ईरान की धरती पर एक बेहद साहसी और जोखिम भरे रेस्क्यू मिशन की कहानी सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। अप्रैल 2026 में एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट ईरान के ऊपर एक मिशन के दौरान मिसाइल का शिकार होकर क्रैश हो गया था। इस विमान में सवार दो अमेरिकी अधिकारियों को बचाने के लिए अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो अब करीब 4 महीने बाद सामने आया है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे एक घायल अमेरिकी पायलट ने दुश्मन के इलाके में 50 घंटे बिताए और मौत को मात दी।
विमान क्रैश और अल्फा का रेस्क्यू
मिशन के दौरान जब विमान को मिसाइल से निशाना बनाया गया, तो उसमें सवार दो क्रू मेंबर्स, जिन्हें 'अल्फा' और 'ब्रावो' के कॉल साइन से पहचाना गया है, ने विमान से बाहर निकलने (इजेक्ट) का फैसला किया और हालांकि, जमीन पर उतरते समय दोनों की लोकेशन अलग-अलग हो गई। अमेरिकी सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत की और इस शुरुआती मिशन में 21 एयरक्राफ्ट और 2 हेलिकॉप्टर शामिल किए गए थे। करीब 90 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों की मदद से अल्फा को महज 6 घंटे के भीतर सुरक्षित ढूंढ लिया गया। इस दौरान ईरानी सेना की ओर से अमेरिकी हेलिकॉप्टरों पर गोलीबारी भी की गई, लेकिन टीम अल्फा को सुरक्षित निकालने में सफल रही।
ब्रावो का 50 घंटे का संघर्ष और गंभीर चोटें
असली चुनौती 'ब्रावो' को बचाने की थी, जिसका कोई सुराग नहीं मिल रहा था और ब्रावो ने हाल ही में CBS न्यूज के '60 मिनट्स' प्रोग्राम को दिए एक इंटरव्यू में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि विमान से इजेक्ट होने के बाद उनका पैराशूट ठीक से नहीं खुला और वे सीधे जमीन पर गिरे। इस भीषण टक्कर के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी, हाथ और कंधे में फ्रैक्चर हो गया। इसके अलावा उनके सिर और चेहरे पर भी गंभीर चोटें आईं। ऐसी हालत में भी ब्रावो ने हार नहीं मानी और उन्होंने क्रैश साइट के पास रुकने के बजाय खुद को छिपाने के लिए पहाड़ी इलाके की ओर बढ़ना शुरू किया ताकि दुश्मन की पकड़ में न आ सकें।
7 हजार फीट की ऊंचाई पर जीवन की जंग
घायल हालत में ब्रावो करीब 7 हजार फीट ऊंची एक पहाड़ी रिज तक पहुंचने में कामयाब रहे। वहां से उन्होंने अपनी लोकेशन को गुप्त रखते हुए अमेरिकी सेना से संपर्क करने की कोशिश की और इस दौरान ईरानी सेना और अन्य हथियारबंद गुट उनकी सरगर्मी से तलाश कर रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कई बार खोजी टीमें ब्रावो के महज कुछ सौ मीटर के दायरे तक पहुंच गई थीं। कई घंटों के इंतजार और छिपने के बाद, ब्रावो ने अमेरिकी टीम को संदेश भेजा कि वह घायल हैं लेकिन आगे बढ़ रहे हैं। " इसके बाद CIA की मदद से उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाया गया।
46 साल बाद ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक
ब्रावो को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लिया और करीब 90 से ज्यादा स्पेशल ऑपरेटरों को ईरान के अंदर भेजा। यह ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि 1980 के बाद यह पहली बार था जब अमेरिकी सैनिकों के ईरान की जमीन पर उतरने की खबर आई। इससे पहले 46 साल पहले अमेरिका ने 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' चलाया था जो असफल रहा था, लेकिन 2026 का यह मिशन सफल रहा। अमेरिकी एजेंसियों ने ईरानी सेना को भ्रमित करने के लिए कई रणनीतियां अपनाईं और अमेरिकी विमानों ने इलाके में मौजूद ईरानी बलों पर कार्रवाई की ताकि रेस्क्यू टीम के लिए रास्ता साफ हो सके।
तकनीक की सुरक्षा और मिशन का अंत
करीब 50 घंटे तक दुश्मन के इलाके में घायल अवस्था में रहने के बाद ब्रावो को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि, रेस्क्यू के बाद भी चुनौतियां खत्म नहीं हुई थीं। रेस्क्यू मिशन में इस्तेमाल किए गए विमान ईरान में ही फंस गए थे। अमेरिकी सैनिकों को तो बाहर निकाल लिया गया, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी उन्नत सैन्य तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे, अमेरिकी सेना ने उन विमानों को वहीं नष्ट कर दिया और इस पूरे मिशन की सफलता के करीब चार महीने बाद अब इसका वीडियो और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की गई है, जो अमेरिकी वायुसेना के साहस और तकनीक के तालमेल को दर्शाती है।
