UGC-NET की 3 परीक्षाएं रद्द होने पर राहुल गांधी का हमला, केंद्र को घेरा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट की तीन परीक्षाओं के रद्द होने पर केंद्र सरकार और एनटीए पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को 'एक्सट्रैक्शन मशीन' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और एनटीए की जवाबदेही तय करने की मांग की।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट के कुछ विषयों की परीक्षा फिर से कराए जाने के फैसले को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है और राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में एक ऐसी व्यवस्था बना दी है जो एक परीक्षा तक सही ढंग से आयोजित नहीं कर सकती। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने दो महीने के लंबे अंतराल के बाद पेपर रद्द करने का फैसला लिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश में शिक्षा व्यवस्था अब सुरक्षित नहीं बची है।

यूजीसी-नेट की 3 परीक्षाओं के रद्द होने का विवरण

एनटीए को यूजीसी-नेट के 3 महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा है। ये विषय सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स हैं। इन विषयों के लिए परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। लगभग दो महीने बीत जाने के बाद, एनटीए ने इन तीनों परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। रद्दीकरण का मुख्य कारण यह बताया गया कि एजेंसी ने गलत पेपर सेट किए थे और पुराने सवालों को दोहराया था और इसके अलावा, पेपर में तथ्यात्मक गलतियां, टाइपिंग की त्रुटियां, अनुवाद की समस्याएं और व्याकरण से जुड़ी गड़बड़ियां पाई गई थीं। एनटीए ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि पेपर में स्पेलिंग और प्रिंटिंग की गंभीर गलतियां थीं, जिसके कारण परीक्षा को दोबारा कराना आवश्यक हो गया है।

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को बताया 'एक्सट्रैक्शन मशीन'

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में छात्रों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों उम्मीदवार जिन्होंने सालों तक कड़ी मेहनत की, फॉर्म भरे, फीस जमा की और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की, उन्हें अब सितंबर में यह सब फिर से करना होगा और उन्होंने कहा कि गलती एनटीए करती है, लेकिन उसकी सजा निर्दोष छात्रों को भुगतनी पड़ती है। राहुल गांधी ने कोटा, देहरादून और प्रयागराज के अपने दौरों का हवाला देते हुए कहा कि यह अब कोई शिक्षा व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह एक 'एक्सट्रैक्शन मशीन' यानी निचोड़ने वाली मशीन बन गई है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था छात्रों के पैसे, उनके कीमती साल, उनकी मानसिक सेहत और उनके आत्मविश्वास को छीन लेती है और बदले में उन्हें नौकरी तक नहीं मिलती।

जवाबदेही और इस्तीफे की मांग

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार और एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या परीक्षा से पहले ये पेपर लीक हुए थे? उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के अन्य विभागों की तरह एनटीए भी कभी अपनी गलती स्वीकार नहीं करती है। राहुल गांधी ने विश्वास जताया कि इस गड़बड़ी के लिए भी किसी की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस दिशा में केवल पहला कदम था, आखिरी नहीं। उन्होंने मांग की कि एनटीए के शीर्ष नेतृत्व की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए और राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने एक ऐसी व्यवस्था बनाई है जो परीक्षा ठीक से नहीं करा सकती और फिर छात्रों को ही दोषी ठहराती है। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक प्रधानमंत्री इसका जवाब नहीं देते, वे चुप नहीं बैठेंगे।

पुनः परीक्षा का नया शेड्यूल

एनटीए द्वारा जारी नई सूचना के अनुसार, रद्द किए गए 3 विषयों की परीक्षाएं अब 9 सितंबर और 10 सितंबर को आयोजित की जाएंगी। इंग्लिश का पेपर 9 सितंबर को सुबह 9 बजे शुरू होगा। कॉमर्स विषय की परीक्षा 9 सितंबर को ही दोपहर 3 बजे से आयोजित की जाएगी। वहीं, सोशियोलॉजी का पेपर 10 सितंबर को सुबह 9 बजे होगा। राहत की बात यह है कि इन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए छात्रों को दोबारा कोई फीस नहीं देनी होगी। एनटीए की इस बार-बार की विफलता से उसकी साख पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया है।