खामेनेई का जनाजा: भारत से कौन-कौन पहुंचा ईरान और किन देशों के नेता हुए शामिल?

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की प्रक्रिया तेहरान में शुरू हो गई है। भारत की ओर से राज्यपाल सैया अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा सहित कई नेता शामिल हुए हैं। दुनिया भर के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इस दुखद घड़ी में ईरान पहुंचे हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने की औपचारिक प्रक्रिया शुक्रवार सुबह से शुरू हो गई है। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में सुबह के वक्त खामेनेई का पार्थिव शरीर लाया गया, जहां दुनिया भर से आए नेता और प्रतिनिधि उनकी अंतिम यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के दावों के अनुसार, 100 से ज्यादा देशों के मेहमान इस समय तेहरान पहुंच रहे हैं। भारत सरकार के प्रतिनिधि भी इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान पहुंचे हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल और राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति

ईरान की सरकार की ओर से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा गया था। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस यात्रा पर नहीं गए हैं और भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर बिहार के राज्यपाल सैया अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा को भेजा गया है। सरकार के अलावा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को भी निमंत्रण दिया गया था, लेकिन उनके जाने के संबंध में फिलहाल कोई पुख्ता खबर नहीं है।

भारत के अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी ईरान की तरफ से न्योता मिला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। कांग्रेस की ओर से पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान पहुंचे हैं। सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस पार्टी और अध्यक्ष खरगे के प्रतिनिधि के रूप में वहां गए हैं और इसके अलावा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को भी न्योता मिला था। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी खामेनेई के फ्यूनरल कार्यक्रम में शामिल होने ईरान गई हैं। सोशल मीडिया पर सलमान खुर्शीद और महबूबा मुफ्ती की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें वे खामेनेई के ताबूत के सामने खड़े नजर आ रहे हैं।

कश्मीर के एक अन्य नेता, जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरिया शिया के अध्यक्ष आगा सैयद हसन मोसावी अल सफवी को भी न्योता मिला था, लेकिन उन्हें ईरान जाने से रोक दिया गया। अंजुमन के प्रवक्ता के अनुसार, आगा सैयद हसन को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन विभाग ने रोक लिया और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी को भी आमंत्रित किया गया है, जो शिया समुदाय के एक प्रमुख भारतीय नेता हैं, हालांकि उनके जाने पर अभी पूर्ण स्पष्टता नहीं है। इसके अलावा, भारत से विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंचा है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मगुरु एक साथ प्रार्थना करते देखे गए।

अंतरराष्ट्रीय नेताओं का जमावड़ा

ईरान इस जनाजे के माध्यम से अपनी वैश्विक पहुंच और संबंधों का प्रदर्शन कर रहा है। रूस, चीन, पाकिस्तान, जॉर्जिया और क्यूबा के प्रतिनिधि तेहरान पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी वहां मौजूद हैं। इनके अलावा आर्मेनिया के प्रधानमंत्री, इराक के राष्ट्रपति निजार अमिदि, उज्बेकिस्तान की संसद के स्पीकर नूरुद्दीन, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति और इराकी कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति भी पहुंचे हैं। कतर शूरा काउंसिल के स्पीकर और जॉर्जिया के राष्ट्रपति ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। लेबनान के नेता नसरल्लाह का परिवार और सीरिया, लेबनान, इराक, मोरक्को और तुर्किए के रेजिस्टेंट फ्रंट के नेता भी इस विदाई में शामिल हुए हैं।

अंतिम संस्कार का कार्यक्रम और मौत का कारण

खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कई दिनों तक चलेगी और 2 जुलाई की रात उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान ले जाया गया था। 3 जुलाई को विदेशी मेहमानों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। 4 और 5 जुलाई को आम जनता के लिए दर्शन की व्यवस्था की गई है। 6 जुलाई को तेहरान में एक बड़ा जुलूस निकाला जाएगा और 7 जुलाई को शिया इस्लामिक शिक्षा के केंद्र कोम में जनाजा निकाला जाएगा। 8 जुलाई को शव को इराक के कर्बला और नजफ ले जाया जाएगा। अंततः 9 जुलाई को ईरान के मशहद में, जो खामेनेई का जन्मस्थान है, उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी 2026 को हुई थी। अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए एक संयुक्त हमले में उनकी जान गई थी। इस हमले में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, बहू और 3 साल की पोती की भी मौत हो गई थी। युद्ध की स्थिति के कारण उनके शव को अब तक सुरक्षित रखा गया था। हालांकि अब दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ है, लेकिन तनाव अब भी बरकरार है और ईरान की सेना ने उनकी मौत का बदला लेने की बात फिर से दोहराई है।