गूगल प्रोजेक्ट ईएटी: आंतरिक एआई वर्कप्लेस पहल का खुलासा, उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

गूगल कथित तौर पर 'प्रोजेक्ट ईएटी' नामक एक गुप्त पहल पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यस्थल को एआई-संचालित बनाना है। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, यह परियोजना एआई2 यूनिट के तहत संचालित है और इसका लक्ष्य कर्मचारियों की उत्पादकता और कोडिंग गुणवत्ता में सुधार करना है।

गूगल अपने आंतरिक कार्य संचालन को पूरी तरह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। एक हालिया लीक मेमो के अनुसार, कंपनी "प्रोजेक्ट ईएटी" (Project EAT) नामक एक मिशन चला रही है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों की उत्पादकता, कोडिंग की गुणवत्ता और आपसी सहयोग को उन्नत करना है। यह पहल गूगल की एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट (AI2) के भीतर शुरू की गई है। इस परियोजना के माध्यम से गूगल अपने स्वयं के उन्नत एआई टूल्स को रोजमर्रा के कार्यप्रवाह में एकीकृत करने की तैयारी कर रहा है।

इस विकासक्रम की पृष्ठभूमि में अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का हालिया संबोधन भी महत्वपूर्ण है। 11 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित 'एनआरएफ 2026: रिटेल्स बिग शो' के दौरान पिचाई ने स्पष्ट किया था कि गूगल विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर रिटेल और कॉर्पोरेट संचालन में एआई तकनीक को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने डेटा-संचालित प्रणालियों और ऑटोमेशन के माध्यम से व्यापारिक मॉडल को स्मार्ट और तेज बनाने की रणनीति पर जोर दिया था।

प्रोजेक्ट ईएटी की मुख्य अवधारणा

लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, "प्रोजेक्ट ईएटी" का नाम तकनीकी उद्योग की प्रसिद्ध कहावत "ईटिंग योर ओन डॉगफूड" से प्रेरित है। इसका अर्थ है कि कोई भी कंपनी अपने उत्पादों को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले स्वयं उनका गहन उपयोग और परीक्षण करती है। गूगल इस रणनीति के तहत अपने एआई उत्पादों को बाजार में उतारने से पहले अपने हजारों कर्मचारियों के माध्यम से टेस्ट कर रहा है। इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य संगठन के भीतर एआई टूल्स के उपयोग को मानकीकृत करना और कर्मचारियों को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार करना है।

एआई2 यूनिट की भूमिका और नेतृत्व

रिपोर्टों के अनुसार, यह पूरी परियोजना गूगल की 'एआई एंड इंफ्रास्ट्रक्चर' यूनिट के अधीन है, जिसे आंतरिक रूप से 'एआई2' कहा जाता है। यह इकाई गूगल के डेटा सेंटर, कस्टम चिप्स और एआई की बुनियादी संरचना के विकास के लिए जिम्मेदार है। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का नेतृत्व कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी अमीन वहदत (Amin Vahdat) कर रहे हैं और एआई2 यूनिट का लक्ष्य उत्पादकता टूल्स से लेकर जटिल कोडिंग सिस्टम तक, हर क्षेत्र में एआई के अनुप्रयोग को प्राथमिकता देना है।

कार्यप्रणाली और कोडिंग में सुधार

लीक मेमो में इस बात का उल्लेख है कि गूगल भविष्य में खुद को एक "एआई-पावर्ड वर्कप्लेस" के रूप में स्थापित करना चाहता है। इसके तहत एडवांस कोड असिस्टेंस एआई टूल्स का उपयोग किया जा रहा है, जिससे डेवलपर्स की गति में वृद्धि होने की संभावना है। कंपनी का मानना है कि एआई के माध्यम से दोहराए जाने वाले कार्यों को कम किया जा सकता है, जिससे कर्मचारी अधिक रचनात्मक और नवाचारी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे और इससे न केवल काम की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और परीक्षण परिणाम

आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, प्रोजेक्ट ईएटी का 12 हफ्ते का शुरुआती परीक्षण चरण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान डेवलपर स्पीड में उल्लेखनीय सुधार और कोड की त्रुटियों में कमी देखी गई है। गूगल की यह रणनीति न केवल आंतरिक दक्षता बढ़ाने के लिए है, बल्कि यह तेजी से बदलते वैश्विक एआई परिदृश्य में अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने का एक प्रयास भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी ही तकनीक का उपयोग करके गूगल संभावित जोखिमों को कम करने और थर्ड-पार्टी एआई एकीकरण को सुव्यवस्थित करने में सक्षम होगा।

प्रोजेक्ट ईएटी गूगल के भविष्य के रोडमैप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पहल दर्शाती है कि कंपनी केवल एआई उत्पादों की प्रदाता ही नहीं, बल्कि एआई-आधारित कार्य संस्कृति की अग्रणी भी बनना चाहती है और आने वाले समय में इस मॉडल को एआई2 यूनिट से निकालकर पूरे संगठन में लागू करने की योजना है, जो वैश्विक कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है।

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