यूपीआई से पेमेंट करने वाले देश के करोड़ों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूपीआई के लिए एक संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क जारी किया है। इस नए बदलाव का असर रोजमर्रा की छोटी खरीदारी पर नहीं पड़ेगा, लेकिन कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर अब शुल्क देना होगा। यह नया फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा पी2एम यानी मर्चेंट पेमेंट पर लागू किया जाएगा। सबसे राहत की बात यह है कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई अभी भी बड़े पैमाने पर फ्री रहेगा और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी पी2पी ट्रांजैक्शन पर किसी भी राशि के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा नया एमडीआर फ्रेमवर्क
नया यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा मर्चेंट (पी2एम) ट्रांजैक्शन पर प्रभावी होगा। सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में आवश्यक बदलाव करके इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के लिए शुल्क से जुड़ा एक कानूनी आधार तैयार किया है। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत 14 सितंबर को 2000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर जीरो एमडीआर की अधिसूचना जारी की गई थी। यह नया ढांचा डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
2000 रुपये तक के यूपीआई पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं
नए नियमों का सबसे बड़ा लाभ छोटे पेमेंट करने वाले ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को मिलेगा और 2000 रुपये तक के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर शून्य रहेगा। एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के 95 प्रतिशत से ज्यादा पी2एम ट्रांजैक्शन इसी 2000 रुपये की सीमा के अंदर आते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि ज्यादातर छोटे यूपीआई पेमेंट पहले की तरह ही बिना किसी एमडीआर के जारी रहेंगे और आम आदमी की जेब पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
बड़े मर्चेंट पेमेंट पर 0 दशमलव 4 प्रतिशत एमडीआर
2000 रुपये से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए 0 दशमलव 4 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित किया गया है। हालांकि, बड़े पेमेंट के लिए सुरक्षा के तौर पर इसकी एक अधिकतम सीमा भी तय की गई है। यदि कोई ट्रांजैक्शन 75000 रुपये या उससे ज्यादा का होता है, तो उस पर एमडीआर अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक ही सीमित रहेगा। यह शुल्क पेमेंट सिस्टम से जुड़े विभिन्न भागीदारों जैसे बैंकों और ऐप प्रोवाइडर्स के बीच साझा किया जाएगा, जो इस डिजिटल भुगतान सेवा को संचालित करते हैं।
रेलवे, फ्यूल और जरूरी सेवाओं के लिए विशेष दर
कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों को इस फ्रेमवर्क में विशेष राहत दी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों में 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर फ्लैट 5 रुपये का एमडीआर लगेगा। ये सेक्टर यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन के कुल वॉल्यूम का लगभग 17 प्रतिशत और कुल वैल्यू का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं। इन क्षेत्रों में फ्लैट रेट रखने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक सेवाओं के लिए डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलता रहे।
म्यूचुअल फंड और शेयर पेमेंट पर कम शुल्क
कैपिटल मार्केट यानी पूंजी बाजार से जुड़े भुगतानों के लिए एमडीआर को काफी कम रखा गया है। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर को किए जाने वाले पेमेंट पर 0 दशमलव 02 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। इस श्रेणी के लिए भी अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये तय की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट के माध्यम से औपचारिक वित्तीय बाजार में आम लोगों की भागीदारी को और अधिक प्रोत्साहित करना है।
ग्राहकों से अलग से चार्ज वसूलने पर सख्त रोक
एनपीसीआई ने अपने दिशा-निर्देशों में यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यूपीआई ऐप प्रोवाइडर्स ग्राहकों से किसी भी प्रकार की प्लेटफॉर्म फीस या छिपी हुई फीस (हिडन चार्ज) नहीं ले सकेंगे। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट एमडीआर की लागत को सीधे ग्राहकों से न वसूलें। यानी यूपीआई का उपयोग करने वाले किसी भी ग्राहक से एमडीआर के नाम पर अलग से पैसा लेने की कोई व्यवस्था नहीं होगी, जिससे ग्राहकों का भरोसा डिजिटल भुगतान पर बना रहे।
एमडीआर की 5 प्रतिशत राशि से बनेगा नया फंड
इस नए सिस्टम के तहत एकत्रित होने वाले कुल एमडीआर का 5 प्रतिशत हिस्सा एक विशेष फंड में जमा किया जाएगा। इस फंड का उपयोग छोटे मर्चेंट्स के लिए डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों (टियर-3 बाजारों) में यूपीआई स्वीकार करने की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना है। इससे देश के दूर-दराज के इलाकों में भी डिजिटल भुगतान की पहुंच और अधिक सुदृढ़ होगी।
