प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर देश को संबोधित किया। इस भव्य आयोजन के बीच एक बार फिर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। यह लगातार दूसरा साल है जब कांग्रेस के इन शीर्ष नेताओं ने लाल किले पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया है।
बैठने की व्यवस्था और प्रोटोकॉल पर विवाद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के इस कार्यक्रम में शामिल न होने के पीछे बैठने की व्यवस्था और अन्य संबंधित मामलों में कांग्रेस नेताओं के साथ किया गया कथित अपमानजनक व्यवहार है। कांग्रेस का मानना है कि सरकारी आयोजनों में विपक्ष के नेताओं को वह सम्मान नहीं दिया जा रहा है जिसके वे हकदार हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने लगातार दो वर्षों से 15 अगस्त के इस आयोजन से दूरी बना रखी है।
दरअसल, यह पूरा विवाद साल 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान शुरू हुआ था। उस समय लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी को परंपरा और प्रोटोकॉल से हटकर दूसरी आखिरी कतार में बिठाया गया था। राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। विपक्ष ने उस समय कांग्रेस सांसद को यह सीट दिए जाने को देश की जनता का अपमान करार दिया था।
रक्षा मंत्रालय का तर्क
साल 2024 में जब यह विवाद खड़ा हुआ था, तब कार्यक्रम का आयोजन करने वाले रक्षा मंत्रालय ने अपनी सफाई पेश की थी। मंत्रालय का तर्क था कि ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से बैठने की व्यवस्था में थोड़ा बदलाव किया गया था। हालांकि, प्रोटोकॉल के नियमों के अनुसार, किसी भी औपचारिक सरकारी कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता को पहली कतार में बिठाया जाना अनिवार्य होता है। इसी प्रोटोकॉल के उल्लंघन को कांग्रेस ने गंभीरता से लिया है।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती कड़वाहट
विपक्ष और सरकार के बीच बिगड़ते रिश्तों का असर इस बार के मानसून सत्र में भी साफ तौर पर देखा गया। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त गुरुवार को समाप्त हुआ। इस सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच संबंधों में और अधिक गिरावट के संकेत मिले। सत्र के दौरान कामकाज के स्तर में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई और इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया।
सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के साथ हुई थी। पूरे सत्र के दौरान कुल 12 बिल पास किए गए, लेकिन इनमें से केवल एक बिल, जो पेपर लीक रोकने वाले कानून से संबंधित था, उस पर ही विस्तार से चर्चा हो सकी। बाकी बिलों पर वैसी चर्चा नहीं हुई जैसी अपेक्षित थी।
चाय पार्टी का बहिष्कार
सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा आयोजित की जाने वाली पारंपरिक चाय पार्टी का भी विपक्ष ने विरोध किया और कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस चाय पार्टी का बहिष्कार किया। यह बहिष्कार और लाल किले के कार्यक्रम से दूरी बनाना यह दर्शाता है कि सरकार और विपक्ष के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी यह राजनीतिक गतिरोध कम होता नहीं दिखा।
