मिडिल ईस्ट युद्ध के 100 दिन: शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के डूबे 8 लाख 40 हजार करोड़ रुपये

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के 100 दिनों ने भारतीय शेयर बाजार को झकझोर कर रख दिया है। निवेशकों को 8 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है।

पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को 100 दिन पूरे हो चुके हैं और इस संघर्ष की आग ने न केवल मानवीय संकट पैदा किया है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारतीय शेयर बाजार को भी बुरी तरह झुलसा दिया है। इन 100 दिनों के दौरान भारतीय निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख 40 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम गिरावट आई है। लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मिसाइल हमलों के कारण बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। निवेशकों के लिए यह समय अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने और बाजार की चाल को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

भारतीय बाजार के सामने दोहरी चुनौतियां

मिडिल ईस्ट में युद्ध के इन 100 दिनों के दौरान भारतीय शेयर बाजार को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पहली और सबसे बड़ी चुनौती जियोपॉलिटिकल टेंशन की रही है जिसकी वजह से खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। दूसरी बड़ी चुनौती विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की जा रही भारी बिकवाली है। मौजूदा साल में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 28 अरब डॉलर की निकासी की है। यह बिकवाली ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय कंपनियों की कॉर्पोरेट कमाई के अनुमानों में लगातार कटौती की जा रही है।

विशेषज्ञों की राय और वैश्विक बाजार का हाल

वेस्ट एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से विश्लेषकों ने कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए MSCI इंडिया के मुनाफे के अनुमान को 16 प्रतिशत से घटाकर 13 प्रतिशत कर दिया है। वैश्विक स्तर पर नैस्डैक में 4 रुपये 18 पैसे की भारी गिरावट (प्रतिशत के संदर्भ में) ने स्थानीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ और वीके विजयकुमार के अनुसार बाजार के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं। लेबनान में इजराइल की कार्रवाई और ईरान द्वारा इजराइल पर दागी गई मिसाइलों ने ब्रेंट क्रूड को 96 डॉलर के पार पहुंचा दिया है। इसके अलावा अमेरिका से आए रोजगार के आंकड़े मजबूत होने के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।

पूंजी के पुनर्वितरण की उम्मीद

डॉ और विजयकुमार ने एक सकारात्मक पहलू की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हुई हालिया बिकवाली मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में थी। इससे निवेश का रुख एआई (AI) ट्रेड से हटकर नॉन-एआई ट्रेड की ओर बदल सकता है जो भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर एआई ट्रेड में निवेश कम होता है तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी रुक सकती है या निवेश वापस भारत की ओर मुड़ सकता है। इस बदलाव पर नजर रखना निवेशकों के लिए बहुत जरूरी है।

सेक्टरवार प्रदर्शन: बैंकिंग और पीएसयू शेयरों में बड़ी गिरावट

बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि तनाव बढ़ने का सबसे बुरा असर बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर पर पड़ा है। पिछले 100 दिनों में निफ्टी की वैल्यू में 7 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है लेकिन पीएसयू (PSU) बैंकों को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। युद्ध शुरू होने के बाद से निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट आई है जिससे मार्केट कैपिटलाइजेशन में 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की वैल्यू 18 रुपये 60 पैसे (प्रतिशत) गिर गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा में 18 रुपये 10 पैसे, पंजाब नेशनल बैंक में 17 रुपये 50 पैसे, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 17 रुपये 40 पैसे और बैंक ऑफ इंडिया में 19 रुपये 60 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है।

तेल, गैस और आईटी सेक्टर का हाल

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद ऑयल और गैस शेयरों में लगभग 9 रुपये 40 पैसे (प्रतिशत) की गिरावट देखी गई है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) में 23 रुपये 50 पैसे और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) में 26 रुपये 20 पैसे की गिरावट आई है। आईटी सेक्टर की बात करें तो नैस्डैक की गिरावट के कारण निफ्टी आईटी 5 रुपये 20 पैसे (प्रतिशत) नीचे आ गया है। टाटा ग्रुप की टीसीएस में 16 रुपये 60 पैसे, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 16 रुपये 90 पैसे और इंफोसिस में 7 रुपये 90 पैसे की गिरावट आई है।

ऑटो और अन्य ब्लू-चिप शेयरों की स्थिति

ऑटो सेक्टर भी इस मंदी से अछूता नहीं रहा है और निफ्टी ऑटो में 7 रुपये 10 पैसे (प्रतिशत) की गिरावट आई है। टाटा मोटर्स में 26 रुपये 90 पैसे और अशोक लेलैंड में 31 रुपये 20 पैसे की भारी गिरावट देखी गई है। ब्लू-चिप शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज 7 रुपये 40 पैसे, एचडीएफसी बैंक 15 रुपये 80 पैसे, आईटीसी 10 रुपये 50 पैसे और मारुति सुजुकी 12 रुपये 20 पैसे नीचे गिरे हैं। बजाज फाइनेंस में 10 रुपये 70 पैसे और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में 18 रुपये की गिरावट आई है।

फार्मा और स्मॉलकैप में दिखी मजबूती

बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया है। निफ्टी फार्मा में 5 रुपये 60 पैसे (प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 3 रुपये 60 पैसे (प्रतिशत) की बढ़त दर्ज की गई है। इसके अलावा डिफेंस, मेटल और एनर्जी सेक्टर में भी कुछ सुधार देखा गया है। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स जैसे निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 या तो स्थिर रहे हैं या उनमें मामूली बढ़त हुई है जो घरेलू विकास की मजबूती को दर्शाता है।

भविष्य की राह और सरकारी कदम

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार आने वाले दो महीनों में भारत में प्रति शेयर आय (EPS) में 3 प्रतिशत की और कटौती हो सकती है। पूंजी की निकासी को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार ने कई संरचनात्मक सुधार किए हैं। इनमें सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर टैक्स छूट और एफसीएनआर (FCNR) डिपॉजिट पर हेजिंग लागत वहन करना शामिल है। इन उपायों से भारतीय रुपया जो गिरकर 96 रुपये 96 पैसे के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया था अब मजबूत होकर 94 रुपये 94 पैसे पर आ गया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी बाजार को सहारा दिया है और इस साल अब तक 44 अरब डॉलर का निवेश किया है। फंड मैनेजर्स का मानना है कि कुछ शेयरों के वैल्यूएशन अब आकर्षक स्तर पर आ गए हैं जिससे भविष्य में राहत मिल सकती है।