सिंचाई पानी की मांग को लेकर पिछले 31 दिनों से घड़साना नई मंडी में चल रहा किसानों का महापड़ाव अब एक बड़े टकराव की ओर बढ़ गया है। प्रशासन को दिए गए रात 9 बजकर 15 मिनट तक का अल्टीमेटम समाप्त होने और मांगों पर कोई लिखित सहमति न बनने के बाद, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल ने हजारों किसानों के साथ श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय की तरफ कूच का ऐलान कर दिया है। सांसद बेनीवाल के इस बड़े ऐलान के बाद घड़साना धानमंडी में मौजूद हजारों किसान ट्रैक्टरों, गाड़ियों और अपने निजी वाहनों के काफिले के साथ श्रीगंगानगर की ओर बढ़ने लगे हैं और इस घटनाक्रम से पूरे क्षेत्र में भारी प्रशासनिक और पुलिसिया हलचल शुरू हो गई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस अलर्ट
रात 9 बजकर 15 मिनट की समय-सीमा बीतने के बाद मांगों पर लिखित समझौता न होने के कारण हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों ने गंगानगर की तरफ मार्च शुरू कर दिया है। इस टकराव को टालने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे रूट पर भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। प्रशासन द्वारा जगह-जगह मजबूत बैरिकेडिंग की जा रही है ताकि किसानों के काफिले को नियंत्रित किया जा सके। अनूपगढ़, खाजूवाला और घड़साना क्षेत्र के हजारों किसान धानमंडी में डटे हुए थे, और बेनीवाल के संबोधनों के बाद किसानों का जोश और आक्रोश चरम पर दिखाई दे रहा है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए क्यूआरटी, आरएसी और अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा कंपनियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
व्यापार मंडल का समर्थन और बाजार बंद
'खेत बचाओ-किसान बचाओ' संघर्ष समिति के समर्थन में स्थानीय संयुक्त व्यापार मंडल ने घड़साना और आसपास के कस्बों के बाजारों को पूरी तरह बंद रखा है। व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद होने और हाईवे पर किसानों के कूच के कारण क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। इससे पहले धानमंडी में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया। बेनीवाल ने मंच से दोटूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई किसानों के हक और स्वाभिमान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आंदोलन में जीत सिर्फ और सिर्फ किसानों की होगी और अगर हार हुई तो वह हनुमान बेनीवाल की होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार मांगें नहीं मान लेती, वे यहां से एक इंच भी नहीं हिलेंगे और अगला पड़ाव सीधे जयपुर में सचिवालय का घेराव होगा।
किसानों की मुख्य मांगें और रबी फसल का संकट
वर्तमान में रबी फसलों की बिजाई का बेहद महत्वपूर्ण समय चल रहा है और किसानों का कहना है कि यदि अभी पानी नहीं मिला तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग अनूपगढ़ शाखा नहर प्रणाली में पानी की कमी दूर कर टेल यानी अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाना और 6 महीने का स्थायी सिंचाई रेगुलेशन लागू करना है। इसके साथ ही किसान चार में से कम से कम दो समूहों में फसलों को बचाने के लिए समान जलापूर्ति की मांग कर रहे हैं। उनकी अन्य मांगों में पिछले सीजन में खराब हुई फसलों की विशेष गिरदावरी करवाकर तुरंत उचित मुआवजा दिलाना और राज्य सरकार के स्तर से स्वीकृत एक ठोस लिखित समझौता शामिल है।
आंदोलन का इतिहास और अब तक की वार्ता
किसान नेता नरेंद्र मान ने बताया कि किसानों ने सिंचाई के पानी समेत चार सूत्री मांगों को लेकर 10 सितंबर को आंदोलन शुरू किया था। शुरुआती दौर में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए और प्रशासन के सामने समस्या रखी थी। समाधान नहीं होने पर 18 सितंबर से किसानों ने घड़साना उपखंड कार्यालय के सामने महापड़ाव डाल दिया। इसके बाद आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया और किसानों ने प्रशासनिक काम ठप कर धरना जारी रखा। संघर्ष समिति की प्रशासन और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ता हुईं, लेकिन मांगों पर अंतिम सहमति और लिखित समझौता नहीं हो सका।
प्रशासनिक हलचल और भविष्य की रणनीति
रात के इस तनावपूर्ण माहौल में खुफिया विभाग और आला प्रशासनिक अधिकारी लगातार किसान नेताओं के संपर्क में हैं ताकि बीच का रास्ता निकाला जा सके। हालांकि, किसानों का काफिला श्रीगंगानगर की तरफ आगे बढ़ रहा है, जिससे अब पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर आ गई है। यदि जयपुर स्तर से कोई त्वरित और बड़ा फैसला नहीं लिया गया, तो जिला मुख्यालय पर एक बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है। इससे पहले शुक्रवार देर शाम भी घड़साना पंचायत समिति में वार्ता हुई थी जिसमें पूर्व मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी, निहालचंद मेघवाल और विधायक गुरवीर सिंह बराड़ आदि नेता शामिल हुए थे। किसान प्रतिनिधिमंडल ने रेगुलेशन में बदलाव, फसल खराबे के मुआवजे और बीमा क्लेम, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा अनूपगढ़ शाखा में स्थायी जल प्रबंधन जैसे मुद्दे उठाए थे और किसान नेता नरेंद्र मान ने वार्ता को सकारात्मक बताया था और कहा था कि सरकारी प्रतिनिधियों ने एक-दो दिन में समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान अब बिना लिखित समझौते के पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
