गोल्ड ईटीएफ से निवेशकों ने निकाले 725 करोड़ रुपये, क्या थम गई सोने की रफ्तार?

मई 2026 में गोल्ड ईटीएफ से 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई है। 12 महीनों की लगातार खरीदारी के बाद निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली की है, जबकि चांदी के प्रति आकर्षण बढ़ा है।

सोने के बाजार में पिछले एक साल से जारी निवेश की रफ्तार पर मई 2026 में थोड़ा ब्रेक लगता नजर आया है। लगातार 12 महीनों तक सोने में जमकर पैसा लगाने के बाद अब निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में गोल्ड ईटीएफ से 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की गई है। यह पिछले एक साल में पहला ऐसा मौका है जब निवेशकों ने सोने से इतनी बड़ी राशि बाहर निकाली है। गौरतलब है कि इससे ठीक एक महीने पहले यानी अप्रैल में निवेशकों ने 3040 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया था।

मुनाफावसूली के पीछे के मुख्य कारण

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस निकासी के पीछे घबराहट जैसी कोई बात नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी निवेश रणनीति का हिस्सा है। एम्फी के मुख्य कार्यकारी वेंकट चलसानी ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। विशेष रूप से आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी के बाद घरेलू बाजार में सोने के दाम काफी ऊपर चले गए थे और ऐसे में जिन निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, उन्होंने मौजूदा ऊंचे भावों पर अपना मुनाफा काटना यानी प्रॉफिट बुकिंग करना ज्यादा बेहतर समझा। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बदलाव की चर्चाओं ने भी निवेशकों को थोड़ा सतर्क कर दिया है।

एयूएम में बढ़ोतरी और बाजार का गणित

हैरानी की बात यह है कि मई में 725 करोड़ रुपये की निकासी होने के बावजूद गोल्ड ईटीएफ के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई के अंत तक गोल्ड ईटीएफ का कुल एयूएम 4 फीसदी बढ़कर लगभग 1 लाख 85 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। अगर हम सालाना आधार पर तुलना करें तो यह आंकड़ा करीब तीन गुना बढ़ चुका है। इस विरोधाभास का मुख्य कारण सोने की कीमतों में आई भारी तेजी है। भले ही निवेशकों ने कुछ पैसा निकाला, लेकिन फंड में मौजूद बाकी निवेश की वैल्यू बाजार भाव बढ़ने के कारण इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कुल फंड का आकार पहले से बड़ा हो गया।

चांदी की चमक ने निवेशकों को लुभाया

एक तरफ जहां सोने से पैसा निकाला जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ चांदी यानी सिल्वर ईटीएफ में निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा है। मई के दौरान सिल्वर फंड्स में 2133 करोड़ रुपये का मजबूत निवेश देखने को मिला है। बाजार के जानकारों का कहना है कि भविष्य में सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिफिकेशन के बढ़ते चलन के कारण औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग काफी बढ़ने वाली है। इसी भविष्य की संभावना को देखते हुए निवेशक लंबी अवधि के लिए चांदी को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ से हुई इस निकासी को सोने की रैली का अंत नहीं माना जाना चाहिए और साल 2026 की शुरुआत से अब तक के आंकड़े बताते हैं कि सोने में निवेश का रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी किसी एसेट की कीमत में एकतरफा तेजी आती है, तो बीच-बीच में मुनाफावसूली होना एक स्वस्थ बाजार की निशानी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना आज भी एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। इसलिए निवेशकों को केवल एक महीने के आंकड़ों के आधार पर जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए।