बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी सरकार बनाएगी हाई पावर्ड कमिटी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

भारत को साल 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ सरकार बैंकिंग क्षेत्र में बड़े और क्रांतिकारी बदलाव करने की तैयारी कर रही है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक नई और विशेष उच्चाधिकार प्राप्त समिति (हाई-पावर्ड कमिटी) का गठन किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 के पहले दिन इस महत्वपूर्ण योजना की जानकारी दी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के बैंकिंग ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक, त्वरित और ग्राहकों के लिए अधिक सुलभ बनाना है, ताकि बैंक अर्थव्यवस्था की मजबूती में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

मजबूत वित्तीय स्थिति और एनपीए में कमी

वित्त मंत्री ने सम्मेलन के दौरान इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि देश के बैंक वर्तमान में आर्थिक रूप से अत्यंत सुदृढ़ स्थिति में हैं। बैंकों का फंसा हुआ कर्ज यानी एनपीए इस समय अपने ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बैंकों की बैलेंस शीट अब साफ-सुथरी है और वे बड़े सुधारों को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह मजबूती सरकार को बैंकिंग क्षेत्र में अगले चरण के सुधारों को बिना किसी वित्तीय दबाव के आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।

युवाओं के लिए माई भारत प्लेटफॉर्म से जुड़ाव

देश की कुल जनसंख्या का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा 15 से 29 वर्ष के युवाओं का है। इसी विशाल युवा शक्ति को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेवाओं को उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप ढाला जा रहा है। सरकार युवाओं को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के लिए युवा मामलों के मंत्रालय के राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म मेरा युवा भारत (माई भारत) का उपयोग करेगी। इस प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में 2 करोड़ 60 लाख से अधिक युवा पहले से ही पंजीकृत हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से युवाओं को एजुकेशन लोन, इंटर्नशिप के अवसर, स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता और वित्तीय क्षेत्र में करियर बनाने की संभावनाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा।

जमा राशि बढ़ाने और वैश्विक बाजार पर ध्यान

बैंकिंग सुधारों का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आम जनता की बचत और बैंकों में उनकी जमा राशि को बढ़ाना है और सम्मेलन में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई कि बैंकों और ग्राहकों के बीच के संबंधों को कैसे और अधिक प्रगाढ़ बनाया जाए ताकि लोग अपनी बचत को बैंकों में जमा करने के लिए प्रोत्साहित हों। इसके साथ ही, सरकारी बैंकों को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के बढ़ते बाजार का लाभ उठाने के लिए तैयार किया जा रहा है और इससे न केवल बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश में निवेश के चक्र को भी नई गति मिलेगी।

क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण का नया स्वरूप

इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन भी कई अहम फैसले लिए जाने की उम्मीद है, जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ेगा। बैंकिंग क्षेत्र अब क्रेडिट कार्ड के व्यवसाय को पूरी तरह से नए सिरे से परिभाषित करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, कृषि और बागवानी से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ऋण देने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और सुगम बनाने पर विचार किया जा रहा है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग) को बिना किसी देरी के वित्तीय सहायता मिले, इसके लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाएगी। वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया ने कहा कि इन सभी चर्चाओं को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे बैंक एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।