Gupt Navratri 2026 / गुप्त नवरात्रि 2026 का 'बड़ा' रहस्य: पहले दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना 'झटका' लगेगा!

गुप्त नवरात्रि 2026 आज 19 जनवरी से शुरू हो गई है, जो 27 जनवरी तक चलेगी. यह साधना और संयम का पर्व है, जिसमें मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से उपासना की जाती है. पहले दिन कुछ गलतियां करने से आपकी पूरी साधना अधूरी रह सकती है, इसलिए इन कामों से बचें.

सनातन परंपरा में नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को भीतर से जगाने और आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण समय मानी जाती है. इन्हीं नवरात्रियों में से एक है गुप्त नवरात्रि, जिसका विशेष महत्व है और यह दिखावे से दूर, मन की गहराइयों में साधना और आत्मिक शुद्धि का अवसर प्रदान करती है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत आज यानी. 19 जनवरी से हो चुकी है और इसका समापन 27 जनवरी को होगा. इन नौ दिनों में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से उपासना की जाती है, जिनका संबंध तंत्र, मंत्र, योग और आत्मिक उन्नति से जुड़ा हुआ है.

गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से बिल्कुल अलग होती है. जहां सामान्य नवरात्रि में उत्सव, पंडाल और सार्वजनिक पूजा-अर्चना का माहौल होता है, वहीं गुप्त नवरात्रि में बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि मन, विचार और कर्म की शुद्धता सबसे अधिक मायने रखती है. यह एक व्यक्तिगत और गोपनीय साधना का काल है. यही कारण है कि इस दौरान कुछ ऐसे कार्य होते हैं, जिन्हें अगर पहले ही दिन कर लिया जाए, तो पूरी साधना का फल अधूरा रह सकता है और साधक को अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते. आइए जानते हैं वे कौन-से काम हैं, जिन्हें गुप्त नवरात्रि के पहले दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए.

साधना को गुप्त रखें

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, गुप्त नवरात्रि का मूल मंत्र ही गोपनीयता है और इस पूजा की सबसे पहली और महत्वपूर्ण शर्त ही गोपनीयता है. यदि आप कोई विशेष मंत्र जप, अनुष्ठान, या तांत्रिक साधना कर रहे हैं, तो इसके बारे में किसी बाहरी व्यक्ति को, यहां तक कि अपने करीबी मित्रों या रिश्तेदारों को भी न बताएं और अपनी पूजा और संकल्प को जितना गुप्त रखेंगे, आपकी आध्यात्मिक शक्ति उतनी ही बढ़ेगी और साधना का प्रभाव उतना ही गहरा होगा. शास्त्रों में कहा गया है कि साधना की ऊर्जा को दूसरों के साथ साझा करने से वह बिखर जाती है और उसका प्रभाव कम हो जाता है.

इसलिए, अपनी साधना को अपनी आत्मा और ईश्वर के बीच का एक पवित्र संवाद बनाए रखें. मां दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं, लेकिन वह शांति, करुणा और धैर्य की भी प्रतीक हैं. गुप्त नवरात्रि के पहले दिन संकल्प लेते समय अपने मन को शांत और स्थिर रखना अत्यंत आवश्यक है और इस दौरान किसी को अपशब्द न बोलें, न ही घर में किसी प्रकार का क्लेश या वाद-विवाद करें. क्रोध और कटु वचन नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जो आपकी साधना में बाधा डाल सकते हैं. एक शांत और सकारात्मक वातावरण ही आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल होता है और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने से मन भी शांत रहता है और ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है, जिससे आप मां दुर्गा की कृपा को पूर्ण रूप से प्राप्त कर सकते हैं.

तामसिक भोजन से दूरी बनाएं

इन नौ दिनों में सात्विकता का पालन करना अनिवार्य माना गया है. यदि आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रवेश पूर्णतः वर्जित होना चाहिए और पहले दिन ही अपने रसोई घर को शुद्ध कर लें और केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तामसिक भोजन मन को चंचल, अशांत और नकारात्मक बनाता. है, जिससे ध्यान लगाना और आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करना कठिन हो जाता है. 'जैसा अन्न वैसा मन' की कहावत बिल्कुल सही है; अशुद्ध भोजन आपके विचारों को भी दूषित कर देता है और आपकी साधना की पवित्रता को भंग करता है. इसलिए, इन दिनों में शुद्ध और सात्विक आहार ही लें.

ब्रह्मचर्य का पालन और आलस्य का त्याग

गुप्त नवरात्रि आत्मिक उन्नति और ऊर्जा संचय का समय है. इन नौ दिनों में शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह आपकी ऊर्जा को आध्यात्मिक लक्ष्यों की ओर मोड़ने में मदद करता है. इसके अलावा, दिन के समय सोने से बचें. शास्त्रों में व्रत या साधना के दौरान दिन में सोना वर्जित माना गया है, क्योंकि यह आलस्य का प्रतीक है और आपकी साधना के संकल्प को कमजोर करता है. दिन में सोने से शरीर और मन में भारीपन आता है, जिससे आप अपनी पूजा और ध्यान पर ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और रात्रि जागरण और सुबह जल्दी उठकर साधना करना अधिक फलदायी माना जाता है.

बाल और नाखून काटने की मनाही

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पावन दिनों में बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है. यह शरीर की ऊर्जा को भंग करने वाला माना जाता है और इसे साधना की पवित्रता के प्रतिकूल समझा जाता है और इन दिनों में शरीर को प्राकृतिक अवस्था में रखने और बाहरी सौंदर्य प्रसाधनों से दूर रहने का विधान है, ताकि पूरा ध्यान आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक विकास पर केंद्रित हो सके. इन नियमों का पालन करके ही साधक गुप्त नवरात्रि की पूर्ण कृपा प्राप्त कर सकता है और अपनी साधना को सफल बना सकता है.