दिल्ली हाईकोर्ट ने दोस्तों के बीच झगड़े की FIR की रद्द, मणिपुर के अस्पताल में सेवा का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोस्तों के बीच हुए विवाद के बाद दर्ज FIR को आपसी समझौते के आधार पर रद्द कर दिया है। जस्टिस प्रतीक जालान ने आरोपियों को मणिपुर के एक अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने और बार एसोसिएशन को जुर्माना देने का निर्देश दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दोस्तों के बीच हुए एक विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते और उनके पुराने रिश्तों को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि, इस कानूनी राहत के साथ हाईकोर्ट ने एक अनोखी शर्त भी जोड़ी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को मणिपुर के एक अस्पताल में सामुदायिक सेवा करनी होगी। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे अदालतें आपसी सुलह के मामलों में सुधारात्मक न्याय को प्राथमिकता देती हैं।

मित्रता और समझौते पर अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि शिकायतकर्ता और दोनों आरोपी आज भी आपस में गहरे मित्र हैं। अदालत ने पाया कि उनके बीच वर्तमान में कोई भी शिकायत या विवाद शेष नहीं है। जस्टिस प्रतीक जालान ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में, जहां दोनों पक्ष फिर से दोस्त बन गए हैं, वहां दोषसिद्धि की संभावना बहुत कम हो जाती है। अदालत का मानना था कि जब विवाद का समाधान सौहार्दपूर्ण तरीके से हो चुका है, तो आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने से किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी।

मणिपुर के अस्पताल में सामुदायिक सेवा का निर्देश

जस्टिस प्रतीक जालान ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उनकी राय में FIR रद्द करने की राहत को सामुदायिक सेवा और उपयुक्त मुआवजे के भुगतान की शर्त के साथ जोड़ना उचित रहेगा। इसी के आधार पर, अदालत ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या 4 (दोनों आरोपी) को मणिपुर के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया। इन दोनों को अस्पताल में 2-2 घंटे के कुल 6 सेशन में अपनी सेवाएं देनी होंगी। यह कदम आरोपियों को समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराने के लिए उठाया गया है।

अस्पताल से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सेवा के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की है और दोनों दोस्तों को मणिपुर स्थित अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (Medical Superintendent) के पास रिपोर्ट करना होगा। मेडिकल सुपरिटेंडेंट ही उन्हें अस्पताल में किए जाने वाले उपयुक्त कार्यों की जिम्मेदारी सौंपेंगे। अदालत ने यह भी समय सीमा तय की है कि सामुदायिक सेवा शुरू होने की तारीख से इन 6 सेशन को अधिकतम 2 महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। सेवा पूरी होने के बाद, मेडिकल सुपरिटेंडेंट उन्हें एक अनुपालन प्रमाणपत्र (Compliance Certificate) जारी करेंगे, जिसे बाद में अदालत के रिकॉर्ड में जमा करना होगा।

जुर्माना और डाबड़ी पुलिस स्टेशन का मामला

सामुदायिक सेवा के अलावा, हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को एक और निर्देश दिया है और उन्हें दो हफ्ते के भीतर दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन को सामूहिक रूप से 10000 रुपये का भुगतान करना होगा। यह पूरा मामला डाबड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ा था, जिसे रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई थी और घटना पिछले साल मार्च की है, जब एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपने दोस्त के साथ किराए के एक फ्लैट में रह रहा था, तभी दोनों आरोपियों ने जबरन घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की थी।

बिना किसी दबाव के हुआ समझौता

अदालत को सूचित किया गया कि दोनों पक्षों ने बिना किसी बाहरी दबाव, डर या अनुचित प्रभाव के इस विवाद को सुलझा लिया है। दोनों ने एक औपचारिक सुलहनामा पर भी हस्ताक्षर किए हैं। घटना में घायल हुए व्यक्ति ने स्वयं हाईकोर्ट को बताया कि वह अब अपनी चोटों से पूरी तरह उबर चुका है और उसे इसका कोई स्थायी दुष्प्रभाव नहीं हुआ है। दोनों पक्षों ने अदालत के सामने पुष्टि की कि वे अब भी दोस्त हैं और एक-दूसरे के खिलाफ कोई शिकायत नहीं रखते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एक अन्य मामले में, जहां सांसद के सरकारी बंगले से कुर्सियां, कूलर और गद्दे चोरी हुए थे, कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया था।