5वीं पास किरण कुमार ने मां की 4 चूड़ियों से खड़ा किया 11250 करोड़ का साम्राज्य

नेल्लोर के एक साधारण परिवार से निकलकर 11250 करोड़ रुपये की कंपनी बनाने वाले किरण कुमार की कहानी। अब ललिता ज्वेलरी अपना 1700 करोड़ का आईपीओ ला रही है।

व्यापार की दुनिया में अक्सर उन्हीं लोगों का बोलबाला माना जाता है जो बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर आते हैं या जिनके पास पुश्तैनी पैसा होता है। लेकिन जब कोई इंसान अपनी मेहनत और लगन से हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दे, तो वह कहानी हर किसी के लिए एक मिसाल बन जाती है। यह कहानी ललिता ज्वेलरी के मालिक किरण कुमार की है और एक ऐसा बच्चा जिसे बचपन में ही स्कूल छोड़ना पड़ा और जिसके पास किसी शादी में जाने के लिए ढंग के कपड़े तक नहीं होते थे, आज वह 11250 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन वाली कंपनी का मालिक है। उनकी कंपनी ललिता ज्वेलरी मार्ट अब शेयर बाजार में अपना आईपीओ लेकर आ रही है, जो उनकी सफलता के सफर में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

गरीबी का वह दौर और बचपन का संघर्ष

किरण कुमार का जन्म आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में एक बड़े और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ था। वह अपने माता-पिता की आठवीं संतान थे। उनके पिता सर्राफा बाजार में कई ज्वेलर्स के यहां एकाउंटेंट का काम करते थे, लेकिन उससे होने वाली कमाई से इतने बड़े परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल था। गरीबी का साया उनके जीवन पर इस कदर हावी था कि किरण को किसी करीबी की शादी में जाने के लिए अपने दोस्त की टी-शर्ट तक उधार लेनी पड़ी थी। घर की माली हालत खराब होने के कारण उन्हें पांचवीं कक्षा के बाद ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। महज 12 साल की छोटी सी उम्र में किरण ने नेल्लोर के आभूषण बाजार में काम करना शुरू कर दिया ताकि परिवार की कुछ मदद हो सके।

मां की चार चूड़ियों ने रखी बिजनेस की नींव

बाजार में काम करते हुए किरण ने एक बहुत अहम बात नोटिस की। उन्होंने देखा कि नेल्लोर में जो गहने बनाए जा रहे हैं, वे चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के बाजारों में सप्लाई किए जाते हैं। उनके मन में विचार आया कि अगर वह खुद अपना माल सीधे चेन्नई जाकर बेचें, तो उन्हें ज्यादा मुनाफा हो सकता है। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि बिजनेस शुरू करने के लिए उनके पास एक भी रुपया नहीं था। ऐसे मुश्किल वक्त में उनकी मां उनके साथ खड़ी हुईं। उनकी मां के पास अपना जो थोड़ा बहुत सोना था, उसमें से उन्होंने चार चूड़ियां किरण को दे दीं। इन चूड़ियों का वजन लगभग 48 ग्राम था। किरण ने इन चूड़ियों को एक सुनार के पास ले जाकर उनसे छह बालियां बनवाईं और खरीदार की तलाश में सीधे चेन्नई का रुख किया।

चेन्नई का सफर और थोक व्यापार का विस्तार

चेन्नई के टी नगर में उनकी मुलाकात ललिता ज्वेलरी के तत्कालीन मालिक एम एस कंदासामी पिल्लई से हुई और जब किरण वहां पहुंचे, तब रात हो चुकी थी और दुकान बंद होने वाली थी। पिल्लई ने किरण के लाए गहनों की क्वालिटी जांची और उन्हें शुरुआत में 100 ग्राम का पहला ऑर्डर दे दिया। काम अच्छा था, इसलिए जल्द ही यह ऑर्डर बढ़कर 200 ग्राम हो गया। इसके बाद किरण सरकारी बसों में धक्के खाते हुए नेल्लोर से चेन्नई के बीच व्यापार करने लगे। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उनका थोक कारोबार इतना बड़ा हो गया कि वे कनाडा, लंदन, सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपने गहने भेजने लगे।

