कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: वेस्ट एशिया तनाव से ब्रेंट $112 पार

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और 'एनर्जी वॉर' के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड $112 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि ईरान और कतर के ऊर्जा केंद्रों पर हमलों की खबरों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है।

पश्चिम एशिया में 'एनर्जी वॉर' की शुरुआत के संकेतों के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखी जा रही है। गुरुवार, 19 मार्च को शुरुआती एशियाई व्यापार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 4% की बढ़त के साथ $112 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, जो युद्ध के शुरुआती दौर में देखे गए $120 के उच्च स्तर के करीब पहुंच रहा है। 5% बढ़कर $99 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

ऊर्जा केंद्रों पर हमलों का सिलसिला

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड पर इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल शहर को निशाना बनाया है। इस हमले में एक मिसाइल ने लक्ष्य पर प्रहार किया, जबकि चार अन्य को इंटरसेप्ट किया गया और रास लफ़्फ़ान में दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी (LNG) उत्पादन साइट स्थित है, जो इस महीने की शुरुआत में हुए हमलों के बाद से ही परिचालन बंद किए हुए है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नेचुरल गैस की कीमतों में भी रातोंरात लगभग 5% की वृद्धि दर्ज की गई है।

साउथ पारस और क्षेत्रीय आपूर्ति पर प्रभाव

साउथ पारस गैस फील्ड न केवल ईरान के घरेलू बाजार के लिए बल्कि पड़ोसी देशों इराक और तुर्की को होने वाली आपूर्ति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। असलुयेह में स्थित तेल और पेट्रोकेमिकल संपत्तियों पर भी हमलों की खबरें आई हैं। हालांकि, अब तक ईरान की अधिकांश अपस्ट्रीम ऊर्जा संपत्तियां सुरक्षित बताई जा रही थीं। खार्ग द्वीप पर हुए पिछले धमाके भी मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों तक ही सीमित रहे थे, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अबू धाबी और बहरीन में परिचालन बाधित

क्षेत्रीय तनाव का असर अन्य खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। अबू धाबी ने घोषणा की है कि मिसाइलों को रोकने के बाद गिरे मलबे के कारण उसने अपनी हबशान गैस सुविधाओं में परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया है। वहीं, ईरान की अर्ध-आधिकारिक समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, बहरीन में स्थित एलएनजी संपत्तियों पर भी भारी मिसाइल हमले हुए हैं। तेहरान इन संपत्तियों को अमेरिकी हितों से जुड़ा मानता है। हालांकि, इन हमलों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिकी रुख

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साउथ पारस फील्ड पर इजरायली हमले की जानकारी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान की ऊर्जा साइटों पर और अधिक हमलों के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। वर्तमान में बाजार की नजरें ओपेक देशों और प्रमुख तेल उत्पादकों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी बड़े व्यवधान का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।