भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: एक्सपर्ट्स ने दी सावधानी बरतने की सलाह

आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। डॉक्टर संदीप नायर ने बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए टेस्टिंग और आइसोलेशन को जरूरी बताया है और सतर्क रहने की सलाह दी है।

आंध्र प्रदेश में कोरोना के नए पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद से आम जनता के बीच एक बार फिर डर और दहशत का माहौल बनने लगा है। देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस एक बार फिर अपने पैर पसार रहा है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में भी संक्रमण के नए मामले दर्ज किए गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को एक बार फिर से पूरी तरह अलर्ट कर दिया गया है ताकि स्थिति पर पैनी नजर रखी जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

विशेषज्ञ की राय: घबराएं नहीं, सतर्क रहें

बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। चेस्ट और रेसिप्रेटरी डिसीज के विशेषज्ञ डॉक्टर संदीप नायर ने बताया कि कोरोना वायरस समय-समय पर अपना रूप बदलता रहता है और इसके नए वैरिएंट सामने आते रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आप सावधानी बरतें तो सुरक्षित रह सकते हैं। कई मामलों में लक्षण काफी हल्के होते हैं और मरीज घर पर ही रहकर ठीक हो सकते हैं। हालांकि, बुजुर्गों, पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे लोगों, महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से अधिक सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि उनके लिए जोखिम अधिक हो सकता है।

टेस्टिंग और आइसोलेशन क्यों है अनिवार्य?

अक्सर देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति को हल्के लक्षण महसूस होते हैं, तो वे इसे सामान्य फ्लू समझकर कोविड टेस्ट नहीं कराते हैं। डॉक्टर नायर के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है कि वह घर पर रहकर ही इलाज कर लेगा, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है। लेकिन अगर लक्षण 2-3 दिन में ठीक नहीं होते हैं, तो टेस्ट कराना अनिवार्य हो जाता है। टेस्ट कराना इसलिए जरूरी है ताकि परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सके। उनके लिए यह वायरस नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो मरीज को तुरंत खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए ताकि संक्रमण की कड़ी को तोड़ा जा सके।

रैपिड टेस्ट और आरटी-पीसीआर में अंतर

आजकल लोग सुविधा के लिए बाजार में मिलने वाली किट के जरिए घर पर ही रैपिड टेस्ट कर लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रैपिड टेस्ट में कई बार गलत नतीजे यानी फॉल्स रिजल्ट आने की संभावना रहती है। इसलिए, यदि घर पर किया गया टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो लैब में जाकर उसकी पुष्टि कराना बेहतर होता है। डॉक्टर नायर ने बताया कि आरटी-पीसीआर टेस्ट को सबसे सटीक माना जाता है। रैपिड टेस्ट में केवल पॉजिटिव या नेगेटिव का पता चलता है, जबकि आरटी-पीसीआर के जरिए यह भी पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति किस स्तर तक संक्रमित है। इससे यह तय करने में मदद मिलती है कि मरीज को कितने दिन आइसोलेशन में रहना होगा और उसे पूरी तरह स्वस्थ होने में कितना समय लगेगा।