म्यूचुअल फंड के माध्यम से मोटी कमाई करना अब कई निवेशकों के लिए एक वास्तविकता बन गया है और एचडीएफसी मिडकैप फंड ने पिछले 13 वर्षों में 10 लाख रुपये के निवेश को सवा करोड़ रुपये बनाकर एक शानदार उदाहरण पेश किया है। जिन निवेशकों ने लंबे समय तक इस फंड में अपना भरोसा बनाए रखा और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच टिके रहे, वे आज मालामाल हो चुके हैं और इस फंड ने सालाना 20 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न देकर अपने निवेशकों की संपत्ति में भारी बढ़ोतरी की है।
13 साल में 10 लाख रुपये कैसे बने 1 करोड़ 25 लाख रुपये
अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस फंड का प्रदर्शन वाकई हैरान करने वाला रहा है और यदि किसी व्यक्ति ने साल 2013 में एचडीएफसी मिडकैप फंड के डायरेक्ट ग्रोथ प्लान में 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि का निवेश किया होता और उस निवेश को बिना निकाले बनाए रखा होता, तो आज 13 साल बाद उस 10 लाख रुपये की वैल्यू बढ़कर लगभग 1 करोड़ 25 लाख रुपये हो गई होती। यह पूरा हिसाब फंड की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी में हुई लगातार बढ़ोतरी के आधार पर लगाया गया है। इस फंड के डायरेक्ट प्लान की शुरुआत 1 जनवरी 2013 को हुई थी, जबकि इसकी मूल स्कीम बाजार में जून 2007 से ही उपलब्ध है। पिछले 13 सालों के दौरान इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने सालाना 20 प्रतिशत से भी ज्यादा का रिटर्न दिया है। इसे ही लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि का जादू कहा जाता है, जहां समय के साथ आपके मुनाफे पर भी मुनाफा जुड़ता चला जाता है और आपकी संपत्ति तेजी से बढ़ती है।
यह फंड कहां और कैसे निवेश करता है
निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह फंड इतना पैसा कैसे बनाता है। दरअसल, यह एक ओपन-एंडेड स्कीम है, जिसका अर्थ है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार इसमें कभी भी पैसा जमा कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर निकाल भी सकते हैं। यह फंड मुख्य रूप से बाजार की मिडकैप यानी मंझोली कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। फंड हाउस की रणनीति के अनुसार, इस स्कीम का कम से कम 65 प्रतिशत हिस्सा हमेशा मिडकैप शेयरों में ही निवेशित रहता है। मिडकैप कंपनियां वे होती हैं जिनमें भविष्य में बड़ी कंपनी बनने की क्षमता होती है। जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, तो ये कंपनियां सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती हैं और इसके अलावा, फंड मैनेजर अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में पैसा बांटकर लगाते हैं, जिससे विविधता का लाभ मिलता है और जोखिम संतुलित रहता है।
मुनाफे के साथ जुड़ा है भारी जोखिम
शेयर बाजार का यह नियम है कि जहां रिटर्न अधिक होता है, वहां जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। एचडीएफसी का यह फंड काफी ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में आता है। मिडकैप कंपनियों के शेयर बाजार की चाल के अनुसार बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होते हैं। यदि बाजार में गिरावट आती है, तो इन शेयरों की कीमतें बहुत जल्दी गिर सकती हैं। इसलिए, यह स्कीम उन लोगों के लिए सही नहीं है जो बाजार की छोटी गिरावट से घबरा जाते हैं। इसमें निवेश केवल उन्हीं को करना चाहिए जो बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने का साहस रखते हों और लंबे समय तक निवेशित रहने का धैर्य रखते हों।
निवेश से पहले विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह
बाजार के विशेषज्ञ हमेशा यह सलाह देते हैं कि केवल पिछला प्रदर्शन देखकर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। भविष्य में भी यह फंड वैसा ही रिटर्न देगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। निवेश करने से पहले अपना आर्थिक लक्ष्य तय करना बहुत जरूरी है और आपको यह देखना चाहिए कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और कितने समय के लिए पैसा निवेश कर सकते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में असली वेल्थ तभी बनती है जब आप लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार एकमुश्त राशि निवेश कर सकते हैं या हर महीने एक निश्चित राशि की सिप यानी एसआईपी शुरू कर सकते हैं।
