डोनाल्ड ट्रंप की हत्या पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का क्या है नियम? जानें पूरी सच्चाई

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी हत्या की स्थिति में ईरान पर भीषण सैन्य हमले के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। हालांकि, अमेरिकी कानून के अनुसार कोई भी हमला स्वतः नहीं होगा और अंतिम निर्णय नए राष्ट्रपति के रूप में जेडी वेंस को लेना होगा।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां अब सीधे तौर पर हत्या और युद्ध की धमकियां दी जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक अत्यंत गंभीर बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि अगर ईरान उनकी हत्या करता है या हत्या करने की कोशिश भी करता है, तो अमेरिका ईरान पर ऐसा सैन्य हमला करेगा जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को इस संबंध में पहले से ही स्थायी और कड़े निर्देश दे दिए हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच कड़वाहट अपने चरम पर है और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

ट्रंप का दावा: 1000 मिसाइलें ईरान पर निशाना साधे हुए हैं

शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के माध्यम से डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य तैयारियों का विवरण साझा किया। उन्होंने लिखा कि ईरान उन्हें मारने या उनकी हत्या की कोशिश करने की लगातार धमकी दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका की 1000 मिसाइलें पहले से ही तैयार हैं और उनका निशाना ईरान की ओर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरानी सरकार अपनी धमकियों पर अमल करने की जरा भी कोशिश करती है, तो हजारों और मिसाइलें तुरंत दागी जा सकती हैं। ट्रंप का यह कड़ा रुख ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान देखे गए दृश्यों के बाद आया है, जहां कई लोगों ने ऐसे पोस्टर और बैनर उठाए थे जिनमें ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की मांग की गई थी।

मुज्तबा खामेनेई ने दी बदला लेने की चेतावनी

ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई। ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरानी जनता अपने पूर्व नेता और युद्धों में मारे गए सभी शहीदों के खून का बदला जरूर लेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम अपने शहीदों के खून का बदला लेने की कसम खाते हैं। " मुज्तबा खामेनेई के इस बयान ने क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं को और अधिक बल दे दिया है, जिससे वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्या ट्रंप की हत्या होने पर हमला अपने आप शुरू हो जाएगा?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति की हत्या की स्थिति में अमेरिकी सेना स्वतः ही हमला कर देगी? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब 'नहीं' है। अमेरिका में ऐसा कोई कानून या पहले से निर्धारित नियम नहीं है जिसके तहत राष्ट्रपति की मृत्यु होते ही सेना बिना किसी नए आदेश के किसी देश पर हमला शुरू कर दे। अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और 1947 के राष्ट्रपति उत्तराधिकार कानून के अनुसार, यदि राष्ट्रपति की हत्या होती है, तो उपराष्ट्रपति तुरंत राष्ट्रपति का पद संभाल लेते हैं। इस स्थिति में जेडी वेंस तुरंत अमेरिका के राष्ट्रपति और सेना के सर्वोच्च कमांडर बन जाएंगे। इसके बाद यह पूरी तरह से जेडी वेंस का निर्णय होगा कि वे ट्रंप द्वारा दिए गए पुराने निर्देशों का पालन करें, कोई नई रणनीति अपनाएं या किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई न करने का फैसला लें।

कंटीन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट और आपातकालीन योजनाएं

अमेरिकी सरकार के पास 'कंटीन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट' नाम की विशेष और गुप्त योजनाएं मौजूद हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य परमाणु हमले, बड़े आतंकवादी हमले या वॉशिंगटन में भारी तबाही जैसी आपातकालीन स्थितियों में भी सरकार के कामकाज को निरंतर जारी रखना है। हालांकि, इन योजनाओं में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो राष्ट्रपति की मौत के बाद स्वतः जवाबी हमले की अनुमति देता हो और इसका अर्थ यह है कि भले ही ट्रंप ने सेना को तैयारी करने के लिए कहा हो, लेकिन वास्तविक हमला तब तक नहीं हो सकता जब तक कि नया राष्ट्रपति उसका आदेश न दे। सत्ता का हस्तांतरण और नए कमांडर-इन-चीफ का निर्णय ही किसी भी सैन्य कार्रवाई का आधार होता है।

परमाणु हमले के निर्देश और 'रेवन रॉक' का संदर्भ

अमेरिकी सरकार की गुप्त आपातकालीन योजनाओं पर प्रसिद्ध किताब 'रेवन रॉक' लिखने वाले लेखक गैरेट एम ग्राफ ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। ग्राफ का कहना है कि अमेरिकी कानून के तहत यह संभव है कि एक राष्ट्रपति अपनी मृत्यु की स्थिति के लिए सेना को पहले से निर्देश छोड़ जाए। उदाहरण के तौर पर, ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को यह निर्देश दे सकते हैं कि यदि उनकी हत्या होती है, तो ईरान पर परमाणु हमला कर दिया जाए। हालांकि, ग्राफ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसे किसी भी निर्देश को मानना या न मानना पूरी तरह से उस समय के राष्ट्रपति यानी जेडी वेंस पर निर्भर करेगा और ट्रंप के निर्देश कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होंगे और अंतिम फैसला नए राष्ट्रपति का ही होगा। इस प्रकार, ट्रंप की धमकियां और निर्देश एक सैन्य तैयारी का हिस्सा तो हो सकते हैं, लेकिन युद्ध की शुरुआत का बटन अंततः नए नेतृत्व के हाथ में ही होगा।