भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को नई दिल्ली स्थित अपने ऐतिहासिक राष्ट्रीय मुख्यालय 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड को खाली करने के लिए आधिकारिक नोटिस प्राप्त हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के अनुसार, इन दोनों परिसरों को खाली करने की अंतिम तिथि 28 मार्च निर्धारित की गई है। 24 अकबर रोड का कार्यालय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय से ही कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है और यह कई ऐतिहासिक निर्णयों का गवाह रहा है।
कानूनी विकल्प और प्रशासनिक रणनीति
पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस वर्तमान में उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी नेतृत्व सरकार से कुछ अतिरिक्त समय की मोहलत मांगने की योजना बना रहा है। इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर यह विकल्प भी तलाशा जा रहा है कि अशोक गहलोत या दिग्विजय सिंह जैसे किसी वरिष्ठ नेता को राज्यसभा के माध्यम से इस बंगले के आवंटन का पात्र बनाया जा सके। यदि कोई वरिष्ठ सांसद इन परिसरों के आवंटन का अधिकारी होता है, तो तकनीकी रूप से इसे बनाए रखने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
कांग्रेस मुख्यालय का ऐतिहासिक विकासक्रम
कांग्रेस के मुख्यालय का इतिहास भारतीय राजनीति के विभिन्न चरणों को दर्शाता है। स्वतंत्रता से पूर्व, इलाहाबाद स्थित मोतीलाल नेहरू का 'आनंद भवन' पार्टी का मुख्य केंद्र था। 1947 के बाद मुख्यालय दिल्ली स्थानांतरित हुआ। 1969 में पार्टी के विभाजन के बाद, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 7 जंतर मंतर से नियंत्रण खो दिया और विंडसर प्लेस में अस्थायी कार्यालय बनाया। इसके बाद 1971 में कार्यालय 5 राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थानांतरित हुआ और अंततः 1978 में 24 अकबर रोड कांग्रेस का स्थायी पता बना।
'इंदिरा भवन' के रूप में नया ठिकाना
जनवरी 2025 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली में नए मुख्यालय 'इंदिरा भवन' का औपचारिक उद्घाटन किया था। सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। अब पार्टी अपनी अधिकांश संगठनात्मक गतिविधियों को इसी नए परिसर से संचालित करने की तैयारी कर रही है। यह नया भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस है और इसे पार्टी की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
नए मुख्यालय का वैचारिक और संगठनात्मक महत्व
उद्घाटन के अवसर पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया था कि नया मुख्यालय लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का प्रतीक है। राहुल गांधी ने भी इस बात पर जोर दिया था कि यह भवन महात्मा गांधी, सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू के मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है। 140 साल पुराने इतिहास वाली इस पार्टी के लिए 24 अकबर रोड से विदाई एक भावनात्मक और रणनीतिक बदलाव का संकेत है, क्योंकि अब पार्टी एक नए और आधुनिक ढांचे के साथ अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाएगी।
