भारतीय शेयर बाजार में कोहराम: 3 महीने में निवेशकों के 13 लाख करोड़ डूबे

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च तिमाही में भारतीय निवेशकों की इक्विटी संपत्ति में 12 लाख 60 हजार करोड़ रुपये की भारी गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव के कारण निफ्टी 50 में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई की ताजा मार्केट प्लस रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मार्च तिमाही के दौरान देश के निवेशकों की इक्विटी संपत्ति में करीब 12 लाख 60 हजार करोड़ रुपये की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार हाल के वर्षों में यह भारतीय शेयर बाजार की सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली तिमाहियों में से एक साबित हुई है। इस दौरान बाजार में आए भारी दबाव के कारण निफ्टी 50 सूचकांक में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई जिसने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

बाजार में गिरावट के मुख्य कारण

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से ईरान संघर्ष को लेकर बनी चिंताओं ने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर डाला। एक अन्य महत्वपूर्ण कारण वैश्विक निवेशकों का बदलता रुझान रहा है। वर्तमान में दुनिया भर के निवेशक एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर सेक्टर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस वजह से पैसा भारत जैसे उभरते बाजारों से निकलकर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तरफ जाने लगा है जो इन तकनीकों के प्रमुख केंद्र हैं।

घरेलू इक्विटी और संपत्ति का विवरण

एनएसई की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में घरेलू निवेशकों की कुल हिस्सेदारी घटकर 76 लाख 50 हजार करोड़ रुपये रह गई है। इसमें सीधे शेयर निवेश और म्यूचुअल फंड निवेश दोनों को शामिल किया गया है। अगर तिमाही आधार पर देखें तो इसमें करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल 2 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन अकेले मार्च तिमाही में ही 12 लाख 60 हजार करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट देखने को मिली जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाती है। हालांकि एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि अप्रैल 2020 से अब तक घरेलू निवेशकों की कुल इक्विटी संपत्ति में करीब 44 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी अब भी बरकरार है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी एफपीआई इस गिरावट में सबसे बड़े कारक बनकर उभरे हैं और रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 19 अरब 60 करोड़ डॉलर की भारी निकासी की है। इस लगातार बिकवाली का असर उनकी बाजार हिस्सेदारी पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में एफपीआई की हिस्सेदारी घटकर 17 साल के निचले स्तर यानी 15 दशमलव 8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं अगर निफ्टी 50 की बात करें तो वहां भी उनकी हिस्सेदारी घटकर 21 दशमलव 8 प्रतिशत रह गई है। विदेशी निवेशकों का यह पलायन भारतीय बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

म्यूचुअल फंड निवेश में मजबूती

बाजार में मचे इस कोहराम के बीच घरेलू म्यूचुअल फंड निवेश एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ा रहा है और रिपोर्ट के अनुसार बाजार गिरने के बावजूद म्यूचुअल फंड में निवेश का प्रवाह कम नहीं हुआ है। एसआईपी के जरिए लगातार निवेश जारी रहने से म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 11 दशमलव 4 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह लगातार 11वीं तिमाही है जब म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी अपने रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय निवेशक अब बाजार की गिरावट से घबराने के बजाय पेशेवर फंड मैनेजरों और व्यवस्थित निवेश योजनाओं पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।

व्यक्तिगत निवेशकों के व्यवहार में बदलाव

रिपोर्ट में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि खुद से शेयर खरीदने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार दूसरी तिमाही में घटकर 5 साल के निचले स्तर पर आ गई है। अब यह हिस्सेदारी केवल 9 दशमलव 1 प्रतिशत रह गई है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि छोटे निवेशक बाजार से बाहर हो रहे हैं। असल में अब लोग सीधे शेयर खरीदने के जोखिम के बजाय म्यूचुअल फंड और एसआईपी के माध्यम से निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं और भारतीय निवेशकों की सोच अब धीरे-धीरे लंबी अवधि और व्यवस्थित निवेश की तरफ बढ़ रही है जो बाजार की परिपक्वता का संकेत है।