मिडिल ईस्ट संकट के बीच वित्त मंत्री का 3Fs फॉर्मूला, थमेगी महंगाई की रफ्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने सिडबी के कार्यक्रम में एमएसएमई के 8 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान पर भी चिंता जताई।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा (3एफ) पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। मुंबई में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के 37वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया देश की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से संतुलित और सुनियोजित है और वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में इन तीन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

3एफ फॉर्मूला: ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा पर ध्यान

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि मौजूदा वैश्विक माहौल में फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्स यानी 3एफ पर विशेष ध्यान देना समय की मांग है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने के लिए की गई हालिया अपीलों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह बहुत महत्वपूर्ण हो गया है और सीतारमण के अनुसार, इन तीन क्षेत्रों पर नियंत्रण और सही प्रबंधन के जरिए ही अंतरराष्ट्रीय संकटों के प्रभाव से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और आयात पर निर्भरता को कम करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

बढ़ती कीमतें और राजस्व का नुकसान

आर्थिक आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौती से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ उर्वरक की कीमतें भी अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा, सोने की ऊंची कीमतें भी बाहरी क्षेत्र के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं। सीतारमण ने उन लोगों की कड़ी आलोचना की जो प्रधानमंत्री की अपीलों के बाद देश में निराशावादी और नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में भय फैलाने की कोई गुंजाइश नहीं है और लोगों में विश्वास बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

एमएसएमई क्षेत्र और भुगतान की समय-सीमा

वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की समस्याओं पर भी विस्तार से बात की और उन्होंने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र का 8 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जो उनकी कार्यशील पूंजी और विकास की गति को बाधित कर रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को सख्त निर्देश दिए कि वे एमएसएमई के भुगतान में 45 दिन की समय-सीमा से अधिक का विलंब न करें। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों को समय पर भुगतान मिलना उनकी उत्तरजीविता और देश की औद्योगिक प्रगति के लिए अनिवार्य है।

घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

निर्मला सीतारमण ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में जो भी चुनौतियां सामने आ रही हैं, वे मुख्य रूप से बाहरी कारणों से हैं। इसके विपरीत, भारत की आंतरिक आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और सुदृढ़ बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हमें अपने शब्दों और कार्यों से जनता के बीच विश्वास पैदा करना चाहिए, न कि भ्रम या डर। वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार की संतुलित नीतियों और 3एफ फॉर्मूले के प्रभावी कार्यान्वयन से भारत वैश्विक संकटों के बावजूद अपनी विकास यात्रा को जारी रखने में सफल होगा। उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे देश की आर्थिक प्रगति में सकारात्मक योगदान दें।