ट्रंप का बड़ा फैसला: साउथ कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास में कटौती का आदेश, ईरान बना वजह

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुद्दे पर समर्थन न मिलने के कारण साउथ कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास में कटौती का आदेश दिया है। ट्रंप ने इन अभ्यासों को महंगा और उत्तर कोरिया के प्रति शत्रुतापूर्ण बताया है, जबकि किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों को बेहतर बताया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने चौंकाने वाले फैसलों से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने पेंटागन को एक कड़ा आदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने साउथ कोरिया के साथ नियोजित संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भारी कटौती करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रपति का यह फैसला साउथ कोरिया द्वारा ईरान के मुद्दे पर अमेरिका का साथ न देने के बाद आया है। ट्रंप के इस कदम को उनके प्रशासन की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां वे अपने सहयोगियों से पूर्ण समर्थन की अपेक्षा रखते हैं।

ईरान का मुद्दा और सियोल का इनकार

इस पूरे विवाद की जड़ में ईरान का मुद्दा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने हाल ही में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से संपर्क किया था और उनसे ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के अमेरिकी प्रयासों में सहयोग मांगा था। हालांकि, ट्रंप के अनुसार, सियोल ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। "। ईरान के मसले पर इस असहयोग से नाराज होकर ट्रंप ने साउथ कोरिया को मिलने वाले सैन्य सहयोग के एक हिस्से यानी संयुक्त अभ्यास में कटौती करने का मन बना लिया।

उत्तर कोरिया के प्रति नरम रुख और खर्च की चिंता

ट्रंप ने अपने फैसले के पीछे केवल ईरान को ही वजह नहीं बताया, बल्कि उन्होंने उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों और इन अभ्यासों पर होने वाले भारी खर्च का भी जिक्र किया। एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ट्रंप ने कहा कि इस हफ्ते शुरू होने वाले ये सैन्य अभ्यास न केवल बहुत महंगे हैं, बल्कि ये उत्तर कोरिया के लिए एक गलत और दुश्मनी भरा संकेत भेजते हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया ने कभी अमेरिका को धमकी नहीं दी और दोनों देशों के बीच हमेशा एक सम्मानजनक व्यवहार रहा। वे किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों को इन सैन्य अभ्यासों से अधिक महत्व दे रहे हैं।

पीट हेगसेथ को सख्त निर्देश

साउथ कोरिया के रुख से असंतुष्ट होकर राष्ट्रपति ट्रंप ने सेक्रेटरी ऑफ वॉर, पीट हेगसेथ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। ट्रंप ने लिखा कि चूंकि इन अभ्यासों को पूरी तरह से रद्द करने में अब बहुत देर हो चुकी है, इसलिए उन्होंने हेगसेथ को निर्देश दिया है कि जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज को काफी हद तक कम कर दिया जाए। ट्रंप का यह निर्देश दर्शाता है कि वे उन देशों के प्रति सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार हैं जो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अमेरिका के साथ खड़े नहीं होते हैं। यह कदम नाटो सहयोगियों की उनकी पिछली आलोचनाओं की याद दिलाता है, जिन्हें उन्होंने ईरान के खिलाफ पर्याप्त समर्थन न देने पर आड़े हाथों लिया था।

सैन्य अभ्यास का मूल उद्देश्य और पैमाना

मूल योजना के अनुसार, यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 11 दिनों तक चलने वाला था। इसमें लगभग 18000 साउथ कोरियन सैनिकों के शामिल होने की तैयारी थी। इस बड़े पैमाने के अभ्यास का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया से होने वाले किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ दोनों देशों की सैन्य तैयारी को परखना और उनकी संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करना था और गौरतलब है कि इस अभ्यास की योजना तब बनाई गई थी जब उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए फिर से बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण शुरू कर दिए थे। अब ट्रंप के आदेश के बाद इस अभ्यास के स्वरूप में बड़ा बदलाव आएगा।

विपक्ष की आलोचना और क्षेत्रीय तनाव

ट्रंप के इस फैसले की अमेरिका के भीतर भी आलोचना शुरू हो गई है। डेमोक्रेटिक सेनेटर मार्क केली ने राष्ट्रपति के इस कदम को गलत बताया है। केली ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इन संयुक्त अभ्यासों को नजरअंदाज करना या उनमें कटौती करना एक छोटी सोच को दर्शाता है और यह सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है और इसके अलावा, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और उनका देश इस नियंत्रण को भविष्य में भी बनाए रखने का इरादा रखता है।