PM Modi Egypt Visit / भारत के आगे मिस्र को मुस्लिम देशों की कभी नहीं रही परवाह, जानिए क्यों?

Zoom News : Jun 24, 2023, 01:59 PM
PM Modi Egypt Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिस्र (Egypt) यात्रा को दोनों देशों की दोस्ती के लिए गेम-चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में कई तरह बदलाव हो रहे हैं. सऊदी अरब और ईरान आगे बढ़े हैं. कई मुस्लिम देशों के साथ भारत के संबंध बहुत मधुर नहीं हैं इसके बावजूद मिस्र भारत के साथ अपने घनिष्ठ संबंध को लेकर गंभीर रहा है. यहां तक कि मिस्र ने भारत के आगे पाकिस्तान का भी कभी साथ नहीं दिया.

किसी भारतीय प्रधानमंत्री की मिस्र की आखिरी द्विपक्षीय यात्रा 1997 में हुई थी. तब दुनिया के पटल पर अलग किस्म के समीकरण थे. इसके बाद भले ही कुछ सालों तक भारत और मिस्र के रिश्तों में उदासीनता रही लेकिन 1950 और 1960 के दशक में दोनों देशों के संबंध काफी बेहतर थे. मुस्लिम देशों की फिक्र से दूर मिस्र ने हमेशा भारत संग दोस्ती निभाई है.

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौरान हुई भारत और मिस्र की दोस्ती

भारत और मिस्र के कूटनीतिक रिश्तों के अब 75 साल पूरे हो चुके हैं. भारत और मिस्र का दोस्ताना देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दौर से ही रहा है. उस वक्त मिस्र में राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासिर के हाथों में सत्ता थी. गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौरान देशों के बीच दोस्ती की बुनियाद पड़ी. सन् 1955 में दोनों देश फ्रेंडशिप ट्रिटी के तहत एक-दूसरे के नजदीक आए थे. पंडित जवाहरलाल नेहरू से नासर अब्दुल की अच्छी दोस्ती थी.

पूरे अरब वर्ल्ड में मिस्र एक प्रकार से लीडर देश रहा है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि मिस्र में शिक्षा की स्थिति बेहतर नहीं है और वह भारत से इस दिशा में मदद चाहता है. स्वेज नहर भारत के लिए भी काफी अहम है क्योंकि यह लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और यूरोप के लिए व्यापार का रास्ता बनाता है. मिस्र का भी मानना है कि आज दोनों देशों की दोस्ती जरूरी है. पश्चिम एशिया और अफ्रीका में इसका खासा असर देखा जा सकता है.

मोदी युग में नये सिरे सेबढ़ीभारत-मिस्र की दोस्ती

आज भारत और मिस्र के बीच नये सिरे संबंध विकसित हो रहे हैं. साल 2022 में इसकी दोबारा शुरुआत हुई, जब मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था. वो दूसरी बार भारत आए. कोरोना काल में भारत में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी हो गई थी तो मिस्र ने सिलिंडर भेजा था. वहीं 2022 में भारत ने भी मिस्र को 61,500 टन गेहूं मिस्र को भेजा.

दरअसल मिस्र अब तक रूस और यूक्रेन से गेहूं खरीदता रहा है लेकिन युद्ध के चलते जब मिस्र में गेहूं का संकट आ गया तो भारत ने उसकी मदद की. पिछले कुछ सालों में भारत और मिस्र के बीच व्यापार के साथ-साथ सुरक्षा सहयोग भी बढ़ा है. इस बार के समझौतों से दोनों देशों को लाभ होगा. दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ेगा और उनके उत्पादों को नया बाजार भी मिलेगा.

मीडिया से बातचीत में मिस्र के राजदूत वेल मोहम्मद अवद हमीद कहते हैं- दोनों नेता अपने-अपने देशों में आधुनिकीकरण, औद्योगीकरण, रोजगार, विकास और पर्यावरण को लेकर जागरुक हैं. मिस्र और भारत दोनों विकासशील देश हैं. हम अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एक-दूसरे की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं.

