ईरान के नवनियुक्त सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने अंतरराष्ट्रीय विरोधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए अपने पिता अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है। 9 जुलाई को पूर्व नेता के सुपुर्द-ए-खाक होने के बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले आधिकारिक संबोधन में मुज्तबा ने इस बात पर जोर दिया कि जिसे उन्होंने बेगुनाह खून करार दिया है, उसके लिए न्याय पाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदला लेना उनके व्यक्तिगत पद से ऊपर है और मुज्तबा ने कहा कि चाहे वह खुद इस पद पर रहें या न रहें, लेकिन बदला लेना देश के लिए अनिवार्य है।
दुश्मनों के खिलाफ प्रतिशोध की शपथ
अपने संबोधन के दौरान मुज्तबा खामेनेई ने विशेष रूप से अमेरिका और इज़राइल का जिक्र किया और उन्हें अपने पिता की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मन कभी शांति से नहीं रह पाएंगे। मुज्तबा ने कहा कि हम इस बेगुनाह खून का बदला लेकर रहेंगे और यह हमारे पूरे देश की इच्छा है। उन्होंने आगे कहा कि बदला लेना केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह बहुत जरूरी भी है। मुज्तबा खामेनेई ने चेतावनी दी कि जिन लोगों ने ईरान पर हमला किया है, वे अपने बिस्तर पर शांतिपूर्ण मौत की इच्छा ही रखते रह जाएंगे, क्योंकि हम उन्हें सीधे कब्र में पहुंचाएंगे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इसके लिए एक सूची तैयार की जा रही है।
अली खामेनेई की विरासत और जनाजे का सम्मान
नए सर्वोच्च नेता ने उन लाखों लोगों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया जो उनके पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। उन्होंने इस विशाल भीड़ को एक ऐतिहासिक घटना बताया जिसने दुश्मन की कमर तोड़ दी है। मुज्तबा के अनुसार, लोगों की यह भारी मौजूदगी दुश्मन का मनोबल तोड़ने वाली और उन्हें परास्त करने वाली थी। अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे का कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चला, जिसे बेहद भव्य तरीके से आयोजित किया गया था ताकि दुनिया को ईरान की आंतरिक एकजुटता का संदेश दिया जा सके। 9 जुलाई को उन्हें मशहद में दफनाया गया।
संघर्ष और हत्या का घटनाक्रम
अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या फरवरी में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के पहले ही दिन हो गई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच लगभग 4 महीने तक संघर्ष जारी रहा, जो फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर जून के पहले सप्ताह तक चला। जुलाई की शुरुआत में हुए अंतिम विदाई कार्यक्रम के दौरान ईरानी सेना ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और इस दौरान हवाई और सीमाई दोनों मोर्चों पर सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत कर दिया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
सीजफायर समझौते का टूटना और बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून 2026 को 60 दिनों के सीजफायर के लिए एक समझौता (MoU) हुआ था, जिससे शांति की उम्मीद जगी थी। हालांकि, यह समझौता लंबे समय तक नहीं टिक सका और 8 जुलाई तक आते-आते पूरी तरह से टूट गया। तनाव तब और बढ़ गया जब मंगलवार यानी 7 जुलाई को होर्मुज स्ट्रेट में ईरान ने 3 जहाजों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ठीक अगले दिन 8 जुलाई को अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए। वर्तमान में दोनों देशों के बीच हमले जारी हैं, जिससे खाड़ी देशों में तनाव का स्तर एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। मुज्तबा खामेनेई के कड़े रुख ने इस संघर्ष के और गहराने के संकेत दिए हैं।
