंग मैनेजमेंट पर होने वाली बातचीत टाल दी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि उनके लोगों को डराया नहीं जा सकता और ईरान घुटने नहीं टेकेगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान डील के लिए लगातार फोन कर रहा है।
4. कच्चे तेल की कीमतें 108 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। वहीं WTI क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हमलों से सप्लाई रुकने का खतरा बढ़ गया है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, यह हमला गंभीर हो सकता है और मरम्मत में आठ हफ्ते तक का समय लग सकता है।
5. आईपीओ मार्केट की धूम
भारतीय प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी ने सेकेंडरी मार्केट से पैसा खींच लिया है। इस हफ्ते 11 आईपीओ खुलने वाले हैं जिनसे 24,574 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। एनएसई और हीरो मोटर्स के दो बड़े इश्यू ही 23,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ मार्केट में भारी मुनाफे के लालच में निवेशक सेकेंडरी मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं।
मार्केट कैप में भारी सेंध
इस गिरावट से बीएसई के मार्केट कैप में बड़ी कमी आई है। दिन की शुरुआत में बीएसई का मार्केट कैप 4,81,92,523 करोड़ 8 पैसे पर था, जो दिन के निचले स्तर पर 4,72,79,214 करोड़ 41 पैसे पर आ गया। इसका मतलब है कि एक ही दिन में निवेशकों को 9,13,308 करोड़ 67 पैसे का भारी नुकसान हुआ है।
