तेहरान की धरती पर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की विदाई के समय बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। राजकीय समारोह के दौरान ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अपने आंसू नहीं रोक पाए और कैमरे में उन्हें फूट-फूटकर रोते हुए देखा गया। यह क्षण ईरान में व्याप्त गहरे शोक और तनावपूर्ण माहौल के बीच पूर्व सर्वोच्च नेता के प्रति उनके सम्मान और दुख को दर्शाता है। तेहरान में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ दुनिया भर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
100 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने शुक्रवार को जानकारी दी कि इस विदाई समारोह में पड़ोसी देशों सहित दुनिया भर से उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि कम से कम 8 देशों के सरकार प्रमुख, जिनमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल हैं, इस समारोह का हिस्सा बन रहे हैं। इसके अलावा 12 देशों के संसद अध्यक्ष भी अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए तेहरान पहुंचे हैं। कुल मिलाकर लगभग 100 देशों के नागरिक समूहों और प्रमुख हस्तियों की भागीदारी इस कार्यक्रम में देखी जा रही है।
प्रवक्ता बघाई ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्वी यूरोपीय देशों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल और सांसद भी इस समारोह में शामिल हुए हैं। हालांकि, ईरान ने उन यूरोपीय देशों को आमंत्रित नहीं किया है जिन्होंने ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का आधिकारिक तौर पर समर्थन किया था और यह समारोह खामेनेई की मृत्यु के बाद से ईरान में हुए सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय जमावड़ों में से एक माना जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बगदाद में बंदी
अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों में हुई थी। उनकी विदाई को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। तेहरान के गवर्नर मोहम्मद सादेग मोतामदियन ने आश्वासन दिया है कि शहीद नेता की विदाई और रवानगी समारोह के दौरान सुरक्षा और हिफाजत का सबसे ऊंचा स्तर सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, बगदाद के गवर्नर अतवान अल-अतवानी ने घोषणा की है कि इस्लामिक क्रांति के नेता के अंतिम संस्कार जुलूस के लिए बगदाद पूरी तरह बंद रहेगा।
भारत और रूस की ओर से दी गई श्रद्धांजलि
भारत की ओर से इस दुखद घड़ी में विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने प्रतिनिधित्व किया। वे शुक्रवार को आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुए। भारत में ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की कि कई भारतीय हस्तियों ने भी अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी है। इनमें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के नाम प्रमुखता से लिए गए हैं।
रूस की ओर से सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव 3 जुलाई को तेहरान पहुंचे। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, मेदवेदेव ने तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित गंभीर समारोह में हिस्सा लिया और दिवंगत सर्वोच्च नेता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा
तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित इस समारोह में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ, न्यायपालिका प्रमुख ग़ोलम-हुसैन मोहसेनी एजेई और एक्सपेडिएंसी काउंसिल के अध्यक्ष अयातुल्ला सादेक़ अमोलि लारीजानी उपस्थित थे। विदेशी मेहमानों में तुर्कमेनिस्तान की पीपल्स काउंसिल के अध्यक्ष गुरबांगुली बर्दिमुहामेदोव, इराकी राष्ट्रपति निजार अमेदी, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर शामिल थे। कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवन बरजानी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इसके अलावा इराक, अजरबैजान, बांग्लादेश, उज्बेकिस्तान, बेलारूस और किर्गिस्तान के संसद अध्यक्षों ने भी शिरकत की। निकारागुआ, कांगो और बुर्किना फासो के विदेश मंत्री, मिस्र की सीनेट के अध्यक्ष और ओमान के संसद अध्यक्ष भी इस ऐतिहासिक विदाई का हिस्सा बने और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शंघाई सहयोग परिषद के महासचिव नुरलान येरमेकबायेव, डी-8 आर्थिक सहयोग संगठन के महासचिव और इस्लामिक सहयोग संगठन के उप महासचिव भी मौजूद रहे। तुर्की के उपराष्ट्रपति सेवडेट यिलमाज़ और सऊदी उप विदेश मंत्री वलीद अल-खिरेजी ने भी समारोह में भाग लिया।
अंतिम संस्कार का कार्यक्रम और दफनाने की तिथि
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि कई दिनों तक चलने वाले इस शोक कार्यक्रम में डेढ़ से दो करोड़ लोग (150 लाख से 200 लाख लोग) शामिल होंगे। शनिवार को सुबह 6 बजे स्थानीय समय के अनुसार मोसाल्ला के द्वार आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे ताकि वे अपने नेता के अंतिम दर्शन कर सकें। सोमवार को तेहरान में एक विशाल अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को कोम ले जाया जाएगा और फिर बगदाद, कर्बला और नजफ़ में अन्य धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी। अंततः 9 जुलाई को मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
