Team India / गंभीर के डेढ़ साल: सफेद गेंद में चैंपियन, लाल गेंद में नंबर-3 की पहेली

हेड कोच गौतम गंभीर के डेढ़ साल के कार्यकाल में टीम इंडिया ने लिमिटेड ओवर्स में दो खिताब जीते हैं, लेकिन टेस्ट फॉर्मेट में, खासकर घर में, खराब प्रदर्शन जारी है। नंबर-3 पर लगातार सात बल्लेबाजों को आजमाने का प्रयोग टीम को भारी पड़ रहा है, जिससे स्थिरता की कमी साफ दिख रही है।

भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर पिछले करीब डेढ़ साल से अपने पद पर हैं। इस दौरान टीम इंडिया ने सीमित ओवरों के प्रारूप में शानदार सफलता हासिल की है, जिसमें दो महत्वपूर्ण खिताब भी शामिल हैं। हालांकि, लाल गेंद के क्रिकेट, विशेषकर घरेलू मैदान पर, टीम का प्रदर्शन लगातार चिंता का विषय बना हुआ है और गंभीर के नेतृत्व में टेस्ट टीम को अपने ही घर में अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है, जो कुछ साल पहले तक अकल्पनीय था। यह स्थिति टीम प्रबंधन और कोच गंभीर पर लगातार सवाल खड़े कर रही है।

टेस्ट में गंभीर की रणनीति पर सवाल

गंभीर के कार्यकाल में, भारतीय टीम ने पिछले 12-13 महीनों में अपने घर में चार टेस्ट मैच गंवाए हैं। यह आंकड़ा भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक दुर्लभ और चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहां भारत को उसकी धरती पर हराना लगभग असंभव माना जाता था। इस खराब प्रदर्शन के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि कोच गंभीर के लगातार प्रयोग, विशेषकर बल्लेबाजी क्रम में, एक बड़ी वजह हैं। इन प्रयोगों में सबसे ज्यादा परेशानी नंबर-3 की बल्लेबाजी स्थिति में हो रहे लगातार बदलावों से उत्पन्न हो रही है, जिसकी झलक हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में भी देखने को मिली।

नंबर-3 पर लगातार प्रयोग

टीम इंडिया के नंबर-3 बल्लेबाजी क्रम में निरंतर फेरबदल गंभीर के कार्यकाल की एक प्रमुख विशेषता बन गई है। यह स्थिति टीम की स्थिरता और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। हालिया कोलकाता टेस्ट में, टीम इंडिया ने सबको चौंकाते हुए अपने नंबर-3 के बल्लेबाज साई सुदर्शन को प्लेइंग-11 से बाहर कर दिया। सुदर्शन को इससे पहले लगातार दो टेस्ट सीरीज, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज, में इसी महत्वपूर्ण पोजिशन पर उतारा गया था और उन्हें भविष्य के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था और हालांकि, उनका प्रदर्शन पूरी तरह से संतोषजनक नहीं था, लेकिन 22 साल की उम्र में यह उनकी अंतरराष्ट्रीय करियर की सिर्फ शुरुआत थी और उन्हें अधिक मौके दिए जाने की उम्मीद थी।

साई सुदर्शन का अचानक बाहर होना

साई सुदर्शन को नंबर-3 पर मौका देने के बाद अचानक बाहर करना कई सवाल खड़े करता है। इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में सुदर्शन ने कुछ अच्छी पारियां खेली थीं, जिससे लगा था कि टीम को इस महत्वपूर्ण स्थान पर एक स्थायी समाधान मिल गया है और उनकी युवावस्था और क्षमता को देखते हुए, उन्हें लगातार मौके देना एक तार्किक कदम प्रतीत होता था ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित कर सकें। मगर कोलकाता टेस्ट में कोच गंभीर ने सुदर्शन को ड्रॉप करते हुए ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को यह जगह दे दी, जिससे टीम की रणनीति में एक बार फिर बदलाव दिखा और नंबर-3 की पहेली और उलझ गई।

सात बल्लेबाजों का असफल प्रयोग

पिछले करीब डेढ़ साल में, भारतीय टेस्ट टीम में नंबर-3 की पोजिशन पर सात अलग-अलग बल्लेबाजों को आजमाया जा चुका है। यह आंकड़ा गंभीर के प्रयोगों की गंभीरता को दर्शाता है और जब गंभीर पिछले साल कोच बने थे, तब यह भूमिका शुभमन गिल निभा रहे थे, जिन्होंने इस दौरान 7 मैचों में इस नंबर पर बल्लेबाजी की थी। हालांकि, गिल के कप्तान बनने और चौथे नंबर पर फिक्स होने से पहले, उनकी जगह केएल राहुल और यहां तक कि विराट कोहली को भी एक-एक मैच में नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था। इनके अलावा, एक मैच में देवदत्त पडिक्कल को और एक बार इंग्लैंड में करुण नायर को भी इस स्थान पर उतारा गया और इंग्लैंड दौरे पर ही साई सुदर्शन को पहली बार इस रोल में मौका दिया गया था, और वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज तक वे लय हासिल करते हुए दिख रहे थे, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्हें अचानक फिर इस रोल से हटा दिया गया।

शुभमन गिल का नया रोल और नंबर-3 की चुनौती

शुभमन गिल ने नंबर-3 पर शुरुआत की थी, लेकिन विराट कोहली के संन्यास के ऐलान के बाद उन्हें नंबर-4 पर शिफ्ट कर दिया गया। नंबर-4 पर गिल ने शानदार प्रदर्शन किया है और खूब रन बनाए हैं, जिससे यह स्थान उनके लिए लगभग फिक्स हो गया है। हालांकि, गिल के इस बदलाव ने नंबर-3 की समस्या को और गहरा कर दिया है। टीम प्रबंधन अभी तक इस महत्वपूर्ण स्थान के लिए एक स्थायी और भरोसेमंद बल्लेबाज नहीं ढूंढ पाया है। गंभीर के लगातार प्रयोग इस समस्या को सुलझाने के बजाय और उलझाते हुए दिख रहे हैं, जिससे टीम की बल्लेबाजी क्रम में अनिश्चितता बनी हुई है।

स्थिरता की कमी और ऐतिहासिक संदर्भ

टेस्ट क्रिकेट में सफलता के लिए प्लेइंग-11 और विशेष रूप से बल्लेबाजी क्रम में निरंतरता और स्थिरता का बहुत बड़ा योगदान रहा है। भारतीय टीम के इतिहास को देखें तो पिछले 25 सालों में लंबे समय तक नंबर-3 पर राहुल द्रविड़ और नंबर-4 पर सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज साथ-साथ खेलते रहे। इन महान खिलाड़ियों के बाद, चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली ने इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला, जिससे टीम को एक मजबूत आधार मिला। मगर पुजारा के टीम से बाहर होने के बाद से ही भारतीय टीम नंबर-3 के लिए एक स्थायी समाधान हासिल नहीं कर पाई है। यह निरंतरता की कमी टीम के प्रदर्शन पर स्पष्ट रूप से दिख रही है और गंभीर के कार्यकाल में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। टीम को जल्द से जल्द इस महत्वपूर्ण स्थान के लिए एक स्थायी समाधान खोजने की आवश्यकता है ताकि टेस्ट क्रिकेट में उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस आ सके।

SUBSCRIBE TO OUR NEWSLETTER