मिस्र ने पिछले साल नवंबर में शर्म-अल-शेख में COP27 शिखर सम्मेलन आयोजित किया था और भारत अब G20 का अध्यक्ष है. भारत ने G20 की अध्यक्षता के दौरान मिस्र को गेस्ट कंट्री के रूप में आमंत्रित किया है. COP27 पर्यावरण की लिहाज से काफी अहम प्रोजेक्ट था, इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक-दूसरे के सामने आए. और पर्यावरण की चुनौतियों से निपटने के मुद्दे पर चिंतन किया. अब G20 में मिस्र का आना दोनों देशों के लिए और भी अहम होगा.

मिस्र भारत के आगे पाकिस्तान की नहीं सुनता

मिस्र आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है. आतंकवाद के मुद्दे पर इस साल फरवरी में भारत-मिस्र कार्य समूह की तीसरी बैठक हुई थी. दोनों देश आतंकवाद से मुकाबले के लिए रणनीति बनाने पर सहमत हुए. दोनों ने आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग के नियंत्रण पर मंत्रणा की. इस बैठक के दौरान भी मिस्र को ना तो पाकिस्तान और ना ही उन मुस्लिम देशों की परवाह थी, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं.

मिस्र के राजदूत कहते हैं – पूरी दुनिया में धार्मिक सत्ता का संकट है. जिन्होंने विश्वसनीय संस्थानों में इस्लाम का अध्ययन नहीं किया है और जो इस्लाम के उच्च मूल्यों को नहीं जानते हैं, वे हमेशा धर्म और धार्मिक मूल्यों के बारे में ग़लतफ़हमी फैलाते हैं. इससे यह संकट और गहराता है.

मिस्र ने भारत के खिलाफ पाक के प्रस्ताव का नहीं दिया साथ

इस्लामिक देशों के सम्मेलन (OIC) में पाकिस्तान भारत के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आया था, कई मुस्लिम मुल्क उस प्रस्ताव के साथ खड़े थे लेकिन मिस्र ने भारत के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए पाकिस्तान का साथ देने से इनकार कर दिया. मोहम्मद पैगंबर पर नुपूर शर्मा की टिप्पणी को लेकर सारे मुस्लिम देश भारत पर हमलावर थे लेकिन मिस्र ने कोई टिप्पणी नहीं की. OIC में पाकिस्तान का प्रस्ताव तब गिर गया जब मिस्र ने उसका साथ नहीं दिया.

हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर मिस्र ने अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा है क्योंकि मिस्र खुद स्थायी सदस्य नहीं है और वह स्थायी सदस्यता चाहता है. लेकिन भारत और पाकिस्तान के मसले पर सुरक्षा परिषद में मिस्र हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है. पाकिस्तान ने जब जब कश्मीर का मुद्दा उठाया, मिस्र हमेशा भारत के साथ रहा और खुद को आतंकवाद विरोधियों की पंक्ति में रखा.

मिस्र को मुस्लिम देशों की परवाह क्यों नहीं?

पाकिस्तान समेत तुर्की, ईरान, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश के भारत के साथ बहुत मधुर संबंध नहीं रहे हैं. मिस्र को ये बात भली भांति पता है. इसके बावजूद मिस्र ने भारत के साथ लंबे समय से दोस्ती निभाई है. आतंकवाद को लेकर भी मिस्र पहले ही अपना रुख साफ कर चुका है. मिस्र का कहना है कि आतंकवादी हमलों में शामिल मुसलमान इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करते. मिस्र इस्लाम की बजाय अपने देश के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखता है.

राजदूत कहते हैं – मिेस्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्राथमिकता स्वेज़ नहर और लाल सागर की सुरक्षा से संबद्ध है.उनका कहना है भारत के साथ मिस्र एक सांस्कृतिक जुड़ाव महसूस करता है. भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश है. मिस्र में भी 110 मिलियन लोग रहते हैं. जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी आबादी है.

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