एक फैसला जिसने बदल दी पूरी जिंदगी

किरण के जीवन और बिजनेस का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 24 फरवरी 1999 को आया। यह वह समय था जब ललिता ज्वेलरी के मालिक कंदासामी पिल्लई भारी कर्ज में डूब चुके थे और आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। किरण के पिल्लई के साथ अच्छे व्यापारिक संबंध थे। ऐसे में पुरानी और स्थापित दुकान को बंद होने से बचाने के लिए किरण ने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने उस बिजनेस को टेकओवर कर लिया और उसकी सारी पुरानी देनदारियां भी चुका दीं। इसके बाद उन्होंने कंपनी के नाम में एक और ए जोड़कर ललिता ज्वेलरी (Lalithaa Jewellery) नाम से ब्रांड की शुरुआत की।

पारदर्शिता से जीता ग्राहकों का भरोसा

दुकान खरीदने के बाद किरण को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ा। अब तक उनका सारा अनुभव थोक बाजार का था, लेकिन अब उन्हें सीधे खुदरा बाजार में ग्राहकों से डील करना था। किरण ने बाजार की नस को पकड़ा। उन्होंने महसूस किया कि गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज और वेस्टेज के नाम पर ग्राहकों को बहुत लूटा जाता है। उन्होंने पारदर्शी कीमत और बीआईएस-हॉलमार्क वाले सोने पर अपना पूरा फोकस रखा। उनकी रणनीति बिल्कुल साफ थी- एक ग्राहक से ज्यादा मुनाफा कमाने के बजाय, कम मार्जिन रखकर ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को जोड़ना। उन्होंने विज्ञापनों में ग्राहकों से खुलेआम कहा कि वे गहनों की फोटो खींचें, दूसरे शोरूम से कीमत का अंदाजा लें और अगर ललिता ज्वेलरी का दाम सबसे कम लगे, तभी यहां से खरीदारी करें।

5 राज्यों में फैला साम्राज्य और वित्तीय आंकड़े

किरण कुमार की वह रणनीति आज एक विशाल बिजनेस बन चुकी है। वर्तमान में ललिता ज्वेलरी दक्षिण भारत के पांच राज्यों में 51 शहरों के अंदर 61 शोरूम का संचालन कर रही है। इनमें से आंध्र प्रदेश में 23, तमिलनाडु में 20, तेलंगाना में 10, कर्नाटक में 7 और पुडुचेरी में 1 स्टोर मौजूद है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का रेवेन्यू 16800 करोड़ 62 लाख रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025 में 16907 करोड़ 88 लाख रुपये रहा। वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह तेजी से उछलकर 25039 करोड़ 80 लाख रुपये पहुंच गया। कंपनी का मुनाफा भी वित्त वर्ष 2024 के 359 करोड़ 83 लाख रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 1009 करोड़ 82 लाख रुपये तक पहुंच गया है। कंपनी की कुल संपत्ति भी 5182 करोड़ 26 लाख रुपये से बढ़कर अब 10945 करोड़ 14 लाख रुपये हो गई है।

आईपीओ की तैयारी और भविष्य के लक्ष्य

कंपनी अब 1700 करोड़ रुपये का आईपीओ ला रही है। इस आईपीओ का प्राइस बैंड 190 से 201 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इसमें 1200 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 500 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल होगा। कंपनी आईपीओ से मिलने वाली नई कैपिटल में से 1033 करोड़ 20 लाख रुपये का इस्तेमाल दक्षिण भारत में 10 नए स्टोर खोलने के लिए करेगी। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ललिता ज्वेलरी वित्त वर्ष 2022 से 2024 के बीच ऑपरेटिंग रेवेन्यू ग्रोथ के मामले में दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली क्षेत्रीय ज्वेलरी कंपनी रही है।