संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने आर्थिक और कूटनीतिक रुख को और अधिक सख्त करते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शुक्रवार को अमेरिकी प्रशासन ने ईरान से जुड़े 14 व्यक्तियों और विभिन्न संस्थाओं पर नए आर्थिक प्रतिबंधों की आधिकारिक घोषणा की। अमेरिकी सरकार का मानना है कि इन व्यक्तियों और कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल ईरान के शीर्ष नेतृत्व तक गुप्त रूप से धन पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नियमों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा था। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की वित्तीय शक्ति को कमजोर करना और उसे वैश्विक बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग करना है।
अली अंसारी और वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इन नए प्रतिबंधों का मुख्य निशाना अली अंसारी हैं। अंसारी दुबई में स्थित एक बड़े ईरानी बैंकर और व्यवसायी हैं। अमेरिका ने उन पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने सरकारी धन को विदेशों में रियल एस्टेट और अन्य बड़े व्यावसायिक क्षेत्रों में निवेश किया। इस निवेश के माध्यम से उन्होंने ईरान के प्रभावशाली नेताओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया है। अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए एक बेहद जटिल वित्तीय ढांचा तैयार किया था।
अरबों डॉलर के लेनदेन का खुलासा
अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि अली अंसारी और उनके सहयोगियों ने कई शेल कंपनियों और अलग-अलग देशों में मौजूद बैंक खातों का उपयोग करके अरबों डॉलर का लेनदेन किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की विदेशी संपत्ति नियंत्रण इकाई (OFAC) ने ईरान की तीन प्रमुख एक्सचेंज कंपनियों और कुछ विदेशी फ्रंट कंपनियों पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन कंपनियों पर यह आरोप है कि वे प्रतिबंधित ईरानी बैंकों की ओर से हर साल अरबों डॉलर का हेरफेर करती थीं। असली लेनदेन को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए ये कंपनियां कई नकली और मुखौटा कंपनियों का सहारा लेती थीं। इस नेटवर्क के जरिए ईरान को विदेशी मुद्रा हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में अपनी पैठ बनाए रखने में मदद मिलती थी।
समुद्री तनाव और सैन्य जवाबी कार्रवाई
ये नए प्रतिबंध एक ऐसे संवेदनशील समय पर लगाए गए हैं जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले सप्ताह ईरान ने कतर और सऊदी अरब के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया था। इस हमले के जवाब में अमेरिका ने ईरान के कुछ सामरिक ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की और इसके बाद ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। हालांकि शुक्रवार को स्थिति में कुछ स्थिरता देखी गई, लेकिन दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति और तनाव अब भी बरकरार है।
अमेरिकी और ईरानी नेतृत्व के कड़े बयान
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के शासक वर्ग की आर्थिक ताकत को पूरी तरह खत्म करने के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका के पास उपलब्ध सभी आर्थिक और कानूनी साधनों का उपयोग करके ईरान के शीर्ष नेताओं को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह काट दिया जाएगा और दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अनुरोध पर दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है। इस बीच, ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका किसी भी समझौते का उल्लंघन करता है, तो ईरान अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ इसका जवाब देगा और वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
