स्मार्टफोन और आईपैड की स्क्रीन पर घंटों स्क्रॉलिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया की बढ़ती सक्रियता ने देश में इंटरनेट खपत को एक नए और ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया है। अगर हम सर्किलवार डेटा उपयोग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इंटरनेट इस्तेमाल के मामले में बिहार पूरे देश में सबसे आगे निकल गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि रील देखने के मामले में बिहार अब देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है और एक दिलचस्प पहलू यह है कि दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार की टेली-डेंसिटी यानी आबादी के अनुपात में फोन कनेक्शन की संख्या देश में सबसे कम है। इसके बावजूद, रोजाना डेटा खपत के मामले में यह राज्य सबसे ऊपर बना हुआ है और इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार में जितने भी लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा पहुंची है, वे इसका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं और विशेष रूप से रील देखने में काफी समय बिता रहे हैं।
राज्यों के अनुसार डेटा खपत के आंकड़े
1 पेटाबाइट डेटा खर्च हो रहा है। अगर इसे सामान्य भाषा में समझें, तो यह लगभग 5 करोड़ 14 लाख जीबी के बराबर बैठता है। 7 पेटाबाइट के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है। 31 पेटाबाइट की दैनिक खपत के साथ तीसरे नंबर पर आता है। 3 पेटाबाइट डेटा की खपत दर्ज की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है और बिहार इस दौड़ में सबसे आगे है।
किन ऐप्स पर खर्च हो रहा है सबसे ज्यादा डेटा
देशभर के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की पहली पसंद अब भी यूट्यूब बना हुआ है। 3 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि इंटरनेट पर खर्च होने वाले कुल डेटा का करीब एक चौथाई हिस्सा सिर्फ यूट्यूब पर वीडियो देखने में चला जाता है। 7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है, जो मुख्य रूप से रील्स की लोकप्रियता के कारण है। 5 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। 5 प्रतिशत डेटा खपत के साथ इसके बाद आता है।
डेटा खर्च होने की तीन मुख्य वजहें
विशेषज्ञों ने डेटा खर्च होने की तीन बड़ी वजहें बताई हैं। पहली वजह वीडियो स्ट्रीमिंग है, जिसमें यूट्यूब और नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी ऐप्स पर वीडियो देखने से सबसे ज्यादा डेटा खर्च होता है और दूसरी वजह सोशल मीडिया है, जहां इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील्स व फोटो देखने में लगातार मेगाबाइट खर्च होते रहते हैं। तीसरी बड़ी वजह डाउनलोडिंग और ऑटो-अपडेट है। बड़ी फाइलें डाउनलोड करने या ऐप्स को ऑटो-अपडेट पर छोड़ने से डेटा बहुत तेजी से खत्म होता है। ये तीनों कारक मिलकर भारत में डेटा की भारी खपत को बढ़ावा दे रहे हैं।
भविष्य के अनुमान और 5G का प्रभाव
एरिक्सन की जून 2026 की मोबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर स्मार्टफोन उपयोगकर्ता औसतन 37 जीबी डेटा प्रति माह खर्च कर रहा है। अनुमान है कि अगले पांच साल में यह आंकड़ा बढ़कर 70 जीबी तक पहुंच जाएगा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि सस्ते 5G डिवाइस और बेहतर नेटवर्क कवरेज के कारण 2031 तक देश में 5G सब्सक्रिप्शन 1 अरब 10 करोड़ से ज्यादा हो सकता है, जो कुल सब्सक्रिप्शन का करीब 81 प्रतिशत होगा। 2025 के अंत तक 5G सब्सक्रिप्शन 43 करोड़ था, जो कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का 35 प्रतिशत था। वहीं, 4G सब्सक्राइबरों की संख्या 2025 के करीब 57 करोड़ से घटकर 2031 तक लगभग 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है, क्योंकि लोग तेजी से 5G की ओर बढ़ रहे हैं।
ट्राई के आंकड़े और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी
ट्राई के ताजा आंकड़ों में भी इसकी झलक मिलती है। 48 मिलियन तक पहुंच गई। 21 मिलियन हो गई है। 98 मिलियन उपयोगकर्ताओं ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के लिए आवेदन किया। यह दर्शाता है कि उपयोगकर्ता बेहतर नेटवर्क और डेटा सुविधा की तलाश में लगातार अपनी टेलीकॉम कंपनी बदल रहे हैं। ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि भारत में इंटरनेट अब केवल कनेक्टिविटी का जरिया नहीं है, बल्कि मनोरंजन और सोशल मीडिया इसे लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
