RSS को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं: बीएल संतोष का प्रियांक खरगे को करारा जवाब

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष ने कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे की आरएसएस के पंजीकरण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह संगठन करोड़ों लोगों के भरोसे पर चलता है और विभाजन के समय भी इसने बिना किसी औपचारिक पंजीकरण के हिंदुओं की रक्षा की थी।

एल. संतोष ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण का मुद्दा उठाया था और 'हिंदू जागरण वेदिके' द्वारा आयोजित 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम में बोलते हुए संतोष ने स्पष्ट किया कि आरएसएस को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए किसी भी प्रकार के सरकारी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संगठन पिछले कई दशकों से लाखों लोगों के अटूट विश्वास और भरोसे के दम पर निरंतर कार्य कर रहा है।

पंजीकरण बनाम जन-भरोसा

एल. संतोष ने प्रियांक खरगे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि आरएसएस की शक्ति प्रशासनिक कागजों में नहीं, बल्कि समाज के साथ उसके जुड़ाव में निहित है। उन्होंने याद दिलाया कि देश के बंटवारे के कठिन समय में भी आरएसएस रजिस्टर्ड नहीं था, लेकिन इसके बावजूद संगठन के स्वयंसेवक हिंदुओं के साथ मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने तर्क दिया कि किसी संगठन का अस्तित्व केवल रजिस्ट्रेशन से तय नहीं होता। आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो करोड़ों लोगों के विश्वास से संचालित होता है और आज भी यह बिना किसी औपचारिक पंजीकरण के अपना कार्य पूरी निष्ठा से कर रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम का वास्तविक इतिहास

अपने संबोधन के दौरान संतोष ने भारत की आजादी के इतिहास पर भी चर्चा की। उन्होंने प्रचलित धारणाओं को चुनौती देते हुए कहा कि देश को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता हजारों क्रांतिकारियों और देशभक्तों के बलिदान का परिणाम है और उन्होंने बताया कि लाखों युवा पुरुषों, महिलाओं और सैनिकों ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराया था। आजादी के 80वें वर्ष का जश्न मनाते हुए उन्होंने मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे महान क्रांतिकारियों के योगदान को याद करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंग्रेजों ने हमें आजादी किसी उपहार के रूप में नहीं दी थी, बल्कि इसे संघर्षों के माध्यम से छीना गया था।

जनसांख्यिकी और राष्ट्रवाद का संबंध

भाजपा नेता ने जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और राष्ट्रीय भावना के बीच के संबंध पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी कम होती है, वहां भारत के प्रति जुड़ाव की भावना कमजोर होने लगती है और राष्ट्र-विरोधी तत्व सक्रिय हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बेंगलुरु की शिवाजीनगर और चामराजपेट विधानसभा सीटों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले 2 दशकों में इन क्षेत्रों से किसी भी राजनीतिक दल का कोई हिंदू उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका है। उन्होंने राजनीतिक दलों को चुनौती दी कि वे आगामी चुनावों में वहां से हिंदू उम्मीदवार उतारें। उन्होंने कहा कि हिंदू बहुमत में इसलिए रहने चाहिए ताकि भारत की मूल पहचान और संस्कृति अक्षुण्ण बनी रहे।

खरगे परिवार और रजाकारों का इतिहास

एल. संतोष ने उनके पारिवारिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार को हैदराबाद के रजाकारों के हिंसक हमलों का सामना करना पड़ा था। उस समय स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनके परिवार को अपनी जान बचाने के लिए गुलबर्गा (अब कलबुर्गी) भागना पड़ा था। संतोष ने दावा किया कि उस कठिन समय में आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने ही उन रजाकारों का डटकर मुकाबला किया था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रियांक खरगे के पिता को उस समय केवल उन्हीं कपड़ों में गांव छोड़ना पड़ा था जो उन्होंने पहने हुए थे, और यह आरएसएस ही था जिसने उन ताकतों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

अखंड भारत का सांस्कृतिक संकल्प

एल. संतोष ने 'अखंड भारत' के विचार को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अखंड भारत का सपना केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक गहरा सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी विचार है। उन्होंने इसे संभव बताते हुए जर्मनी और वियतनाम के एकीकरण का उदाहरण दिया और उन्होंने यह भी बताया कि कैसे इजराइल ने दुनिया भर से यहूदियों को उनकी मातृभूमि में वापस लाकर एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व पटल पर मजबूत हो रहा है और जो लोग भारत के प्रति दुर्भावना रखते हैं, वे दुनिया के किसी भी कोने में हों, अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने हर भारतीय से संकल्प लेने को कहा कि हमारे बुजुर्ग अपने जीवनकाल में अखंड भारत के स्वरूप को देख सकें।